वायु प्रदूषण की समस्या अब इतनी विकराल हो चुकी है कि हर साल सैकड़ों लोगों की मौत वायु प्रदूषण से पैदा हुई बीमारियों के चलते हो जती है। राजधानी दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में फैले प्रदूषण ने बहुतों को अस्पताल पहुंचा दिया है। हवा में फैलते जहर ने लोगों के अंदर सांस लेने में दिक्कत, इन्फ्लेमेशन, अस्थमा, एलर्जी आंखों में जलन, पानी आना जैसी बीमारियों का शिकार बना दिया है।

डॉक्टरों का कहना है कि हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा ज्यादा होने से ब्लड वेसल्स में सूजन आ जाता है, जिससे धमनियां सख्त हो जाती हैं। ऐसा होने पर स्ट्रोक या फिर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण और हमारी लाइफस्टाइल के चलते धीरे-धीरे हमें श्वसन संबंधी सहित किडनी और फेफड़ों की बीमारियां हमें तेजी से होने लगी हैं।

यह ऐसे में अस्पताल का खर्च भी बढ़ रहा है। आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस हो सकता है। लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि आपकी पॉलिसी में इन नई बीमारियों के लिए कवर मिल रहा है या नहीं।

बड़ी इंश्योरेंस कंपनियां अपने हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में ऐसी बीमारियों का कवर देती हैं लेकिन फिर भी आपको कोई भी कवर लेने से पहले एक बार ध्यान से डॉक्यूमेंट की एक-एक लाइन पढ़ लेनी चाहिए।

अधिकतर इंश्योरेंस कंपनियां वायु प्रदूषण जनित समस्याओं जैसे- अस्थमा, ब्रोंकाइटिस COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) या फिर न्यूमोनिया जैसी बीमारियों के लिए कवर देती हैं। ऐसी बीमारियां, जिनमें हॉस्पिटलाइजेशन करना पड़े या फिर एक्टिव मेडिकेशन हो रहा हो, उनके लिए इंश्योरेंस कवर मिलता है, इसके लिए आपको पॉलिसी के शर्त और नियम पढ़ लेने चाहिए।


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