पिछले कुछ सालों में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी (Blockchain Technology) का इस्तेमाल बढ़ा है। टेक्नोनलॉजी और आईटी कंपनियां अपने बिजनेस प्रोसेस के ऑटोमेशन के लिए ब्लॉकचेन का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके फायदे को देखते हुए अब ट्रेडिशनल बिजनेसेज भी बाजार में अपनी बढ़त बनाए रखने और तेजी से बढ़ती कस्टमर डिमांड पूरी करने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू कर रहे हैं। कई लोग ब्लॉकचेन और बिटकॉइन (Bitcoin) को लेकर कनफ्यूज रहते हैं। हम आपको ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और बिटकाइन से इसके संबंध के बारे में बता रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी है। पिछले कुछ सालों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इसने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने बड़ा चैलेंज पेश किया है। बिटकॉइन सबसे मशहूर क्रिप्टोकरेंसी है। कई लोग बिटकॉइन और ब्लॉकचेन को एक ही चीज समझते हैं। लेकिन दोनों के बीच बहुत अंतर है। हालांकि, दोनों एक दूसरे से संबंधित हैं। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर बिटकॉइन पहला प्रोजेक्ट है। ब्लॉकचेन एक डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी है। यह दो पार्टी के बीच हुए ट्रांजेक्शन को रिकॉर्ड करता है।
बिटकॉइन दुनिया की पहली और सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। बिटकॉइन के अलावा कई दूसरी क्रिप्टोकरेंसीज भी मौजूद हैं। बिटकॉइन ट्रांजेक्शंस डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर के इस्तेमाल से स्टोर और टांसफर किए जाते हैं। ब्लॉकचेन वह टेकनोलॉजी है, जो बिटकॉइन ट्रांजेक्शन लेजर को मेंटेन करती है। बिटकॉइन के इस्तेमाल से बिजनेसेज ट्राजेक्शन बहुत जल्द पूरा कर सकते हैं। क्रिप्टो बिजनेसेज को ऐसे एल्गोरिद्म के इस्तेमाल का मौका देता है, जिससे फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन रियल टाइम में हो सकते हैं। जिस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया को बदल रही है, उसी तरह ब्लॉकचेन और बिटकॉइन बिजनेस में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
दुनिया में कई देश ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने को कोशिश कर रहे हैं। कई प्रोसेसेज के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। उधर, बिटकॉइन के रेगुलेशन के लिए भी दुनियाभर में कोशिश हो रही है। इंडिया में भी सरकार ने कहा है कि वह क्रिप्टोकरेंसी को लेकर व्यापक पॉलिसी बना रही है। अभी इसके लिए विचारविमर्श जारी है। सरकार क्रिप्टो के लिए कानून बनाने के वास्ते संसद में विधेयक पेश करेगी।