भारत में क्रिप्टोकरेंसी का सफर

पाबंदियों का सामना करने के बाद अब सख्त रेगुलेशंस की आशंकाओं के बीच, वर्चुअल एसेट को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है

अपडेटेड Jan 21, 2022 पर 11:38 AM
भारत में क्रिप्टोकरेंसी के सफर पर डालिए एक नजर

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का सफर रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। पाबंदियों का सामना करने के बाद अब सख्त रेगुलेशंस की आशंकाओं के बीच, इस वर्चुअल एसेट को कई गंभीर चुनौतियों से जूझना पड़ा है। भारत में क्रिप्टोकरेंसीज के फ्यूचर को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, अनरेगुलेटेड डिजिटल एसेट्स खासकर बिटकॉइन में निवेश का ट्रेंड 2020 के बाद काफी बढ़ा है। कई घरेलू क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस से मिले डाटा से पता चलता है कि 1.5-2 करोड़ भारतीयों ने इस वर्चुअल एसेट में निवेश किया है। इससे इस साल नवंबर में यह 10 अरब डॉलर के लेवल पर जा चुका है। क्रिप्टोकरेंसी अपनाने वालों की बढ़ती संख्या से देश में निवेश का तरीका बदल गया है, जो अभी तक गोल्ड और अन्य सुरक्षित एसेट्स में निवेश करते रहे हैं। बहुप्रतीक्षित क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफीशियल डिजिटल करेंसी बिल आने से पहले, वर्चुअल एसेट्स के अभी तक के सफर पर नजर डालते हैं।

2008: क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत

साल 2008 में एक सातोशी नाकामोटो नाम के छद्म नाम वाले एक डेवलपर द्वारा “बिटकॉइनः एक पीयर टू पीयर इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम” शीर्षक वाले पेपर के प्रकाशन के साथ क्रिप्टोकरेंसी का सफर शुरू हुआ था।


2010: क्रिप्टो की पहली बिक्री

दो साल बाद, बिटकॉइन के इस्तेमाल से पहली बार कोई सामान बिका जब एक शख्स ने दो पिज्जा के बदलने में 10,000 बिटकॉइन का भुगतान किया। इस तरह, पहली बार क्रिप्टोकरेंसी के साथ कैश वैल्यू जुड़ गई। कुछ समय बाद ही लाइटकॉइन, नेमकॉइन और स्विफ्टकॉइन जैसे क्रिप्टोकरेंसी सामने आईं और डिजिटल असेट को लेकर आकर्षण बढ़ने लगा।

2013: RBI ने जारी किया क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित पहला सर्कुलर

भारत में क्रिप्टो इनवेस्टमेंट बढ़ने और जेबपे, पॉकेट बिट्स, कॉइनसिक्योर, कॉइनेक्स और यूनोकॉइन जैसे एक्सचेंजेस के सामने आने से, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 2013 में एक सर्कुलर जारी करके यूजर्स को वर्चुअल करंसी से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर आगाह किया।

2016-2018 : डिमोनेटाइजेशन और आरबीआई का क्रिप्टो पर बैंकिंग बैन

डिमोनेटाइजेशन के प्रयोग के चलते डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता मिलने से क्रिप्टो इनवेस्टमेंट को अनचाहा प्रोत्साहन मिला और टेक सेवी कस्टमर्स इन वर्चुअल असेट्स की ओर आकर्षित हुए। भारतीय बैंकों ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस पर ट्रांजैक्शन को अनुमति देना चाही रखा, जिसके चलते आरबीआई को 2017 में एक अन्य सर्कुलर जारी करके वर्चुअल कॉइंस को लेकर अपनी आशंकाएं सामने रखनी पड़ीं। आखिर में, 2017 के अंत में आरबीआई और वित्त मंत्रालय द्वारा एक चेतावनी जारी करके कहना पड़ा कि वर्चुअल करंसी लीगल टेंडर नहीं हैं।

मार्च, 2018 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डिजिटल टैक्स (सीबीडीटी) ने वित्त मंत्रालय को वर्चुअल करंसीजी पर प्रतिबंध के लिए एक ड्राफ्ट स्कीम सौंपी और इसके ठीक एक महीने बाद आरबीआई ने बैंकों, एनबीएफसी और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को वर्चुअल करंसीज के साथ लेनदेन और वर्चुअल करंसी एक्सचेंजेस को सेवाएं उपलब्ध कराने से रोकने वाला एक सर्कुलर जारी किया। इससे क्रिप्टो एक्सचेंजेस को बड़ा झटका लगा और उनका ट्रेडिंग वॉल्यूम 99 फीसदी तक गिर गया।

नवंबर, 2018 : #IndiaWantsCrypto

नाकामोतो के पेपर के 10 साल बाद 1 नवंबर, 2018 को वजीरएक्स के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने में क्रिप्टो के पॉजिटिव रेग्युलेशन के लिए #IndiaWantsCrypto कैंपेन की शुरुआत की। इसका शुरुआती प्रभाव तक सामने आया, जब राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर की तरफ से इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इस कैंपेन से बाद में यूनोकॉइन के सात्विक विश्वनाथ, पोलिगॉन की को-फाउंडर जयंती कैनानी, जाने माने एंटरप्रेन्योर और इनवेस्टर एंथोनी पॉम्पलियानो और डीजे निखिल चिनप्पा भी जुड़ गए। निश्चल के लगातार ट्वीट और कैंपेन के लिए सपोर्ट के चलते फरवरी में बजट सेशन के दौरान ट्विटर पर हैशटैग ट्रेंडिंग के साथ व्यापक स्वीकृति मिली, जहां क्रिप्टो बिल का ऐलान किया गया। जुलाई, 2021 में #IndiaWantsCrypto को 1000 दिन पूरे हो गए और यह कैंपेन निश्चल के ट्वीट्स के साथ अभी भी मजबूत बना हुआ है और लाखों क्रिप्टो के समर्थक इससे जुड़ रहे हैं।

मार्च 2020 : सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो बैंकिंग बैन को रद्द किया

बैन एक बड़ा झटका था और इसके चलते क्रिप्टो एक्सचेंजेस ने सुप्रीम कोर्ट में रिट फाइल कीं। आखिरकार बैन रद्द हो गया, आरबीआई के सर्कुलर को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया।

इस प्रकार क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस में फिर से जान पड़ गई और एससी का फैसला सबसे अच्छे समय पर आया जो क्रिप्टो बूम से मेल खाता है।

2021 : क्रिप्टो बिल की घोषणा

हालांकि, भारत में क्रिप्टोकरेंसीज का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। 29 जनवरी, 2021 को भारत सरकार ने ऐलान किया कि वह एक सॉवरेन डिजिटल करंसी बनाने के लिए एक बिल पेश करेगी और प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर अपने आप ही बैन लग जाएगा। नवंबर, 2021 में, फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमेटी ने ब्लॉकचेन एंड क्रिप्टो असेट काउंसिल (बीएसीसी) और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें निष्कर्ष निकला कि क्रिप्टोकरेंसी पर बैन नहीं लगना चाहिए, बल्कि उन्हें रेग्युलेट होन चाहिए। दिसंबर, 2021 की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्रिप्टोकरेंसीज पर एक बैठक की।

बॉटम लाइन

मौजूदा संकेतों को देखें, भारत में क्रिप्टोकरेंसीज के लिए एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। इस मुद्दे को कौन सी रेगुलेटरी बॉडी देखेगी, इस पर भी फैसला लिया जाएगा। ज्यादा उम्मीद है कि सरकार क्रिप्टो के साथ एक असेट क्लास के रूप में व्यवहार करेगी, न कि करंसी के रूप में। एक्सपर्ट्स की राय है कि रेगुलेशंस से ज्यादा पारदर्शिता आएगी और क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी। फ्रॉड रोकने और क्रॉस बॉर्डर ट्रांजैक्शन की निगरानी के लए भी कदम उठाए जा सकते हैं। अनरेगुलेटेड डिजिटल असेट्स के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बावजूद क्रिप्टोकरेंसी की स्वीकार्यता बीते दो साल में तेजी से बढ़ी है, जिससे भारत इसका सबसे बड़ा इनवेस्टर बन गया है। इसलिए, यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में बिल आने के बाद भारत में क्रिप्टो का सफर क्या मोड़ लेती है।

डिस्क्लेमर: क्रिप्टो करेंसी एक अनरेगुलेटेड डिजिटल करेंसी है। यह एक वैध मुद्रा नहीं है और बाजार जोखिमों के अधीन है। इस लेख में दिए गए विचार और राय लेखक के अपने निजी विचार और राय हैं। इसको किसी तरह की निवेश सलाह या  WazirX(वजीरेक्स) की आधिकारिक राय न माना जाए।

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