जल्द ही अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के कर्मचारी भी EPFO पेंशन योजना में निवेश कर सकेंगे। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईपीएफओ की पेंशन योजना के अनऑर्गनाइज्ड (असंगठित कामगारों) के लिए भी खुलने की संभावना है, भले ही उनकी मासिक आय कुछ भी हो। बता दें कि अब तक, 15000 रुपये प्रति माह से अधिक आय वाले संगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योगदान अनिवार्य है।
इस नई स्कीम का नाम यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह स्कीम कामगारों को प्रतिबंद्ध , कॉन्ट्रिब्यूशन पर आधारित होगी और इसके तहत यब सुनिश्चित किया जाएगा कि 7 साल के बाद यह सुविधा लेने वाले कामगार को हर महीने निम्नतम 3000 रुपये पेंशन मिले।
इस प्रस्तावित योजना के तहत सेवानिवृत्ति पेंशन, बच्चों को पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांगता पेंशन भी प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत पेंशन लाभ लेने की मान्यता प्राप्त न्यूनतम अवधि 10 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने की संभावना है। इसके अलावा इस स्कीम में EPFO सदस्यों की 60 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को पेंशन प्रदान करने का भी प्रावधान होगा।
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फाइनेंशियल एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट के मुताबिक 3000 रुपये प्रति महीने के न्यूनतम पेंशन के लिए इस स्कीम के तहत 5.4 लाख रुपये के एक्यूमेलेशन की जरुरत होगी। इसके अलावा यह सुविधा लेने वाला कामगार अगर चाहे तो ज्यादा पेंशन हासिल करने के लिए स्वैच्छिक रुप से अपने कॉन्ट्रिब्यूशन की मात्रा बढ़ाने का विकल्प भी रखेगा।
बता दें कि EPF स्कीम की वर्तमान ब्याज दर 8.1 फीसदी है। सरकार ने 2021-22 के लिए EPFO पर मिलने वाली ब्याज की दर 8.1 फीसदी पर रखने की पुष्टि कर दी है। यह दर पिछले 4 दशकों का सबसे निचला स्तर है। सरकार के इस फैसले से EPFO के लगभग 5 करोड़ शेयरहोल्डर प्रभावित हुए है।
गौरतलब है कि EPFO ने इस साल मार्च में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर पहले के 8.5 फीसदी से घटाकर 8.1 फीसदी करने का निर्णय लिया है। EPF पर मिलने वाली 8.1 फीसदी की यह ब्याज दर 1977-78 के बाद अपने निम्नतम स्तर पर है। बता दें कि 1977-78 में EPF की ब्याज दर 8 फीसदी थी।