अगले महीने एलआईसी का आईपीओ आ रहा है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। आईपीओ के बाद एलआईसी देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी। रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए यह इश्यू कैसा है, लिस्टिंग के बाद एलआईसी की वैल्यूएशन कितनी होगी, क्या एलआईसी के पॉलिसीहोल्डर्स को इस इश्यू में निवेश करना चाहिए, इस इश्यू में निवेश कितना जोखिम भरा है? मनीकंट्रोल की प्रीति कुलकर्णी और जैश कृपलानी ने इन सवालों के जवाब जानने के लिए वेल्थ मैनेजमेंट फर्म आईथॉट फाइनेंशियस के फाउंडर श्याम शेखर से बातचीत की। यहां पेश है इंटरव्यू की मुख्य बातें।
रिटेल इन्वेस्टर्स के लिहाज से कैसा है एलआईसी का आईपीओ?
रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए इतने बड़े इश्यू में पैसा लगाने का यह बड़ा मौका है। इश्यू लॉन्च करने से पहले एलआईसी ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं, जिससे यह इन्वेस्टर-फ्रेंडली हो गया है। यह भविष्य में शेयहोल्डर्स के लिए भी अच्छा रहेगा। अगर इश्यू के बाद एलआईसी उन क्षेत्रों में अपनी कमियां दूर करती है, जिनमें वह कमजोर है तो शेयरहोल्डर्स के लिए चिंता की कोई बात नहीं होगी। यह इन्वेस्ट करने के लिए पहुत डिसेंट आईपीओ है।
क्या आप उन बदलाव के बारे में बता सकते हैं, जो एलआईसी ने किया है?
अब तक एलआईसी का 95 फीसदी प्रॉफिट पॉलिसीहोल्डर्स को जाता था, जबकि प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां सिर्फ 90 फीसदी प्रॉफिट शेयर करती हैं। आईपीओ के बाद एलआईसी 10 फीसदी पार्टिसिपेंट प्रॉफिट शेयरहोल्डर्स को देगी। यह एक बड़ा बदलाव है और शेयरहोल्डर्स के लिहाज से बहुत पॉजिटिव डेवलपमेंट है।
अभी डिस्काउंट के बारे में तस्वीर साफ नहीं है, आप पॉलिसीहोल्डर्स को क्या सलाह देंगे?
पॉलिसीहोल्डर्स के लिए आईपीओ का 10 फीसदी हिस्सा रिजर्व हो सकता है। 5 से 10 फीसदी का डिस्काउंट बहुत अच्छा डिस्काउंट होगा। उन्हें यह समझने की जरूरत है कि उनके नाम से डीमैट अकाउंट होना चाहिए। उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा कि डीमैट अकाउंट उसी नाम से होना चाहिए, जो नाम पॉलिसी में है।
एलआईसी का वैल्यूएशन मल्टीपल क्या हो सकता है?
करीब 2.5 गुना सही वैल्यूएशन होगा, शर्त यह है कि बिजनेस बढ़े और नए बिजनेस की रफ्तार तेज हो। अगर कंपनी नॉन-पार्टिसिपेटिंग पॉलिसिज के अपने बिजनेस को तेजी से बढ़ाने में सफल रहती है तो हमें वैल्यूएशन का लेवल बरकरार रहने की उम्मीद है।