यूक्रेन के न्यूक्लियर प्लांट में आग लगने की खबर से शुक्रवार को स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई। इससे इंडियन इनवेस्टर्स के 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए। यूक्रेन पर रूस के हमले ने स्टॉक मार्केट्स को डरा दिया है। रूस ने 24 फरवरी की सुबह (भारतीय समय के अनुसार) यूक्रेन पर हमला कर दिया था। आज हमले का 9वां दिन है। 24 फरवरी से अब तक सेंसेक्स (Sensex) करीब 3000 अंक गिर चुका है। इस दौरान निफ्टी (Nifty) 818 अंक लुढ़का है।
शुक्रवार को सेंसेक्स 54,333 अंक पर बंद हुआ। 23 फरवरी को यह 57232 अंक पर बंद हुआ था। 24 फरवरी को हमले की खबर से इंडियन स्टॉक मार्केट में 2700 अंक की गिरावट आई थी। लेकिन, उसके बाद के सत्रों में यह काफी हद तक संभलने में कामयाब रहा था। 15 फरवरी के बाद से इंडियन इनवेस्टर्स के 15 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। 15 फरवरी से रूस ने यूक्रेन पर बड़े हमले की तैयारी शुरू कर दी थी। उसने बाद में बड़े हमले के लिए सीमा से अपनी थोड़ी सेना हटाने का ऐलान किया था।
शुक्रवार को बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 246 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। गुरुवार को यह 251 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह एक दिन में बीएसई के मार्केट कैप में 5 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है। प्रति डॉलर 76 रुपये के एक्सचेंज रेट पर यह रकम 66 अरब डॉलर के बराबर है। 15 फरवरी के बाद से सेंसेक्स करीब 4,000 अंक गिर चुका है। इससे इनवेस्टर्स के 197 अरब डॉलर डूब गए हैं। यह यूक्रेन के 181 अरब डॉलर की जीडीपी से ज्यादा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले यूक्रेन के दो इलाकों-लुहांस्क और डोनेट्स्क को आजाद प्रांत घोषित किया। फिर, 23 फरवरी को उन्होंने इमर्जेंसी का ऐलान किया। 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला कर दिया। इसके बाद इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आया है। उधर, शुक्रवार सुबह यूक्रेन में सबसे बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर में आग लगने की खबर आई। हालांकि, यह आग बुझा ली गई।
लेकिन, इस खबर के चलते शुक्रवार को इंडियन मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई। शुक्रवार को सेंसेक्स 768.87 अंक गिरकर 54,333 अंक पर बंद हुआ। यह करीब 1.4 फीसदी की गिरावट है। निफ्टी 252 अंक गिरकर 16,245 अंक पर बंद हुआ। यह 1.53 फीसदी की गिरावट है। गिरने वाले शेयरों में वोडाफोन आइडिया प्रमुख रहा। इसमें 7 फीसदी की गिरावट आई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार पर दबाव जारी रहने के आसार हैं। इसकी वजह यह है कि अभी यूक्रेन संकट खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। तीन दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा निकला है। कड़े प्रतिबंधों के बाद भी रूस के राष्ट्रपति व्लदिमीर पुतिन के तेवर में बदलाव नहीं आया है। ऐसे में इनवेस्टर्स को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्हें एक बार में ज्यादा निवेश से बचना चाहिए।