उपासना टकू और बिपिन प्रीत सिंह ने 2009 में एक कंपनी शुरू की, जिसका नाम मोबीक्विक था। दोनों तब 42 साल के थे। यह मोबाइल फोन-बेस्ड पेमेंट सिस्टम, डिजिटल वॉलेट, जिप पे लेटर सर्विस सहित कई तरह की सेवाएं देती है। यह कपल 12 साल से मिलकर काम कर रहा है।
उपासना टकू और बिपिन प्रीत सिंह ने 2009 में एक कंपनी शुरू की, जिसका नाम मोबीक्विक था। दोनों तब 42 साल के थे। यह मोबाइल फोन-बेस्ड पेमेंट सिस्टम, डिजिटल वॉलेट, जिप पे लेटर सर्विस सहित कई तरह की सेवाएं देती है। यह कपल 12 साल से मिलकर काम कर रहा है।
इंडिया में कपलप्रेन्यर्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। हाल में आए रियल्टी शो 'शार्क टैंक इंडिया' में हिस्सा लेने वाले 18 फीसदी कॉन्टेस्टेंट्स कपलप्रेन्यर्स थे। शो के जज अनुपम मित्तल ने यह बताया। कपलप्रेनयर्स का मतलब ऐसे कपल से है, जो रिलेशनशिप में हैं और बिजनेस या कंपनी मिलकर चलाते है।
वैलेंटाइंस डे के मौके पर मनीकंट्रोल आपको ऐसे तीन कपलप्रेनयर्स की दिलचस्प जर्नी के बारे में बता रहा है, जिन्होंने अलग-अलग बैकग्राउंड के बावजूद जिंदगी में एक मोड़ पर मिलने के बाद बिजनेस की दुनिया में एक साथ चलने का फैसला किया। हम आपको इस जर्नी में उन्हें मिली सबक और जीत के बारे में भी बता रहे हैं।
बिपिन प्रीत सिंह और उपासना टकू

मोबीक्विक की टकू और सिंह के अलग-अलग बैंक और इन्वेस्टमेंट अकाउंट्स हैं। मोबीक्विक के को-फाउंडर, एमडी और सीईओ सिंह ने कहा, "हम मिलकर इन्वेस्टमेंट आडियाज के बारे में बात करते हैं। हम एक दूसरे के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के बारे में जानते हैं।" कंपनी की को-फांडर टकू कहती हैं, "हमने जानकर पर्सनल इन्वेस्टमेंट्स को सेपरेट रखा है ताकि यह एक-दूसरे से टकराए नहीं और हमारे इन्वेस्टमेंट्स मे डायवर्शिफिकेशन हो।" उदाहरण के लिए टकू ने अपना कुछ निवेश क्रिप्टोकरेंसी में किया है। उधर, सिंह ने कुछ खास शेयरों में पैसा लगाया है, जबकि टकू ने शेयरों में निवेश नहीं किया है। उनका मानना है कि अगर उन्होंने एक ही शेयर या म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट किया होता तो उनका ज्वाइंट नेट वर्थ अभी के मुकाबले कम होता।
गौरव चौहान और रिया चौहान

स्वाति भार्गव और रोहन भार्गव 'कैशकरो एंड अर्नकरो' के को-फाउंडर हैं। ये दोनों भी अपने इन्वेस्टमेंट्स को सेपरेट रखते हैं। स्वाति 41 साल की हैं, जबकि भार्गनव 38 साल के हैं। दोनों ने बताया कि वे इन्वेस्टमेंट एडवाइस प्रोफेशनल्स से लेना पसंद करते हैं। इससे उन्हें अपने गोल के मुताबिक पोर्टफोलियो बनाने में मदद मिलती है।
सिर्फ 27 साल के गौरव चौहान और रिया चौहान श्रींगार क्रिएशंस के मालिक हैं। यह कंपनी हैंडीक्रॉफ्ट के बिजनेस में हैं। ये दोनों अपना इन्वेस्टमेंट अकाउंट अलग-अलग रखते हैं। गौरव सिप के जरिए म्यूचुअल फंड्स में पैसे लगाते हैं, जबकि सीधे शेयरों में पैसे लगाना पसंद करती हैं। उन्हें रिस्क लेना पसंद हैं। हालांकि, इन्वेस्टमेंट से पहले वे इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लेते हैं।
स्वाति भार्गव और रोहन भार्गव

कपलप्रेन्यर्स टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लेना पसंद करते हैं। वे ट्रेडिशनल इश्योरेंस प्लान में इन्वेस्ट नहीं करते हैं। उदाहरण के लिए सिंह और टकू के पास सिर्फ एक-एक टर्म इंश्योरेंस प्लान है। उन्होंने अलग-अलग कंपनियों से इंश्योरेंस पॉलिसी ली है। कपलप्रेनयर्स का फाइनेंस और उनकी किस्मत उनके बिजनेस की ग्रोथ से जुड़ी होती है। बिजनेस डाउन होने पर इसका असर दोनों पर पड़ता है। ऐसे सिचुएशन का सामना करने के लिए कंटिजेंसी प्लान होना जरूरी है। यह कम से कम 18 महीने के खर्च लायक होना चाहिए।
कैशकरों के भार्गव को पर्सनल इन्वेस्टमेंट को ज्यादा महत्व नहीं देने का मलाल है। शेयरों में निवेश से भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। वह बताते हैं, "हम हमेशा अपने बिजनेस में इतना बिजी होते हैं कि अपने फाइनेंस को लगातार टालते रहते हैं।" उन्हें बिना सोचेसमझे शेयर और म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में इन्वेस्ट करने का अफसोस है। दरअसल, उन्होंने फाइनेंशियल प्लान नहीं बनाया। सिर्फ एक अच्छी बात यह है कि उनके पास पर्याप्त इमर्जेंसी फंड है।
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