algo trading : Zerodha के नितिन कामत ने ट्वीट पोस्ट कर फॉलोवर्स से किया अनुरोध, सेबी के कंसल्टेशन पेपर दें फीडबैक

नितिन कामत ने कहा, सेबी की अल्गो ट्रेडिंग पर रोक लगाने की योजना से  ब्रोकर्स को अपनी एपीआई की पेशकश पर रोक लगानी पड़ जाएगी और यह टेक्नोलॉजी के इस दौर में 2 कदम पीछे जाने जैसा होगा

अपडेटेड Dec 10, 2021 पर 5:05 PM
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Nithin Kamath

जिरोधा (Zerodha) के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने अपने ट्विटर फॉलोवर्स से सेबी (SEBI) द्वारा अनियंत्रित अल्गो प्लेटफॉर्म्स (algo platforms) पर रोक लगाने के इरादे से जारी कंसल्टेशन पेपर के संबंध में सरकार को अपना फीडबैक और सुझाव भेजने का अनुरोध किया है।

10 दिसंबर को दो भागों में की गई ट्वीट पोस्ट में कामत ने लिखा, “सेबी ने गारंटेड रिटर्न का वादा करने वाले अनियंत्रित अल्गो प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने के इरादे से एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। लेकिन जिस तरह से योजना बनाई गई है, उसका मतलब होगा कि ब्रोकर्स को अपनी एपीआई (APIs) की पेशकश रोकनी होंगी। यह टेक्नोलॉजी के इस दौर में 2 कदम पीछे जाने जैसा होगा। यदि आप अपना फीडबैक और सुझाव भेजते हैं तो वास्तव में इससे मदद मिलेगी। कंसल्टेशन पेपर का लिंक ब्लॉग पोस्ट में उपलब्ध है।”

इससे पहले कामत ने 9 दिसंबर को भी एक पोस्ट की थी, जिसमें अल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी।

किस तरह काम करती है अल्गो ट्रेडिंग

अपने ब्लॉग में, कामत अल्गो के बारे में कुछ इस तरह बताते हैं, “यह एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है, जो ट्रेडिंग स्ट्रैटजी के लिए डाटा कलेक्ट कर सकता है, ऐतिहासिक रूप से पीएंडएल (प्रॉफिट और लॉस) देखने के लिए अनुमानित रणनीति बताता है और अगर जरूरत हो तो जब भी स्ट्रैटजी खरीद या बिक्री के संकेत करती है तो ऑटोमैटिकली ट्रेड भी कर देता है।”


उन्होंने बताया कि प्रोग्राम आंकड़े निकालने के लिए चार्ट्स की मैनुअल जांच की जरूरत को खत्म कर देता है- उदाहरण के लिए, पूर्व में पीएंडएल निकालने की रणनीति में 20 दिनों का मूविंग एवरेज निकालना होता था और खरीद व बिक्री के संकेतों के लिए चार्ट पर नजर रखनी होती थी।

उन्होंने बताया, “मैनुअली ऐसा करना खासा मुश्किल काम है। इसके बजाय एक प्रोग्राम या अल्गो ऐसा ऑटोमैटिकली कर सकता है। इसमें लाइव मार्केट डाटा की निगरानी की जा सकती है और अलर्ट जेनरेट किए जा सकते हैं, ऑर्डर प्लेसमेंट तक पूरी तरह ऑटोमेट हो सकता है।”

कामत ने अपने ब्लॉग में यह भी बताया कि किस तरह से विभिन्न प्लेटफॉर्म अल्गो का इस्तेमाल करते हैं और इस पर जिरोधा का रुख भी साफ किया।

कुछ लोगों के लिए नहीं होनी चाहिए एपीआई की सुविधा

उन्होंने कहा, “तकनीक आधारित इस दुनिया में हम पहुंच और प्रोडक्ट्स को लगातार कमोडिटाइज करने या कमोडिटी के तौर पर लेने की बात कर रहे हैं, ऐसे में किसी के खाते तक एपीआई (API) पहुंच या मशीन रीडेबिलिटी कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही नहीं होनी चाहिए। हर कोई जो चाहता है, उसे हासिल करने में सक्षम होना चाहिए। वर्तमान में, कस्टमर्स को एपीआई के माध्यम से अपने ट्रेडिंग अकाउंट तक पहुंच मिलनी चाहिए। संभवतः इसे पेश किया जाना चाहिए, ताकि इसमें कोई नियामकीय मध्यस्थता न हो। इसका सरल सा उदाहरण (नॉन मशीन रीडेबिल) पीडीएफ कॉन्ट्रैक्ट नोट हैं, जो टैक्स फाइलिंग के लिए जरूरी हैं। वित्त वर्ष के अंत में ऐसे पीडीएफ का इम्पोर्ट खासा मुश्किल होगा और गलतियों की संभावनाएं भी होंगी। हमने मशीन-रीडेबिल कॉन्ट्रैक्ट नोट्स तैयार किए हैं, जिन्हें सिर्फ एक क्लिक से एपीआई के जरिए टैक्स फाइलिंग प्रोग्राम्स में इम्पोर्ट किया जा सकता है। यह ग्राहकों के लिए खासी फायदेमंद है।”

इसमें गलत सेलिंग का है रिस्क

उन्होंने कहा, “भले ही अल्गो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स से मार्केट में कोई कोई रिस्क नहीं पैदा होता है, लेकिन वे फाइनेंसियल रिस्क पैदा करते हैं। सबसे बड़ा रिस्क गलत सेलिंग का है। इन प्लेटफॉर्म्स को कुछ नियमों के अधीन लाया जा सकता है, जिससे उनकी जवाबदेही सुनिश्चित हो।”

सेबी ने 9 दिसंबर को ‘खुदरा निवेशकों के लिए अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग पर कंसल्टेशन पेपर’ जारी किया था। इसके जरिए एपीआई एक्सेस और उसके इस्तेमाल से ट्रेड्स के ऑटोमेशन सहित रिटेल इन्वेस्टर्स द्वारा की जा रही अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग पर मार्केट इंटरमीडियरीज और पब्लिक सहित विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से टिप्पणियां और विचार मांगे गए थे।

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