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EPF में 1800 रुपये से ज्यादा कटवाना ठीक या VPF, PPF, NPS और Mutual Fund SIP बेहतर? समझिए पूरा गणित

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 के नोटिफिकेशन ने देश के फॉर्मल रिटायरमेंट ढांचे में पिछले सात दशकों का सबसे बड़ा बदलाव कर दिया है। नए नियमों के तहत कर्मचारी की ओर से पीएफ कटौती के मैंडेट्री पार्टी को 1800 रुपये पर फिक्स कर दिया गया है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jul 03, 2026 पर 9:41 AM
EPF में 1800 रुपये से ज्यादा कटवाना ठीक या VPF, PPF, NPS और Mutual Fund SIP बेहतर? समझिए पूरा गणित
EPF में 1800 रुपये से ज्यादा कटवाना ठीक या VPF, PPF, NPS और Mutual Fund SIP बेहतर?

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 के नोटिफिकेशन ने देश के फॉर्मल रिटायरमेंट ढांचे में पिछले सात दशकों का सबसे बड़ा बदलाव कर दिया है। नए नियमों के तहत कर्मचारी की ओर से पीएफ कटौती के मैंडेट्री पार्टी को 1800 रुपये पर फिक्स कर दिया गया है। इसके बाद अगर कोई ज्यादा पीएफ कटवाना चाहता है तो ये उसकी इच्छा पर निर्भर करता है। कंपनियों को भी 1800 रुपये से ज्यादा पीएफ पार्ट जमा करना मैंडेट्री नहीं रह गया है। इस कदम से रिटायरमेंट बचत के मामले को ओपन करके दूसरे ऑप्शन पर जाने के विकल्प अब खुल गए हैं।

खासकर भारी-भरकम बेसिक सैलरी पाने वाले नौकरीपेशा प्रोफेशनल्स के लिए इस रेगुलेटरी बदलाव ने निवेश के दूसरे मौके भी खोल दिए हैं। अब इस अनिवार्य सीमा 1800 रुपये से ऊपर प्रोविडेंट फंड में डाली जाने वाली कोई भी रकम पूरी तरह स्वैच्छिक है। ऐसे में सैलरीड क्लास के सामने अब यह बड़ा सवाल है कि क्या इस तय सीमा से ज्यादा बची हुई रकम को प्रोविडेंट फंड की सुरक्षित कस्टडी में ही छोड़ दिया जाए या फिर इसे म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP), पीपीएफ (PPF) या एनपीएस (NPS) जैसे दूसरे रिटायरमेंट विकल्पों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाए। हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 की रिपोर्ट में इसपर विस्तार से जानकारी दी गई है।

फिक्स्ड इनकम के सामने स्वैच्छिक EPF (VPF) का गणित

जो निवेशक किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते उनके लिए अनिवार्य 1800 रुपये की सीमा से ऊपर वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) के जरिए योगदान देना अभी भी एक बेहतरीन और मजबूत विकल्प बना हुआ है। वर्तमान में मिल रही 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर के साथ प्रोविडेंट फंड एक सॉवरेन-बैकड डेट-मार्केट रिटर्न की पेशकश करता है। यह रिटर्न सामान्य बैंक डिपॉजिट और पारंपरिक फिक्स्ड-इंकम प्रोडक्ट्स के मुकाबले काफी बेहतर है। अगर इसकी तुलना सीधे पब्लिक प्रोविडेंट फंड से की जाए तो यील्ड यानी मुनाफे के मामले में यह स्वैच्छिक ढांचा साफ तौर पर आगे दिखता है क्योंकि पीपीएफ में पारंपरिक रूप से इसके मुकाबले कम ब्याज मिलता है।

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