Foreign Stocks Tax Rules: अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयरों में करते हैं ट्रेडिंग? जानिए ITR में कैसे लगेगा टैक्स

Tax on Foreign Shares in India: चाहे विदेशी शेयरों से कैपिटल गेन्स हो या ओवरसीज इंट्राडे ट्रेडिंग से मुनाफा, भारतीय करदाताओं को आईटीआर दाखिल करते समय स्पेशल शेड्यूल में इनकी जानकारी देनी होती है। जानें विदेशी शेयरों और इंट्राडे ट्रेडिंग पर भारत में कितना टैक्स लगता है और डबल टैक्स से कैसे बचा जा सकता है

अपडेटेड Jul 23, 2026 पर 11:38 AM
अगर आप भारत में टैक्सपेयर हैं, तो आपकी विदेशी कमाई आय पर भी टैक्स लगता है

Foreign Stocks and Intraday Trading Tax in India: भारतीय निवेशकों के बीच अमेरिकी शेयर बाजार के साथ-साथ दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे विदेशी बाजारों में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ा है। पोर्टफोलियो का इंटरनेशनल डाइवर्सिफिकेशन तो अच्छा है, लेकिन आयकर नियमों के तहत विदेशी आय और विदेशी संपत्तियों की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।

चाहे विदेशी शेयरों से कैपिटल गेन्स हो या ओवरसीज इंट्राडे ट्रेडिंग से मुनाफा, भारतीय करदाताओं को आईटीआर दाखिल करते समय स्पेशल शेड्यूल में इनकी जानकारी देनी होती है। आइए आपको बताते हैं कि विदेशी शेयरों और इंट्राडे ट्रेडिंग पर भारत में कितना टैक्स लगता है और डबल टैक्स से कैसे बचा जा सकता है।

विदेशी शेयरों और इंट्राडे ट्रेडिंग पर कैसे लगता है टैक्स?


भारतीय टैक्स कानूनों (IT Act, 2025) के अनुसार, अगर आप भारत के निवासी करदाता हैं, तो आपकी विदेशी कमाई पर भारत में टैक्स लगता है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया या ताइवान जैसे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयरों को भारतीय कर कानूनों के तहत 'अनलिस्टेड सिक्योरिटीज' माना जाता है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG): अगर शेयर 24 महीने से अधिक समय के लिए रखे जाते हैं, तो लॉन्ग टर्म गेन्स पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% की दर से फ्लैट टैक्स लगता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG): 24 महीने से कम समय के लिए रखे गए शेयरों पर मिलने वाला लाभ करदाता के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है।

करंसी कन्वर्जन: खरीद और बिक्री की राशि को रिजर्व बैंक/निर्धारित एक्सचेंज रेट के अनुसार भारतीय रुपये में बदला जाता है, जिससे करंसी के उतार-चढ़ाव का असर भी टैक्स गणना पर पड़ता है।

ओवरसीज इंट्राडे ट्रेडिंग: इसमें शेयरों की डिलीवरी नहीं ली जाती, इसलिए इसे कैपिटल गेन्स न मानकर बिजनेस इनकम माना जाता है। इस प्रॉफिट पर आपके नॉर्मल टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। इसमें हुए नुकसान को सेट-ऑफ या कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है।

ITR में किन-किन शेड्यूल में देनी होती है जानकारी?

विदेशी संपत्तियों की जानकारी न देना या छिपाने पर भारी जुर्माना लग सकता है:

Schedule FA (Foreign Assets): एक भारतीय निवासी (ROR) को संबंधित अवधि के दौरान अपने विदेशी ब्रोकरेज खाते, विदेशी शेयरहोल्डिंग और संबंधित संपत्तियों की जानकारी Schedule FA में देनी अनिवार्य है, भले ही उस संपत्ति से कोई कमाई हुई हो या न हुई हो।

Schedule FSI (Foreign Source Income): अगर आपने उन विदेशी संपत्तियों या शेयरों से कोई डिविडेंड या मुनाफा कमाया है, तो उसकी जानकारी Schedule FSI में दर्ज करनी होती है।

दोहरा टैक्स चुकाने से कैसे बचें? जानिए FTC और Form 67

अगर आपके विदेशी शेयरों पर दूसरे देश में पहले ही टैक्स (TDS/Tax Withholding) कट चुका है, तो आप भारत में फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC-Foreign Tax Credit) का दावा करके दोहरे कराधान से बच सकते हैं।

DTAA का फायदा: भारत का जिस देश के साथ डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) है, उसके तहत धारा 159 के तहत क्लेम किया जा सकता है।

Form 67 भरना अनिवार्य: फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा करने के लिए इनकम टैक्स पोर्टल पर Form 67 ऑनलाइन भरना सबसे जरूरी प्रक्रिया है। इसमें विदेश में दिए गए टैक्स और आय का पूरा ब्योरा देना होता है।

Schedule TR (Tax Relief): ITR में Schedule FSI के साथ-साथ Schedule TR में भी टैक्स रिलीफ का दावा करना होता है।

क्रेडिट की सीमा: FTC की राशि उतनी ही होगी जो विदेश में चुकाए गए टैक्स या भारत में उस आय पर बनने वाले टैक्स में से कम होगी।

विदेशी निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनिया भर के टैक्स अथॉरिटीज के बीच अब डेटा शेयरिंग काफी पारदर्शी हो चुकी है। इसलिए, विदेश में जमा टैक्स के सबूत (ब्रोकरेज स्टेटमेंट, टैक्स असेसमेंट ऑर्डर्स, पेमेंट रिसिप्ट) संभाल कर रखें और समय पर Form 67 भरकर अपना ITR दाखिल करें ताकि किसी भी नोटिस से बचा जा सके।

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