National Pension System: बिना नॉमिनी चुने सब्सक्राइबर की हो गई मौत, तो किसे मिलेगा पेंशन का लाभ? यहां समझिए नियम

National Pension System: नेशनल पेंशन स्कीम लेने के बाद अगर किसी निवेशक की मृत्यु होती है तो पैसे नॉमिनी को दे दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि तब क्या होगा अगर NPS अकाउंट होल्डर की मृत्यु किसी को नॉमिनी बनाए बिना हो जाती है। आइए जानते हैं इससे जुड़े नियम क्या हैं

अपडेटेड Jan 11, 2023 पर 6:35 PM
नागरिकों में रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए बचत को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बनाई गई थी।

National Pension System: नागरिकों में रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए बचत को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बनाई गई थी। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लंबी अवधि के लिए निवेश प्‍लान है। इसमें निवेश के ज़रिए आप रिटायरमेंट पर एक बड़ा फंड हासिल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, इस स्कीम में निवेश करने वाले लोगों को आयकर विभाग की धारा 80 - CCD (1B) के तहत 50 हजार रुपये और इनकम टैक्स की धारा 80-C के तहत 1.5 लाख रुपये का बेनिफिट भी मिलता है। इस स्कीम को सब्सक्राइब करने के बाद अगर किसी निवेशक की मृत्यु होती है तो पैसे नॉमिनी को दे दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि तब क्या होगा अगर NPS अकाउंट होल्डर की मृत्यु किसी को नॉमिनी बनाए बिना हो जाती है। आइए जानते हैं इससे जुड़े नियम क्या कहते हैं।

क्या हैं नियम

अगर अकाउंट होल्डर ने मृत्यु से पहले नॉमिनी बनाया ही नहीं है तो इस स्थिति में उसके कानूनी उत्तराधिकारी या परिवार के सदस्य को पैसे दे दिए जाते हैं। इस स्थिति में क्लेम करने के लिए परिवार को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करना होगा। यह प्रमाण पत्र संबंधित राज्य के रेवेन्यू अथॉरिटी द्वारा या उचित अधिकार क्षेत्र वाले न्यायालय द्वारा जारी किया जाता है। अगर कोई कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी उपलब्ध है, तो इस स्थिति में वे डेथ विड्रॉल फॉर्म, सब्सक्राइबर का डेथ सर्टिफिकेट, केवाईसी रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी प्रदान करके पैसे के लिए क्लेम कर सकते हैं। सभी जरूरी दस्तावेज़ों की एक लिस्ट विड्रॉल फॉर्म पर पाई जा सकती है।


सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद नॉमिनी या उत्तराधिकारी को दावा करने के लिए केवाईसी रिकॉर्ड, सब्सक्राइबर का डेथ सर्टिफिकेट, बैंक अकाउंट का प्रुफ और अन्य जरूरी दस्तावेजों सहित कई अन्य कागजातों की जरूरत पड़ती है। अगर एक से अधिक नॉमिनी रजिस्टर्ड हैं, तो विड्रॉल फार्म सभी नामांकित व्यक्तियों द्वारा भरा और जमा किया जाना चाहिए।

2004 में लॉन्च हुई थी स्कीम

यह सरकार की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है. केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को इसे लॉन्च किया था. इस डेट के बाद नौकरी ज्वॉइन करने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना जरूरी है. साल 2009 के बाद से इसे प्राइवेट कर्मचारियों के लिए भी खोल दिया गया.

 

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