New Tax Regime : नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अपनाने वाले नौकरीपेशा लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह कम टैक्स रेट और आसान नियम हैं।

New Tax Regime : नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अपनाने वाले नौकरीपेशा लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह कम टैक्स रेट और आसान नियम हैं।
लेकिन सिर्फ कम टैक्स स्लैब देखकर फैसला करना सही नहीं है। आपकी सैलरी का स्ट्रक्चर, टैक्स बचाने वाले निवेश, छूट (Exemptions) और वित्तीय जिम्मेदारियां तय करती हैं कि आपके लिए कौन-सी टैक्स व्यवस्था बेहतर रहेगी।
आइए जानते हैं कि नई टैक्स रिजीम को चुनने से पहले आपको किन 8 बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. HRA का फायदा मिलेगा या नहीं?
अगर आप किराए के घर में रहते हैं और House Rent Allowance (HRA) का फायदा लेते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। नई टैक्स व्यवस्था में HRA की छूट नहीं मिलती।
2. LTA का इस्तेमाल करते हैं?
अगर आप नियमित रूप से Leave Travel Allowance (LTA) का क्लेम करते हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था चुनने पर यह टैक्स छूट खत्म हो जाएगी।
3. 80C में निवेश
अगर आप EPF, PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, टैक्स सेविंग FD, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन या फिर सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था में इन पर टैक्स छूट मिलती है। नई व्यवस्था में यह लाभ नहीं मिलता।
4. NPS का नियम अलग है
अगर आपके NPS में कंपनी भी योगदान देती है, तो उसके योगदान पर मिलने वाली टैक्स छूट नई टैक्स व्यवस्था में भी जारी रहती है। लेकिन आपके अपने योगदान पर अतिरिक्त छूट नहीं मिलती।
5. होम लोन है तो हिसाब जरूर लगाएं
अगर आपने खुद रहने के लिए घर खरीदा है और उस पर होम लोन चल रहा है, तो पुरानी व्यवस्था में मूलधन और ब्याज दोनों पर टैक्स छूट मिल सकती है। नई व्यवस्था में यह फायदा नहीं मिलता।
5. सैलरी अलाउंस भी देखें
बच्चों की शिक्षा, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट जैसे कई अलाउंस पुरानी व्यवस्था में टैक्स बचाने में मदद करते हैं। नई व्यवस्था में इनमें से ज्यादातर छूट खत्म हो जाती हैं।
6. Flexible Benefit Plan (FBP)
कई कंपनियां भोजन, फोन, इंटरनेट, किताबें, प्रोफेशनल सब्सक्रिप्शन और दूसरे खर्चों का रीइंबर्समेंट देती हैं। इनका टैक्स नियम हर मामले में अलग हो सकता है। इसलिए अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को ध्यान से समझें।
7. प्रोफेशनल टैक्स
कुछ राज्यों में कर्मचारियों से प्रोफेशनल टैक्स लिया जाता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में इसकी कटौती का लाभ मिलता है, जबकि नई व्यवस्था में आमतौर पर यह सुविधा नहीं होती।
8. रिटायरमेंट बेनिफिट
EPF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में कंपनी के योगदान पर तय सीमा तक टैक्स राहत मिलती है। अगर यह सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त रकम पर टैक्स देना पड़ सकता है। यह नियम दोनों व्यवस्थाओं में लागू होता है।
किसके लिए कौन-सी व्यवस्था बेहतर?
अगर आप HRA लेते हैं, होम लोन चुका रहे हैं, 80C में अच्छा निवेश करते हैं, LTA और दूसरी टैक्स छूट का फायदा उठाते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था अब भी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।
वहीं, अगर आपकी सैलरी सीधी-सादी है, HRA नहीं मिलता, होम लोन नहीं है और टैक्स बचाने वाले निवेश कम हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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