NPS for NRIs: एनपीएस में पैसे डाल सकते हैं विदेश में रहने वाले भारतीय? कितना अलग है नियम?

NPS for NRIs: भारत में रिटायरमेंट फंड बनाने का एक तरीका एनपीएस है और बड़ी संख्या में लोग अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए इसमें पैसे लगाते हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या एनआरआई इसमें पैसे लगा सकते हैं और अगर हां तो किसे लगाना चाहिए और उनके लिए क्या नियम कुछ अलग हैं

अपडेटेड Aug 16, 2026 पर 1:27 PM
NPS for NRIs: एनपीएस में निवेश करने वाले एनआरआई इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत भारत में टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं।

NPS for NRIs: देश से बाहर रहने वाले ऐसे भारतीय यानी कि एनआरआई अगर भारत में अपना रिटायरमेंट फंड बनाना चाहते हैं तो उनके लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एक विकल्प हो सकता है। एनआरआई इसमें नियमों के मुताबिक टैक्स बेनेफिट्स भी हासिल कर सकते हैं। हालांकि एनआरआई को एनपीएस सिर्फ टैक्स बचाने के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उनके रहने के स्टेटस (रेजिडेंशियल स्टेटस), निवेश के तरीके, भारत में टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम, टैक्स सिस्टम और जिस देश में वे रहते हैं, वहां एनपीएस पर टैक्स के नियम; ये सभी बातें कुल फायदे पर असर डाल सकती हैं। उन्हें करेंसी और रिपैट्रिएशन यानी पैसे भारत से वापस अपने मौजूदा रहने वाले देश में ले जाने से जुड़े नियमों, पैसे निकालने पर लगी पाबंदियों और बाहर निकलते समय फंड के एक हिस्से से एन्युइटी खरीदने की जरूरत पर भी विचार करना चाहिए।

क्या NPS में पैसे लगा सकते हैं NRI?

एनपीएस में एनआरआई के साथ ओसीआई (ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया) कार्डहोल्डर्स भी एलबिजिबिलिटी और केवाईसी जरूरतों के हिसाब से पैसे लगा सकते हैं। हालांकि ये एनपीएस टियर-1 अकाउंट ही खोल सकते हैं, टियर-2 अकाउंट नहीं। इसके लिए उन्हें पैन, भारतीय पासपोर्ट, पते का प्रमाण और एनआरई या एनआरओ बैंक अकाउंट की जरूरत होती है।


एनपीएस में निवेश पर एनआरआई के लिए क्या है टैक्स बेनेफिट्स

एनपीएस में निवेश करने वाले एनआरआई इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत भारत में टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर विजय भारेच का कहना है कि पुराने टैक्स सिस्टम के तहत एनपीएस में निवेश पर छूट का दावा किया जा सकता है। सैलरीड इंडिविजुअल्स अपनी सैलरी यानी बेसिक और डीए मिलाकर 10% तक की छूट का दावा कर सकते हैं तो नॉन-सैलरीड इंडिविजुअल्स अपनी कुल इनकम के 20% तक। यह छूट ₹1.50 लाख की अधिकतम लिमिट के तहत है। इसके अलावा एलिजिबल एनपीएस कॉन्ट्रिब्यूशंस पर इंडिविजुअल्स ₹50,000 तक की अतिरिक्त छूट का भी दावा कर सकते हैं। इस तरह पुराने टैक्स सिस्टम के तहत एनआरआई अपने एनपीएस कॉन्ट्रिब्यूशन पर एक टैक्स वर्ष में ₹2 लाख तक की छूट का दावा कर सकते हैं।

इस प्रकार यह फायदा ऐसे एनआरआई के लिए बेहतर है, जिनकी भारत में इनकन पर टैक्स देनदारी बनती है। हालांकि यह बचत कितनी होगी, यह इंडिविजुअल की इनकम, टैक्स सिस्टम और छूट के लिए एलिजिबिलिटी पर निर्भर करेगी।

पैसे निकालने का क्या है नियम

एनपीएस एक लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है और एनआरआई तय एग्जिट उम्र तक पहुंचने पर अपनी जमा की गई रकम निकाल सकते हैं। इसके तहत कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी और समय से पहले एग्जिट की सुविधा भी मिलती है। इसमें निवेश शुरू करने के कम से कम तीन साल तक स्कीम में निवेश करने पर सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट से पहले कुछ पैसे निकालने की सुविधा मिलती है। 60 साल की उम्र से पहले एनआरआई कुछ शर्तों के तहत अपने खुद के योगदान का 25% तक निकाल सकते हैं और पूरे सब्सक्रिप्शन पीरियड के दौरान चार बार तक पैसे निकाल सकते हैं, और दो बार पैसे निकालने के बीच कम से कम चार साल का अंतर होना चाहिए।

खाता बंद करने का क्या है नियम

इंडिया फॉर एनआरआई के को-फ़ाउंडर और डायरेक्टर सिद्धांत अग्रवाल का कहना है कि मैच्योरिटी पर यानी 60 साल की उम्र में या बदली हुई उम्र सीमा के हिसाब से जितना पैसा जमा है, उसका 80% तक एकमुश्त निकाल सकते हैं और 20% का इस्तेमाल रेगुलर पेंशन इनकम के लिए एन्युइटी खरीदने में किया जाता है। सरकारी नियमों के मुताबिक जमा रकम का एक हिस्सा एन्युइटी में जाना ज़रूरी है। PFRDA ने हाल में नियमों में बदलाव किया है, जिसके बाद कुछ मामलों में एकमुश्त निकासी की सीमा को बढ़ाकर ₹8 लाख कर दिया है और इसमें निवेश करने की सीमा को बढ़ाकर 85 साल तक कर दिया गया है।

निवेश से पहले क्या चेक करें

एनपीएस में निवेश करने से पहले एनआरआई को भारत और जिस देश में वे रह रहे हैं, DTAA (डबल टैक्सेशन एवायडेंस एग्रीमेंट) प्रोविजंस समेत दोनों जगहों पर टैक्स से जुड़े असर का आकलन करना चाहिए। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर सुरेशकुमार एस का कहना है कि एनआरआई होने का मतलब यह नहीं है कि हर एनआरआई के लिए टैक्स की स्थिति एक जैसी ही होगी। उनका कहना है कि एनआरआई जिस देश में वे रह रहे हैं, भारत में टैक्सेबल इनकम, टैक्स सिस्टम और DTAA की स्थिति के आधार पर टैक्स के बाद मिलने वाले फायदे में काफी अंतर आ सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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