NPS vs PPF: रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर, किसमें बनेगा ज्यादा पैसा? समझिए पूरा कैलकुलेशन
NPS vs PPF: रिटायरमेंट के लिए NPS और PPF में से कौन बेहतर है? हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 25 साल में दोनों योजनाओं में कितना फंड बन सकता है? जानिए ब्याज दर, संभावित रिटर्न, जोखिम और निकासी के नियमों के आधार पर पूरा कैलकुलेशन।
PPF में 15 साल की मैच्योरिटी के बाद लागू नियमों के मुताबिक पैसा निकाला जा सकता है।
NPS vs PPF: नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी आती है। घर का खर्च चलता है और कुछ पैसा बच भी जाता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई का सहारा कम हो जाता है। ऐसे में सवाल सिर्फ बचत का नहीं, बल्कि ऐसा फंड तैयार करने का है जो बुढ़ापे में आर्थिक सहारा दे सके।
रिटायरमेंट के लिए NPS और PPF दोनों लोकप्रिय विकल्प हैं। हालांकि, दोनों में निवेश का तरीका अलग है। अब सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹5,000 निवेश करे, तो 25 साल में किस योजना में ज्यादा पैसा बनेगा? आइए, कैलकुलेशन से समझते हैं।
NPS और PPF में क्या अंतर है?
PPF सरकार की छोटी बचत योजना है। इसमें निवेश पर तय अवधि के लिए घोषित ब्याज दर के हिसाब से कमाई होती है। फिलहाल अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही में इसकी ब्याज दर 7.1% सालाना है। ब्याज सालाना कंपाउंड होता है। यानी ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। PPF की मैच्योरिटी 15 साल है।
दूसरी ओर, NPS खास तौर पर रिटायरमेंट के लिए बनाया गया है। इसमें निवेशक की पसंद और योजना के नियमों के मुताबिक पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और दूसरे डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाया जा सकता है। इक्विटी का हिस्सा ज्यादा होने पर लंबे समय में रिटर्न की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू भी घट सकती है।
हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर कितना पैसा बनेगा?
मान लेते हैं कि किसी व्यक्ति की उम्र 35 साल है। वह 60 साल की उम्र तक हर महीने ₹5,000 निवेश करता है। इस तरह उसके पास निवेश के लिए 25 साल होंगे। इस दौरान वह कुल ₹15 लाख अपनी जेब से लगाएगा।
अब PPF में 7.1% सालाना ब्याज और NPS में उदाहरण के लिए 10% सालाना रिटर्न मानकर देखते हैं कि कितना फंड बन सकता है।
निवेश का हिसाब
PPF
NPS
हर महीने निवेश
₹5,000
₹5,000
निवेश की अवधि
25 साल
25 साल
कुल निवेश
₹15 लाख
₹15 लाख
मानी गई सालाना दर
7.10%
10%
अनुमानित फंड
₹41 लाख
₹66 लाख
अनुमानित कमाई
₹26 लाख
₹51 लाख
नोट:ये अनुमानित आंकड़े हैं। PPF की ब्याज दर भविष्य में बदल सकती है, जबकि NPS का रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है।
NPS में ज्यादा पैसा बनने की संभावना क्यों है?
NPS में निवेश का एक हिस्सा शेयर बाजार में लगाया जा सकता है। लंबे समय में कंपनियों की ग्रोथ और शेयर बाजार के प्रदर्शन से निवेश का मूल्य बढ़ सकता है। इसी वजह से NPS में PPF की तुलना में बड़ा फंड बनने की संभावना रहती है। लेकिन मार्केट में गिरावट का जोखिम भी रहता है।
PPF में बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर नहीं पड़ता। इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। इससे निवेश की योजना बनाना आसान होता है। लेकिन यहां भी भविष्य की ब्याज दर हमेशा 7.1% रहने की गारंटी नहीं है। ये कम या ज्यादा हो सकती है।
रिटायरमेंट पर पूरा पैसा निकाल सकते हैं या नहीं?
PPF में 15 साल की मैच्योरिटी के बाद लागू नियमों के मुताबिक पैसा निकाला जा सकता है। खाते को आगे बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है। इसलिए निवेशक अपनी जरूरत और योजना के हिसाब से आगे की बचत तय कर सकता है।
NPS में निकासी के नियम अलग हैं। यह रिटायरमेंट के लिए बनाया गया पेंशन सिस्टम है। सामान्य निकासी के समय जमा फंड का एक हिस्सा एकमुश्त या निर्धारित किस्तों में लिया जा सकता है। नियमों के मुताबिक एक हिस्सा एन्युटी खरीदने में लगाना पड़ सकता है। एन्युटी का मतलब है ऐसा प्लान, जिसके बदले तय शर्तों के अनुसार नियमित पेंशन मिलती है।
आपके लिए NPS बेहतर है या PPF?
अगर आप रिटायरमेंट तक लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सह सकते हैं, तो NPS आपके लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर आप शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं, तो सरकार की गारंटी वाली PPF बेहतर हो सकती है।
वैसे दोनों में से किसी एक को चुनना भी जरूरी नहीं है। अपनी जरूरत के मुताबिक दोनों में निवेश किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, NPS के जरिए बाजार से जुड़ी ग्रोथ की संभावना का फायदा लिया जा सकता है। वहीं, PPF में स्थिर रिटर्न वाली बचत बनाई जा सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।