पैसे की सुरक्षा के साथ अट्रैक्टिव रिटर्न चाहते हैं? आपके लिए हैं ये दो ऑप्शंस

एनएससी इंडिया पोस्ट (पोस्ट ऑफिस) की स्कीम है। FRSB भारत सरकार की तरफ से आरबीआई जारी करता है। दोनों ही स्कीमें एक तरह से सरकार की हैं। इस वजह से इनमें रिस्क नहीं के बराबर है

अपडेटेड Apr 18, 2022 पर 10:04 AM
एनएससी और एफआरएसबी पर मिले इंट्रेस्ट पर टैक्स लगता है। लेकिन, एनएससी में सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है।

कई इनवेस्टर्स पैसे की सुरक्षा के साथ अच्छा रिटर्न चाहते हैं। वे इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में इनवेस्ट करते हैं। हालांकि, ये आपको रेगुलर इंट्रेस्ट नहीं देते हैं। इंट्रेस्ट मूलधन (इनवेस्ट की गई रकम) में जुड़ता रहता है। दोनों पैसा आपको मैच्योरिटी के वक्त एक साथ मिल जाता है। इन स्कीमों में इनवेस्ट करने के लिए कुछ शर्तें हैं। जैसे-कौन इनवेस्ट कर सकता है, कितना इनवेस्ट किया जा सकता है।

इन शर्तों की वजह से इनवेस्टर्स दूसरे ऑप्शंस की तलाश करने लगते हैं। ऊंची महंगाई दर के चलते आकर्षक रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट्स की मांग और बढ़ गई है। नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) और फ्लोटिंग रेटिंग सेविंग बॉन्ड्स (FRSB) ऐसे दो ऑप्शंस हैं। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

कितना रिस्क?

एनएससी इंडिया पोस्ट (पोस्ट ऑफिस) की स्कीम है। FRSB भारत सरकार की तरफ से आरबीआई जारी करता है। दोनों ही स्कीमें एक तरह से सरकार की हैं। इस वजह से इनमें रिस्क नहीं के बराबर होता है। जो इनवेस्टर्स पैसे की सेफ्टी के साथ अट्रैक्टिव रिटर्न चाहते हैं, वे इनमें इनवेस्ट कर सकते हैं।


कितना रिटर्न?

NSC का रिटर्न 6.8 फीसदी है। इंट्रेस्ट का पैसा आपके मूलधन में जुड़ता रहता है। स्कीम मैच्योर होने पर आपको पूरे पैसे मिल जाते हैं। FRSB का इंट्रेस्ट रेट 7.15 फीसदी है, जिसका पेमेंट हाफ-ईयर्ली (छमाही) होता है। सरकार हर तिमाही एनएससी के इंट्रेस्ट रेट की समीक्षा (Review) करती है। हालांकि, इनवेस्टमेंट के वक्त ऑफर किया गया इंट्रेस्ट रेट मैच्योरिटी तक नहीं बदलता है। एफआरएसबी का इंट्रेस्ट रेट एनएससी के मुकाबले 0.35 फीसदी ज्यादा है।

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अगर इनवेस्टमेंट के दूसरे ऑप्शंस से तुलना की जाए तो एनएससी और एफआरएसबी के इंट्रेस्ट रेट आकर्षक लगते हैं। उदाहरण के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का पांच साल का फिक्स्ड डिपॉजिट पांच साल के लिए सिर्फ 5.5 फीसदी इंट्रेस्ट ऑफर करता है। डेट फंड रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं।

मैच्योरिटी पीरियड ?

एनएससी पांच साल में मैच्योर हो जाता है। एफआरएसबी 7 साल में मैच्योर होता है। एफआरएसबी सीनियर सिटीजन को मैच्योरिटी से पहले पैसे निकालने की सुविधा देता है। जिन लोगों की उम्र 60-70 साल है, उनके लिए लॉक-इन पीरियड छह साल है। 70 से 80 साल के लोगों के लिए लॉक-इन पीरियड पांच साल है। 80 साल से ज्यादा उम्र के लोग 4 साल बाद अपना पैसा निकाल सकते हैं।

क्या लोन लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?

एनएससी का इस्तेमाल आप बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन लेने के लिए बतौर कोलैटरल इस्तेमाल कर सकते हैं। एफआरएसबी को कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

टैक्स के नियम क्या हैं?

एनएससी और एफआरएसबी पर मिले इंट्रेस्ट पर टैक्स लगता है। लेकिन, एनएससी में सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है। आप एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक इनवेस्ट कर टैक्स-डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं।

क्या है एक्सपर्ट्स की सलाह?

मुंबई की सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर पारुल माहेश्वरी का कहना है कि अगर आप मैच्योरिटी तक अपना पैसा इन स्कीमों में बनाए रखना चाहते हैं तो ही इनमें निवेश करना सही होगा। अगर आपको बीच में पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो आपके लिए एनएससी के मुकाबले एफआरएसबी में इनवेस्ट करना ठीक होगा। चूंकि इंट्रेस्ट पर टैक्स इनवेस्टर्स को देना है, इसलिए जो इनवेस्टर्स टैक्स रेट के ज्यादा स्लैब में आते हैं, उन्हें प्री-टैक्स यील्ड को समझ लेना ठीक रहेगा।

30 फीसदी या ज्यादा टैक्स रेट स्लैब में आने वाले इनवेस्टर्स के लिए टैक्स-फ्री बॉन्ड्स ज्यादा फायदेमंद होंगे। हालांकि, अगर आप लंबे समय तक पैसा इनवेस्ट करने के लिए तैयार हैं तो आप एनएससी और एफआएसबी में पैसे लगा सकते हैं। यह ध्यान रखें कि आपको अपना पूरा पैसा इनमें नहीं लगाना है।

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