कई बार पुराना घर नए घर से ज्यादा अच्छा लगता है। इलाका पहले से बसा होता है। बाजार, सड़क और दूसरी सुविधाएं पास होती हैं। कई बार उसी जगह नया घर खरीदने के मुकाबले कीमत भी कम होती है। लेकिन पुराना घर खरीदते समय सिर्फ कीमत देखना काफी नहीं है।

कई बार पुराना घर नए घर से ज्यादा अच्छा लगता है। इलाका पहले से बसा होता है। बाजार, सड़क और दूसरी सुविधाएं पास होती हैं। कई बार उसी जगह नया घर खरीदने के मुकाबले कीमत भी कम होती है। लेकिन पुराना घर खरीदते समय सिर्फ कीमत देखना काफी नहीं है।
बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ अतुल मोंगा का कहना है कि अगर होम लोन लेना है तो बैंक भी प्रॉपर्टी की जांच करेगा। बैंक ये देखेगा कि घर लोन के बदले सिक्योरिटी के तौर पर ठीक है या नहीं। पुराने घर में जांच और भी जरूरी है। घर की हालत देखना चाहिए। टाइटल और रजिस्ट्रेशन चेक करना भी जरूरी है। निर्माण की मंजूरी के साथ सारे जरूरी कागज भी जांचना चाहिए।
Colliers के Homebuying Sentiment Survey 2026 के मुताबिक, 50% संभावित खरीदार अगले दो साल में घर खरीदना चाहते हैं। इस सर्वे में करीब 1,800 लोगों को शामिल किया गया था। इसमें 30 से ज्यादा रेजिडेंशियल मार्केट शामिल थे।
अतुल मोंगा के मुताबिक, 15 साल और 40 साल पुराने घर को एक जैसा नहीं देखा जा सकता। लेकिन सिर्फ उम्र देखकर फैसला भी नहीं करना चाहिए। घर की स्ट्रक्चरल कंडीशन, पहले हुए बदलाव और मेंटेनेंस हिस्ट्री देखनी चाहिए।
मरम्मत में कितना पैसा लगेगा, यह भी पहले ही पता कर लें। बहुत पुरानी प्रॉपर्टी में स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच कराना फायदेमंद हो सकता है।
मोंगा का कहना है कि मान लीजिए पुराना घर 70 लाख रुपये का है। लेकिन उसमें 8 लाख रुपये की तुरंत मरम्मत चाहिए। ऐसे में घर की असली लागत 78 लाख रुपये हो गई। यानी सिर्फ 70 लाख रुपये की कीमत देखकर फैसला न करें। घर को रहने लायक बनाने में आने वाला पूरा खर्च जोड़ें।
2. पुराने घर पर लोन की अवधि भी देखें
यह जरूरी नहीं कि पुराने घर पर उतने ही लंबे समय का लोन मिले, जितना नए घर पर मिल सकता है।
अतुल मोंगा के मुताबिक, प्रॉपर्टी की उम्र और हालत लोन के फैसले को प्रभावित कर सकती है। उसके दस्तावेज और बैंक के लिए उसकी सिक्योरिटी वैल्यू भी देखी जाती है। इसलिए दो घरों की तुलना सिर्फ कीमत से न करें। लोन की अवधि और कुल लागत भी देखें।
3. रजिस्ट्रेशन है तो भी जांच करें
कई लोग मान लेते हैं कि घर रजिस्टर्ड है तो सब ठीक है। ऐसा जरूरी नहीं है। रजिस्ट्रेशन सिर्फ एक हिस्सा है। टाइटल चेक करना चाहिए। पुराने मालिकों का रिकॉर्ड देख भी सकते हैं। पता करना चाहिए कि किसी तरह का कर्ज या विवाद तो नहीं है। प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड भी सही रहका है।
यह देखना भी जरूरी है कि मौजूदा निर्माण मंजूर नक्शे और नियमों के मुताबिक है या नहीं। RBI के हाउसिंग फाइनेंस फ्रेमवर्क के मुताबिक, बने हुए घर को खरीदने वाले व्यक्ति को यह घोषणा करनी होती है कि प्रॉपर्टी मंजूर नक्शे और लागू बिल्डिंग नियमों के मुताबिक बनी है। जहां संभव हो, कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी होना चाहिए। लोन जारी करने से पहले बैंक को आर्किटेक्ट से भी निर्माण के नियमों के पालन की पुष्टि करानी होती है।
4. पुराने घर में ये गलती भारी पड़ सकती है
अतुल मोंगा का कहना है कि पुराने घर में बाद में कई बदलाव किए गए हो सकते हैं। मसलन, एक और फ्लोर बना दिया गया। बालकनी बंद कर दी गई। घर का कोई हिस्सा बढ़ा दिया गया।
अगर इन बदलावों का रिकॉर्ड कागजों में नहीं है तो होम लोन में दिक्कत आ सकती है। इसलिए सौदा पक्का करने से पहले कागज और घर की मौजूदा स्थिति का मिलान कर लें।
5. कानूनी स्थिति भी समझें
कुछ पुरानी प्रॉपर्टी का कानूनी रिकॉर्ड थोड़ा जटिल हो सकता है। जैसे Lal Dora प्रॉपर्टी। ऐसी प्रॉपर्टी में जमीन की प्रकृति और मालिकाना हक से जुड़े कागज ध्यान से देखना चाहिए। अतुल मोंगा के मुताबिक, ऐसी प्रॉपर्टी में सिर्फ मालिक का नाम देखना काफी नहीं है। जमीन और घर से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
दिल्ली के Revenue Department के मुताबिक, Lal Dora Certificate गांव के आबादी क्षेत्र में जमीन या प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़ा दस्तावेज है। फिर भी खरीदार को पूरी टाइटल चेन और दूसरे जरूरी कागज देखने चाहिए।
अनधिकृत कॉलोनियों में और ज्यादा सावधानी जरूरी है। RBI के हाउसिंग फाइनेंस फ्रेमवर्क के मुताबिक, ऐसी कॉलोनियों में प्रॉपर्टी के लिए तब तक होम लोन नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कॉलोनी नियमित न हो और जरूरी शुल्क जमा न किया गया हो।
6. प्रॉपर्टी और लोन को एक साथ देखें
अतुल मोंगा का कहना है कि खरीदार अक्सर घर और होम लोन को अलग-अलग देखते हैं। जबकि दोनों आपस में जुड़े हैं। प्रॉपर्टी की हालत और कागज तय करते हैं कि बैंक कितना लोन देगा। वहीं EMI के अलावा मरम्मत और मेंटेनेंस का खर्च भी आपकी जेब पर आएगा।
इसलिए पहले मालिकाना हक और टाइटल चेक करें। फिर रजिस्ट्रेशन और किसी कर्ज या विवाद की जांच करें। इसके बाद निर्माण की मंजूरी और घर की हालत देखें।
आखिर में यह तय करें कि कुल लागत के हिसाब से कितना लोन लेना ठीक रहेगा। अतुल मोंगा का कहना है कि पुराना घर खरीदना हमेशा खराब सौदा नहीं होता। लेकिन फैसला सिर्फ उम्र या कीमत देखकर न करें। देखें कि घर की हालत कैसी है, कागज कितने साफ हैं और बैंक उस पर आसानी से लोन देने को तैयार है या नहीं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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