PPF vs NPS: रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है तो आपने PPF और NPS के बारे में जरूर सुना होगा। दोनों का मकसद लंबी अवधि में पैसा तैयार करना है। लेकिन दोनों का तरीका अलग है।
PPF vs NPS: रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है तो आपने PPF और NPS के बारे में जरूर सुना होगा। दोनों का मकसद लंबी अवधि में पैसा तैयार करना है। लेकिन दोनों का तरीका अलग है।
PPF में ब्याज दर सरकार तय करती है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर नहीं पड़ता। NPS में पैसा बाजार से जुड़े साधनों में लगाया जाता है। इसलिए यहां रिटर्न तय नहीं होता।
अब सवाल है कि अगर हर महीने ₹5,000 लगाए जाएं तो 25 साल बाद दोनों में कितना पैसा बन सकता है? यही पूरा हिसाब समझते हैं।
PPF में कितना पैसा बनेगा?
PPF में फिलहाल 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। मान लीजिए आप हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं। यानी साल में ₹60,000। अगर 25 साल तक लगातार निवेश किया जाए तो आपकी कुल जमा रकम ₹15 लाख होगी।
अगर पूरे 25 साल के दौरान ब्याज दर 7.1% बनी रहती है, तो करीब ₹40 लाख का फंड बन सकता है। यहां करीब ₹15 लाख आपका निवेश होगा। बाकी रकम ब्याज से बनेगी।
NPS में कितना रिटर्न मिलेगा?
NPS का मामला थोड़ा अलग है। इसमें पैसा बाजार से जुड़े विकल्पों में निवेश होता है। इसलिए इसका रिटर्न पहले से तय नहीं होता। अगर औसत रिटर्न 10% सालाना मानें और हर महीने ₹5,000 निवेश करें, तो 25 साल में करीब ₹66 लाख का कॉर्पस बन सकता है।
इसमें भी आपका कुल निवेश ₹15 लाख ही रहेगा। फर्क रिटर्न का है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। 10% सिर्फ अनुमान है। NPS में वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।
दोनों में कितना फर्क पड़ेगा?
| पैमाना | PPF | NPS |
| हर महीने निवेश | ₹5,000 | ₹5,000 |
| निवेश की अवधि | 25 साल | 25 साल |
| कुल निवेश | ₹15 लाख | ₹15 लाख |
| अनुमानित सालाना रिटर्न | 7.10% | 10% |
| अनुमानित फंड | करीब ₹40 लाख | करीब ₹66 लाख |
| रिटर्न का आधार | सरकार द्वारा तय ब्याज | बाजार से जुड़ा रिटर्न |
किसमें जोखिम ज्यादा
PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्थिरता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार ब्याज दर तय करती है।
NPS में तस्वीर अलग है। यहां आपका पैसा इक्विटी और दूसरे बाजार से जुड़े साधनों में लगाया जा सकता है। इसलिए लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। साथ ही बाजार का जोखिम भी रहता है। यही वजह है कि सिर्फ अंतिम रकम देखकर दोनों में से किसी एक को चुनना सही तस्वीर नहीं देता।
NPS में पूरा पैसा एक साथ नहीं मिलता
NPS और PPF के बीच एक बड़ा अंतर पैसा निकालने के नियमों का है। NPS में पात्रता की शर्तें पूरी होने पर कॉर्पस का एक हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदी जाती है। इससे रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन जैसी आय तैयार होती है।
यानी NPS का मकसद सिर्फ बड़ा फंड बनाना नहीं है। यह रिटायरमेंट के बाद नियमित आय तैयार करने पर भी फोकस करता है। वहीं, PPF में ऐसी व्यवस्था नहीं है। इसकी मैच्योरिटी पर तय नियमों के मुताबिक पूरी रकम ली जा सकती है।
टैक्स के मामले में भी दोनों में फायदा
PPF में निवेश पर आयकर कानून के तहत टैक्स लाभ मिलता है। इसके अलावा ब्याज और मैच्योरिटी की रकम भी टैक्स के लिहाज से फायदेमंद है।
NPS में भी टैक्स लाभ मिलता है। निवेशक को तय शर्तों के तहत 80CCD के तहत कटौती का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 तक की अतिरिक्त कटौती का प्रावधान है।
तो PPF या NPS में क्या चुनें?
अगर आपकी प्राथमिकता सुरक्षा और तय ब्याज वाले निवेश की है तो PPF का ढांचा ज्यादा सीधा है। यहां बाजार की रोज की हलचल का असर नहीं पड़ता।
अगर आप रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना चाहते हैं और बाजार का जोखिम उठा सकते हैं तो NPS पर दांव लगा सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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