ED Raids on Builders: दिल्ली-NCR के बिल्डरों पर ED का बड़ा शिकंजा! होमबायर्स से करोड़ों की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5 ठिकानों पर छापेमारी
ED Raids on builders: केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दिल्ली जोनल ऑफिस (DLZO-I) ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को दिल्ली-एनसीआर में 5 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई होमबायर्स के साथ कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े तीन मामलों में की जा रही है
ED Raids on builders: दिल्ली-NCR में कई बड़े बिल्डरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है
ED Raids on builders: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को दिल्ली-एनसीआर में बड़े बिल्डरों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करते हुए पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई होमबायर्स से कथित धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन (धन के दुरुपयोग) और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े तीन मामलों की जांच के सिलसिले में की गई। केंद्रीय एजेंसी की दिल्ली जोनल ऑफिस (DLZO-I) की टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई होमबायर्स के साथ कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े तीन मामलों में की जा रही है।
इन कंपनियों पर ED की कार्रवाई
CNBC Awaaz के संवाददाता शंकर की रिपोर्ट के मुताबिक, ED के अनुसार, जिन प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, उनमें शामिल हैं-
1.M/s CHD Developers Ltd
2.M/s Ninex Developers Ltd.
3.M/s Manju J Homes (India) Ltd.
4. कई अज्ञात आरोपी और कंपनियों के निदेशक
केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि इन कंपनियों की भूमिका कथित तौर पर हजारों घर खरीदारों के साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी की जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज की गई तीन FIR से जुड़ी है। ED के अनुसार, ये FIR 29 अप्रैल, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 28 जुलाई, 2025 को दर्ज की गई थीं।
'No EMI Till Possession' स्कीम बनी जांच का केंद्र
जांच एजेंसियों के मुताबिक, बिल्डरों ने खरीदारों को आकर्षित करने के लिए 'No EMI Till Possession' और 'Subvention Scheme' जैसी योजनाओं का प्रचार किया। इन योजनाओं के तहत लोगों को बैंकों से होम लोन लेकर फ्लैट बुक कराने के लिए प्रेरित किया गया। आरोप है कि खरीदारों ने बैंक से लोन लेकर परियोजनाओं में निवेश किया। लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद उन्हें फ्लैट का कब्जा (Possession) नहीं मिला। इस कारण हजारों परिवारों पर ईएमआई और किराए का दोहरा आर्थिक बोझ पड़ गया।
CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई ED की जांच
ED की जांच Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत दर्ज ECIR पर आधारित है। यह मामला 28 जुलाई 2025 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज तीन एफआईआर से जुड़ा है। बताया गया है कि ये एफआईआर 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में दर्ज की गई थीं। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में बिल्डरों द्वारा कथित वित्तीय अनियमितताओं और खरीदारों को गुमराह करने के आरोप सामने आए थे।
फंड डायवर्जन का आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि घर खरीदारों और बैंकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग संबंधित हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के बजाय अन्य परियोजनाओं और व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया। इसी कथित फंड डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की अब ईडी विस्तार से जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, होमबायर्स से मिले लोन और भुगतान की रकम को संबंधित परियोजनाओं में लगाने के बजाय अन्य प्रोजेक्ट्स और दूसरे उद्देश्यों में डायवर्ट किया गया। ईडी अब इसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग और धन के दुरुपयोग की जांच कर रही है।फिलहाल ईडी की तलाशी कार्रवाई जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
'सबवेंशन स्कीम' के तहत हुए घोटाला मामले में सीबीआई ने भी दर्ज किया था FIR
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इन कंपनियों पर 'सबवेंशन स्कीम' (Subvention Scheme) के नाम पर हजारों घर खरीदारों को धोखा देने का आरोप है।ईडी की यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज ECIR के आधार पर की जा रही है। यह मामला सीबीआई (CBI) द्वारा 28 जुलाई 2025 को दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू हुआ था।
इन एफआईआर को 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में दर्ज किया गया था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि बिल्डरों ने 'नो EMI टिल पजेशन' (फ्लैट मिलने तक EMI नहीं) जैसी योजनाओं का प्रचार कर लोगों को फ्लैट बुक कराने के लिए प्रेरित किया। इसके तहत खरीदारों ने बैंक से होम लोन लेकर फ्लैट बुक किए, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। इससे घर खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
हजारों होमबायर्स की उम्मीदें जांच पर टिकीं
दिल्ली-एनसीआर में कई वर्षों से हजारों खरीदार अपने फ्लैट का कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं होने से खरीदारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ईडी की यह कार्रवाई प्रभावित खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तलाशी जारी, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई
ईडी ने बताया कि फिलहाल सभी स्थानों पर तलाशी और दस्तावेजों की जांच जारी है। डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और फंड के दुरुपयोग के आरोप पुष्ट होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के खिलाफ PMLA के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।