Noida Airport ने बदली NCR की तस्वीर! रियल एस्टेट में तगड़ा बूम, नोएडा-ग्रेटर और नोएडा से लेकर यमुना एक्सप्रेसवे तक... जमीन और घरों की भारी डिमांड

Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक नया हवाई अड्डा नहीं है। बल्कि यह जेवर समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विकास की दिशा बदलने वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। ये आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों को देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले रियल एस्टेट हब में बदल सकती है

अपडेटेड Jul 08, 2026 पर 10:44 AM
Noida Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ एक्सप्रेसवे, रेल और RRTS नेटवर्क देगा रफ्तार

Noida Airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक नया हवाई अड्डा नहीं है। बल्कि यह पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विकास की दिशा बदलने वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों को देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले रियल एस्टेट हब में बदल सकती है।

रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी CBRE की एक रिपोर्ट के अनुसार, बड़े एयरपोर्ट केवल यात्रियों की आवाजाही नहीं बढ़ाते। बल्कि उनके आसपास उद्योग, रोजगार, होटल, वेयरहाउस, आवासीय परियोजनाएं और व्यावसायिक गतिविधियों का पूरा इकोसिस्टम विकसित होता है। जेवर एयरपोर्ट भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता


नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों (12 MPPA) को संभालने की क्षमता है। इसके अलावा एक रनवे, लगभग 11 लाख वर्ग फुट का टर्मिनल और हर साल करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो संभालने वाला कार्गो टर्मिनल विकसित किया जा रहा है।

लंबी अवधि की योजना के तहत वर्ष 2040-2050 तक इस एयरपोर्ट को 5 से 6 रनवे वाले बड़े एरोट्रोपोलिस के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। भविष्य में इसकी क्षमता 7 से 12 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष (70-120 MPPA) तक पहुंच सकती है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के फेज-1 का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट का सबसे बड़ा प्रभाव इसकी बेहतर कनेक्टिविटी से दिखाई देगा:-

  • जेवर-फरीदाबाद एक्सप्रेसवे एयरपोर्ट को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
  • पलवल-नोएडा एयरपोर्ट रेल लिंक यात्रियों और कर्मचारियों के लिए तेज परिवहन उपलब्ध कराएगी।
  • गाजियाबाद-जेवर RRTS कॉरिडोर बनने के बाद गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक की यात्रा काफी कम समय में पूरी हो सकेगी।
  • इन परियोजनाओं से दिल्ली-एनसीआर के बड़े हिस्से को एयरपोर्ट से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

रिहायशी बाजार में पहले से दिख रहा असर

  • रिपोर्ट के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव रियल एस्टेट बाजार में पहले ही दिखाई देने लगा है।
  • ग्रेटर नोएडा में वर्ष 2021 में जहां करीब 2,900 आवासीय यूनिट लॉन्च हुई थीं। वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15,200 से अधिक हो गई। यानी चार वर्षों में लगभग पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई।
  • इसी दौरान वर्ष 2025 में करीब 17,800 से अधिक घरों की बिक्री हुई। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में केवल निवेशकों ही नहीं। बल्कि वास्तविक खरीदारों की भी मजबूत मांग बनी हुई है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती वर्षों में प्लॉटेड डेवलपमेंट सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहेगा। जबकि भविष्य में बेहतर सामाजिक और शहरी सुविधाओं के साथ आवासीय परियोजनाओं की मांग और बढ़ेगी।

वेयरहाउस और इंडस्ट्री को मिलेगा सबसे पहले फायदा

  • एयरपोर्ट शुरू होते ही सबसे अधिक फायदा लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर को मिलने की उम्मीद है।
  • YEIDA मास्टर प्लान के तहत सेक्टर 8F में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब विकसित किया जा रहा है।
  • इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल डिवाइस पार्क, MSME और बड़े उद्योगों के लिए भी विशेष औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।
  • कोरियाई और जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप जैसी परियोजनाएं भी इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

होटल और रिटेल सेक्टर को भी मिलेगा बढ़ावा

  • एयरपोर्ट शुरू होने के बाद सबसे पहले होटल उद्योग को सीधा फायदा मिलने की संभावना है। यात्रियों, बिजनेस ट्रैवलर्स और कार्गो गतिविधियों के बढ़ने से होटल की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
  • इसके अलावा शुरुआती दौर में हाईवे आधारित रिटेल, मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) परियोजनाएं और टाउनशिप आधारित शॉपिंग सेंटर विकसित होने की संभावना है।

ऑफिस स्पेस की मांग भविष्य में बढ़ेगी

  • विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस और ग्रेड-ए कमर्शियल स्पेस का विकास धीरे-धीरे होगा। जैसे-जैसे आबादी, रोजगार और परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा। वैसे-वैसे कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपने कार्यालय स्थापित करना शुरू करेंगी।
  • फिलहाल यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम भूमि लागत डेवलपर्स और निवेशकों के लिए बड़ा आकर्षण बनी हुई है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

  • रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव एक-दो वर्षों में नहीं। बल्कि अगले कई दशकों तक देखने को मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक विकास, रोजगार के अवसर और सरकारी योजनाएं मिलकर इस पूरे क्षेत्र की विकास गति को तेज करेंगी।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, अब सवाल यह नहीं है कि जेवर कॉरिडोर विकसित होगा या नहीं। बल्कि यह है कि निवेशक, डेवलपर और खरीदार इस विकास यात्रा में किस चरण पर शामिल होना चाहते हैं।

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