Noida Airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक नया हवाई अड्डा नहीं है। बल्कि यह पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विकास की दिशा बदलने वाला बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों को देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले रियल एस्टेट हब में बदल सकती है।
रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी CBRE की एक रिपोर्ट के अनुसार, बड़े एयरपोर्ट केवल यात्रियों की आवाजाही नहीं बढ़ाते। बल्कि उनके आसपास उद्योग, रोजगार, होटल, वेयरहाउस, आवासीय परियोजनाएं और व्यावसायिक गतिविधियों का पूरा इकोसिस्टम विकसित होता है। जेवर एयरपोर्ट भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों (12 MPPA) को संभालने की क्षमता है। इसके अलावा एक रनवे, लगभग 11 लाख वर्ग फुट का टर्मिनल और हर साल करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो संभालने वाला कार्गो टर्मिनल विकसित किया जा रहा है।
लंबी अवधि की योजना के तहत वर्ष 2040-2050 तक इस एयरपोर्ट को 5 से 6 रनवे वाले बड़े एरोट्रोपोलिस के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। भविष्य में इसकी क्षमता 7 से 12 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष (70-120 MPPA) तक पहुंच सकती है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के फेज-1 का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट का सबसे बड़ा प्रभाव इसकी बेहतर कनेक्टिविटी से दिखाई देगा:-
रिहायशी बाजार में पहले से दिख रहा असर
वेयरहाउस और इंडस्ट्री को मिलेगा सबसे पहले फायदा
होटल और रिटेल सेक्टर को भी मिलेगा बढ़ावा
ऑफिस स्पेस की मांग भविष्य में बढ़ेगी
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?