सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज नोएडा का सुपरटेक ट्विन टावर ध्वस्त हो जाएगा। बायर्स की शिकायत के बाद एपेक्स और सियाने टावर्स को गिराने का आदेश कोर्ट ने दिया है। ऐसे में मुद्दे की बात ये है कि क्या इस तरह से इमारत को गिरा देने से अथॉरिटीज की मनमानी रुक जाएगी। आसमान से बातें करने वाली यह इमारत जब ऊंची उठ रही थी तो क्या अथॉरिटीज की नजर यहां नहीं पड़ी? वो आंखे में पट्टी क्यों बांधे रहे। बाद में ऐसी नौबत आ गई कि यह ट्विन टावर पल भर में ध्वस्त हो जाएगा।
सुपरटेक की मनमानी पर लगाम कसने के लिए कुछ सीनियर सिटीजंस ने पहल की। उनकी शिकायत थी कि सुपरटेक ने दोनों टावर्स बिना किसी मंजूरी के बनाए हैं। यह बात 2009 की है। पहले उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फिर वे सुप्रीम कोर्ट गए। ऐसे में अथॉरिटीज पर कई सवाल उठते हैं कि आखिर इस बड़े निर्माण पर अथॉरिटीज का ध्यान क्यों नहीं गया? इस मामले में कुछ जानकारों का कहना है कि ट्विन टावर्स गिराया जाना बेहद जरूरी है। इससे रियल एस्टेट कंपनियां जब भी कोई अवैध निर्माण करेंगी तो 100 बार सोचेंगी। इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने में एमराल्ड कोर्ट के वरिष्ठ नागरिकों ने कड़ी मेहनत की है। इन्होंने महीनों तक कोर्ट के चक्कर लगाए हैं। अपने खर्च पर इलाहाबाद जाना लगातार जारी रहा।
जानिए खरीदारों का क्या है कहना
Forum for people's Collective Efforts (FPCE) के प्रेसिडेंट अभय उपाध्याय ने कहा कि इस सख्त कदम से बिल्डर और अधिकारियों में बड़ा संदेश जाएगा। वे ऐसे गलत काम करने से पहले कई बार सोचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि साथ ही नियमों में बदलाव की बेहद जरूरत है। ऐसे मामले से जुड़े अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। फिलहाल नोएडा के सेक्टर-93 A में स्थित ट्विन टावर आज धराशाई हो जाएगा। इसे लेकर स्थानीय लोगों में चिंता और उत्साह दोनों है।