Expert View: 'साउथ कोरिया अब अगला चांदी बन रहा है...' एडलवाइस MF की राधिका गुप्ता की निवेशकों को बड़ी चेतावनी!

Radhika Gupta Mutual Fund Market Outlook: राधिका गुप्ता पिछले लंबे समय से इंटरनेशनल डायवर्सिफिकेशन यानी विदेशी बाजारों में निवेश की वकालत करती रही हैं, लेकिन उनका मानना है कि निवेश की वजह सही होनी चाहिए, न कि 'फोमो' यानी छूट जाने का डर

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 9:51 AM
सोने और चांदी की कीमतों में आई हालिया गिरावट पर भी उन्होंने बड़ी बात कही है

Radhika Gupta Market Outlook: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि अब पैसा कहां लगाया जाए। क्या इक्विटी में एक्सपोजर बढ़ाना चाहिए, सोना खरीदना चाहिए या फिर विदेशी बाजारों का रुख करना चाहिए?

इन सभी सुलगते सवालों पर एडलवाइज म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राधिका गुप्ता ने मनीकंट्रोल के साथ एक विशेष बातचीत में अपना नजरिया साझा किया है। उन्होंने अर्निंग्स रिकवरी, सेक्टर्स की पसंद, गोल्ड, ग्लोबल इन्वेस्टिंग और एसेट एलोकेशन पर खुलकर बात की और बताया कि क्यों नए निवेशकों को हाइब्रिड फंड्स से शुरुआत करनी चाहिए। आइए जानते हैं उनका पूरा मार्केट आउटलुक।

1. 'साउथ कोरिया बन रहा है अगला चांदी', FOMO से बचें


राधिका गुप्ता पिछले लंबे समय से इंटरनेशनल डायवर्सिफिकेशन यानी विदेशी बाजारों में निवेश की वकालत करती रही हैं, लेकिन उनका मानना है कि निवेश की वजह सही होनी चाहिए, न कि 'फोमो' यानी छूट जाने का डर।

हालिया विनर्स के पीछे न भागें: पिछले कुछ समय से साउथ कोरिया के बाजारों में आई तेजी को देखकर कई निवेशक वहां पैसा लगाने की बात कर रहे हैं। इस पर राधिका गुप्ता ने चेतावनी देते हुए कहा, 'साउथ कोरिया अब अगला चांदी बनता जा रहा है।' लोग इसके पीछे सिर्फ इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि इसने हाल ही में अच्छा प्रदर्शन किया है।

सही वजह से करें निवेश: निवेश इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि किसी देश ने हाल ही में शानदार रिटर्न दिया है। विदेशी बाजारों में पैसा लगाने का सही उद्देश्य पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना, रुपये की कमजोरी के खिलाफ सुरक्षा पाना और उन थीम्स/सेक्टर्स में एंट्री करना होना चाहिए जो भारत में उपलब्ध नहीं हैं।

2. भारतीय बाजार का आउटलुक: साल की दूसरी छमाही होगी दमदार

इस साल बाजार में आए बड़े उतार-चढ़ाव और रिकवरी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत से जुड़ी ज्यादातर भू-राजनीतिक चिंताएं और अनिश्चितताएं अब पीछे छूट चुकी हैं। अब बड़ा सवाल ग्लोबल ग्रोथ का है।

अर्निंग्स रिकवरी: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के कॉर्पोरेट नतीजे शायद बहुत ज्यादा उत्साहजनक न रहें, क्योंकि कंपनियां ऊंचे कच्चे तेल और अन्य दिक्कतों से जूझ रही हैं।

दूसरी छमाही में तेजी की उम्मीद: जो अर्निंग्स रिकवरी साइकिल कुछ समय से टली हुई थी, वह दूसरी और तीसरी तिमाही से दिखने लगेगी। कुल मिलाकर, साल का दूसरा हिस्सा पहले हिस्से के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत और दिलचस्प रहने की उम्मीद है।

3. पोर्टफोलियो में मल्टी-कैप अप्रोच और पसंदीदा सेक्टर्स

राधिका गुप्ता का मानना है कि निवेशकों के पास हमेशा एक 'मल्टी-कैप' पोर्टफोलियो होना चाहिए। पूरा पैसा सिर्फ लार्ज-कैप में नहीं लगाया जा सकता क्योंकि लार्ज-कैप इंडेक्स काफी सेंट्रलाइज्ड होता है।

मिड और स्मॉल-कैप में नई थीम्स: नई टेक्नोलॉजी, कैपिटल मार्केट्स, मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर्स जैसी कई रोमांचक थीम्स मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्पेस में बेहतर तरीके से मौजूद हैं।

निजी पोर्टफोलियो: उन्होंने बताया कि उनके खुद के पोर्टफोलियो का करीब 70% हिस्सा इक्विटी में है, जहां वह फ्लेक्सी कैप या मल्टी कैप फंड को प्राथमिकता देती हैं, जो अपने आप सभी मार्केट कैपिटलाइजेशन में एक्सपोजर दे देते हैं।

पसंदीदा सेक्टर्स: वे फाइनेंशियल सेक्टर्स विशेषकर प्राइवेट बैंक और कैपिटल मार्केट बिजनेस, पावर, डिफेंस और प्रीमियम कंजम्पशन यानी महंगे प्रोडक्ट्स की खपत को पसंद कर रही हैं।

4. सोना और चांदी: पोर्टफोलियो के रक्षक, वेल्थ क्रिएटर नहीं

सोने और चांदी की कीमतों में आई हालिया गिरावट पर उनका नजरिया बेहद साफ है:

'सोना और चांदी आपके एसेट एलोकेशन का हिस्सा होने चाहिए, इन्हें टैक्टिकल बेट की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएटर मानने के बजाय पोर्टफोलियो को स्थिरता देने वाले एसेट के रूप में देखें।'

कितना करें निवेश: पोर्टफोलियो में सोने का 10-15% एलोकेशन बिल्कुल सही है। चूंकि ज्यादातर निवेशक एंट्री और एग्जिट का सही समय नहीं पकड़ पाते, इसलिए सोने या चांदी में SIP के जरिए निवेश करना एक समझदारी भरा फैसला है।

5. नए निवेशकों के लिए ₹10 लाख की निवेश सलाह

यदि कोई पहली बार बाजार में आ रहा है और उसके पास निवेश के लिए ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है, तो राधिका गुप्ता उसे हाइब्रिड फंड जैसे- बैलेंस्ड एडवांटेज फंड या एग्रेसिव हाइब्रिड फंड से शुरुआत करने की सलाह देती हैं।

इमोशनल रिस्क से सुरक्षा: पहली बार निवेश करने वाले लोग मार्केट करेक्शन के दौरान घबरा जाते हैं। हाइब्रिड फंड इक्विटी के साथ-साथ डेट का सेफ्टी नेट देते हैं। अगर बाजार 20% गिरता है और आपका पोर्टफोलियो सिर्फ 8-10% गिरता है, तो आप बाजार में टिके रहते हैं। हाइब्रिड फंड्स निवेशकों के बिहेवियर को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। उच्च जोखिम क्षमता वाले लोग फ्लेक्सी कैप फंड भी चुन सकते हैं।

6. स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) को कैसे समझें?

आजकल SIFs को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी है। राधिका गुप्ता के अनुसार, ये फंड्स ट्रेडिशनल म्यूचुअल फंड और PMS/AIF के बीच बैठते हैं। इनमें फंड मैनेजर्स को डेरिवेटिव्स का उपयोग करने की अधिक छूट होती है, जिससे रिस्क-रिटर्न का आउटकम अलग हो सकता है।

उन्होंने साफ कहा कि किसी भी ऐसी चीज में पैसा न लगाएं जिसे आप नहीं समझते। प्रोडक्ट के नाम पर जाने के बजाय अपने डिस्ट्रीब्यूटर या AMC से यह पूछें कि इस SIF की रणनीति क्या है? निवेश की अवधि कितनी होनी चाहिए? रिटर्न की उम्मीदें और रिस्क क्या हैं? और फंड मैनेजमेंट टीम का अनुभव कैसा है?

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

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