RBI के एक फैसले ने होम और कार लोन के ग्राहकों को खुश किया है। दरअसल, 6 अप्रैल की सुबह 10 बजे केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने रेपो रेट नहीं बढ़ाने का ऐलान किया। इसका मतलब है कि होम और कार लोन के ग्राहकों की EMI नहीं बढ़ेगी। आरबीआई का यह फैसला अनुमान के मुताबिक नहीं है। यह माना जा रहा था कि 6 अप्रैल की सुबह होम लोन ग्राहकों को एक और झटका लगने जा रहा है। RBI रेपो रेट में करीब 0.25 फीसदी वृद्धि करेगा, जिससे यह 6.75 फीसदी हो जाएगा। इसके चलते होम लोन के ग्राहकों की EMI बढ़ जाएगी। जो लोग घर और कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, उन्हें भी अब ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। सवाल है कि इस फैसले से होम और कार लोग ग्राहकों को कितना खुश होना चाहिए?
इंडियन इकोनॉमी की अच्छी सेहत
केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया। उन्होंने ग्लोबल और इंडियन इकोनॉमी के बारे में कई अहम बातें बताई। उन्होंने रिटेल इनफ्लेशन को लेकर RBI के अनुमान के बारे में बताया। उन्होंने देश की इकोनॉमिक ग्रोथ की भी गुलाबी तस्वीर पेश की। कुल मिलाकर उन्होंने बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताईं। लेकिन, उनकी एक बात गौर करने वाली है। दरअसल, उन्होंने कहा कि रेपो रेट नहीं बढ़ाने का फैसला सिर्फ अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी के लिए है। उनका यह बयान बहुत अहम है। यह आने वाले दिनों की तस्वीर का अंदाजा लगाने में हमारी मदद करता है।
बातों-बातों में दास ने दिया बड़ा संकेत
दास ने स्पष्ट किया कि रेपो रेट वृद्धि पर ब्रेक लगाने का यह फैसला सिर्फ अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी के लिए है। उन्होंने यह भी कहा, "मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी भविष्य में किसी तरह का एक्शन लेने में नहीं हिचकेगी।" इसका मतलब स्पष्ट है कि इंटरेस्ट रेट वृद्धि पर इस ब्रेक को सिर्फ कोमा माना जाना चाहिए, न कि फुलस्टॉप। दरअसल, RBI ने इस बार इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि ग्लोबल इकोनॉमी के उलट इंडियन इकोनॉमी की बुनियादी स्थिति काफी अच्छी है। जीडीपी ग्रोथ दूसरे देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। जीएसटी कलेक्शन शानदार है। सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ अच्छी है। डॉलर के मुकाबले रुपया काफी गिरने के बाद अब स्थिर नजर आ रहा है।
अमेरिकी अनुभव का फैसले पर असर
ऐसा लगता है कि RBI ने अमेरिका के अनुभव से भी कुछ सबक लिया है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट लगातार बढ़ाने की अपनी पॉलिसी पर अड़ा हुआ है। उसने पिछले महीने के आखिर में तब इंटरेस्ट रेट बढ़ाया, जब अमेरिका बैंकिंग क्राइसिस का सामना कर रहा था। एक्सपर्ट्स का मानना था कि अमेरिकी इकोनॉमी की नाजुक हालत को देखते हुए फेडरल रिजर्व मार्च में इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने का फैसला कर सकता है। लेकिन, जिद्दी फेडरल रिजर्व के कानों पर जू तक नहीं रेंगी। उसने इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया।
जून में मंदी में अमेरिकी इकोनॉमी के जाने के आसार
पिछले साल मार्च से इंटरेस्ट रेट में लगातार वृद्धि की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालुत नाजुक हो गई है। वहां पॉलिसी रेट्स करीब एक साल में जीरो से 5 फीसदी के पार पहुंच गए हैं। इंटरेस्ट रेट में इतनी वृद्धि किसी भी बड़ी इकोनॉमी को घुटने पर लाने के लिए पर्याप्त है। यही वजह है कि एक बार फिर एक्सपर्ट्स अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने की बात करने लगे हैं। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी इकोनॉमी जून या उसके बाद मंदी में चली जाएगी। अगर ऐसा होता है तो यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए भी खराब खबर होगी।
होम लोन ग्राहकों को कितना खुश होना चाहिए?
इधर, इंडिया का बात करें तो घर और कार खरीदने वाले लोगों को अभी यह नहीं मानना चाहिए कि RBI ने इंटरेस्ट रेट वृद्धि पर स्थायी ब्रेक लगा दिया है। इसका मतलब है कि अगर आगे जरूरत पड़ती है तो केंद्रीय बैंक अपनी अगली मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अगली मॉनेटरी पॉलिसी जून के पहले हफ्ते में आएगी। इसमें करीब दो महीने का समय बाकी है। RBI का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि इस बीच इंडियन इकोनॉमी से जुड़े डेटा किस तरह का संकेत देते हैं। पहला, RBI की सबसे ज्यादा नजर रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर होगी। दूसरा, कंपनियों के नतीजें शुरू होने जा रहे हैं। इससे यह संकेत मिलेगा कि इकोनॉमी में डिमांड कैसी है, खासकर ग्रामीण इलाकों में मांग की तस्वीर पर खास नजर होगी।
होम लोन लेने का प्लान बना रहे लोगों को क्या करना चाहिए?
इसलिए अगर आप घर खरीदने के लिए होम लोन लेने का प्लान बना रहे हैं तो आपको यह मान कर चलना चाहिए कि आगे इंटरेस्ट रेट में और एक-दो बार वृद्धि हो सकती है। बैंक हो सकता है कि आपको ये बातें न बताए। लेकिन, इसका ध्यान रखने से आपको आगे दिक्कत नहीं होगी। दरअसल, कोरोना की महामारी के दौरान इंटरेस्ट रेट रिकॉर्ड लो पर था। इसका फायदा उठाने के लिए कई लोगों ने होम लोन लेकर घर खरीदा। लेकिन, अचानक इंटरेस्ट रेट काफी ज्यादा बढ़ जाने से उन्हें EMI चुकाने में दिक्कत आ रही है। कई लोगों ने बैंकों से अपने लोन की अवधि बढ़ाने को कहा है। इससे 20 साल के लोन की EMI 240 किस्त से बढ़कर 300 तक पहुंच गई है। ऐसे कई लोग जो जल्द रिटायर करने वाले हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कैसे इतने लंबे समय तक EMI चुकाएंगे।