Retirement Corpus Annual Withdrawal Rate: रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना आधी जंग जीतने जैसा है। असल चुनौती तब शुरू होती है जब हर महीने मिलने वाली सैलरी बंद हो जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जमा पूंजी से हर साल कितना पैसा निकाला जाए ताकि बुढ़ापे में फंड समय से पहले खत्म न हो और आपकी बाकी जिंदगी बिना किसी आर्थिक तंगी के आराम से कट सके?
शुरुआत में ज्यादा पैसा निकालने से कुछ साल तो आरामदायक बीत सकते हैं, लेकिन बाद के सालों में महंगाई और मेडिकल खर्चों को संभालना मुश्किल हो सकता है। जानिए SEBI की गाइडलाइंस और एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही विड्रॉल स्ट्रेटेजी।
1- 3% से 4% विड्रॉल रूल से करें शुरुआत
फाइनेंशियल प्लानर्स के अनुसार, अपने रिटायरमेंट पोर्टफोलियो से सालाना 3% से 4% पैसा निकालना एक सुरक्षित शुरुआती बिंदु माना जाता है। अगर आपके पास ₹1 करोड़ का कॉर्पस है, तो 3% के हिसाब से आप साल में ₹3 लाख यानी ₹25000 महीना निकाल सकते हैं। 4% के हिसाब से यह रकम ₹4 लाख सालाना लगभग ₹33,333 महीना होती है। वैसे यह कोई फिक्स्ड नियम नहीं है। सही दर आपकी उम्र, अन्य आय के स्रोतों और रिटायरमेंट अवधि पर निर्भर करती है।
2- हर साल एक ही फिक्स्ड अमाउंट निकालने की भूल न करें
मार्केट के उतार-चढ़ाव को समझे बिना हर साल तय रकम निकालना आपके फंड को जल्दी खत्म कर सकता है। अगर शेयर बाजार गिरता है और आप तब भी हर साल फिक्स्ड ₹4 लाख ही निकालते रहते हैं, तो आपको उतनी रकम जुटाने के लिए अपने पोर्टफोलियो की ज्यादा यूनिट्स बेचनी पड़ेंगी। इससे कॉर्पस को भारी नुकसान होता है।
3- महंगाई को कैलकुलेशन में जरूर जोड़ें
जो मंथली इनकम आज आपके लिए काफी है, वह 10 या 15 साल बाद महंगाई के कारण कम पड़ जाएगी। SEBI भी चेतावनी देता है कि समय के साथ महंगाई आपकी खरीदने की क्षमता को घटा देती है। रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च, दवाइयां और घरेलू सामान तेजी से महंगे होते हैं, इसलिए हर साल अपने विड्रॉल प्लान में महंगाई दर को पहले से शामिल करना बेहद जरूरी है।
4- अन्य इनकम सोर्स का इस्तेमाल करें
अगर आपके पास दूसरे स्रोतों से रेगुलर इनकम आ रही है, तो अपने मेन रिटायरमेंट कॉर्पस को कम छुएं। पेंशन, रेंटल इनकम, एन्युटी या बैंक ब्याज से अगर आपके रोजमर्रा के जरूरी खर्च पूरे हो रहे हैं, तो मेन फंड से कम विड्रॉल करें। इससे बचा हुआ पैसा बाजार में इन्वेस्टेड रहेगा और उसे कम्पाउंडिंग के जरिए बढ़ने का ज्यादा समय मिलेगा।
5- नजदीकी खर्चों के पैसे को सेफ एसेट्स में रखें
रिटायरमेंट का पूरा पैसा इक्विटी या मार्केट-लिंक्ड स्कीम्स में नहीं रखना चाहिए। अगले 3 से 5 सालों के लिए जरूरी पैसे को पूरी तरह सेफ और लिक्विड एसेट्स जैसे- एफडी या लिक्विड फंड में रखें। इससे मंदी के समय आपको अपने शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड को घाटे में बेचने की मजबूरी नहीं होगी।
6- हर साल अपने विड्रॉल प्लान का रिव्यू करें
रिटायरमेंट इनकम प्लान को एक बार बनाकर भूलना नहीं चाहिए। हर साल अपने कुल कॉर्पस, मार्केट रिटर्न, महंगाई और अचानक आए मेडिकल खर्चों की समीक्षा करें। अगर किसी साल बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो गैर-जरूरी खर्चों के लिए विड्रॉल थोड़ा कम करके अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखा जा सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।