SEBI अनरजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के खिलाफ सख्ती बढ़ाने जा रहा है। मार्केट रेगुलेटर की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि ऐसे नियम बनाए जा रहे हैं, जिसके दायरे में सभी अनरजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। पिछले कुछ सालों में इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स की संख्या काफी बढ़ी है। वे निवेशकों को शेयरों को बेचने और खरीदने की सलाह दे रहे हैं। सेबी के नियम के मुताबिक, सिर्फ रजिस्टर्ड एडवाइजर्स ही इनवेस्टर्स को ऐसी सलाह दे सकते हैं।
हाल में सेबी ने शिकायतों पर की है कार्रवाई
बुच ने मनीकंट्रोल के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। मुंबई में AMFI के नए ऑफिस के उद्घाटन कार्यक्रम के बाद उन्होंने मीडिया से बात की। 25 मई को मार्केट रेगुलेटर ने एक सेटलमेंट ऑर्डर पारित किया था। इसमें उसने कहा था कि फिनफ्लूएंसर PR Sundar, उनकी कंपनी Mansun Consulting और कंपनी के को-प्रमोटर M Sundar के खिलाफ शिकायत का निपटारा हो गया है। ये सेबी में रजिस्ट्रेशन के बगैर इनवेस्टमेंट से जुड़ी एडवायजरी सर्विसेज दे रहे थे। इन तीनों में से प्रत्येक ने 15.60 रुपये के सेटलमेंट अमाउंट का पेमेंट किया है। इसके अलावा कंबाइंड 6.07 करोड़ रुपये के disgorgement amount का पेमेंट भी सेबी को किया है।
गुंजन वर्मा को सेबी ने दी है चेतावनी
इसके कुछ दिन बाद सेबी ने फिनफ्लूएंसर गुंजन वर्मा को भी चेतावनी दी। उसने कहा कि वर्मा रजिस्टर्ड नहीं हैं, जिससे उन्हें इनवेस्टमेंट से जुड़ी सलाह नहीं देनी चाहिए। हालांकि, सेबी को वर्मा के ऐसा करने का कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, सेबी को इस बात के सूबत मिले थे कि वर्मा ने कुछ क्लाइंट्स से पैसे लिए थे। इनमें से कुछ क्लाइंट्स ने सेबी से शिकायत की थी कि वर्मा ने उनसे निवेश पर रिटर्न दिलाने का वादा किया था।
अभी क्या है सेबी की व्यवस्था?
बड़ा सवाल यह है कि क्या सेबी के पास ऐसी कोई व्यवस्था या कमेटी है जो इनवेस्टमेंट से जुड़ी सलाहों की मॉनिटरिंग करती है? दरअसल, ऐसे कई इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स हैं, जो सेबी में रजिस्टर्ड नहीं हैं। वे क्लाइंट्स से फीस लेकर उन्हें एडवायजरी सर्विसेज देते हैं। उन्हें अच्छा रिटर्न दिलाने का वादा करते हैं। और आखिर में इनवेस्टर्स को नुकसान होने पर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। दूसरा सवाल है कि क्या सेबी ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार करता है? R Sundar के सेटलमेंट मामले से पता चलता है कि सेबी को इस बारे में दो शिकायतें मिली थी।
आर सुंदर के खिलाफ मिली शिकायतों में कहा गया था कि सेबी से इनवेस्टमेंट एडवायजरी का लाइसेंस लिए बगैर वह क्लाइंट्स को एडवायजरी सर्विसेज दे रहे हैं। SEBI ने जांच में पाया कि सुंदर इंटरनेट पर एक ब्लॉग चलाते थे। इस ब्लॉग के जरिए वह अलग-अलग पैकेज के जरिए एडवायजरी सर्विसेज देते थे। इसी तरह SEBI ने वर्मा के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद उनकी जांच की।
एक रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मनीकंट्रोल को बताया कि इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के लिए सेबी के सख्त नियम हैं। इसलिए अनरजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स का सेबी के नियमों की अनदेखी कर इनवेस्टमेंट से जुड़ी सलाह देना ठीक नहीं है। ये पकड़े भी नहीं जाते हैं। शिकायत मिलने पर सिर्फ कुछ के खिलाफ कार्रवाई होती है।