चांदी की कीमतें एक अहम दौर से गुजर रही हैं। ये अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से 53 फीसदी से नीचे कारोबार कर रही हैं।
Silver Price Today: चांदी की कीमतें एक अहम दौर से गुजर रही हैं। ये अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से 53 फीसदी से नीचे कारोबार कर रही हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव और लगातार बनी हुई महंगाई (जिसका मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हैं) के चलते सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिसका असर कीमती धातुओं पर पड़ रहा है।
28 जनवरी, 2026 को चांदी लगभग 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। 23 अक्टूबर तक आते-आते, इसमें 53 फीसदी से अधिक की गिरावट आई और अब यह 54 डॉलर प्रति औंस के थोड़ा ऊपर कारोबार कर रही है।
घरेलू बाजार में भी कुछ ऐसा ही रुझान देखने को मिला। इस साल, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर स्पॉट चांदी 29 जनवरी को 3,79,983 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि 23 अक्टूबर को यह गिरकर 1,94,170 रुपये के निचले स्तर पर आ गई। इससे पहले, 23 मार्च को यह 2,04,383 रुपये के निचले स्तर तक गई थी।
फ्यूचर्स मार्केट में, 26 अक्टूबर को घरेलू चांदी 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए 1,95,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे ट्रेड कर रही है।
'स्पॉट चांदी' का मतलब है तुरंत खरीद और डिलीवरी के लिए मौजूदा बाजार भाव, जबकि 'चांदी फ्यूचर्स' ऐसे एक्सचेंज-ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिनमें भविष्य की किसी तारीख पर एक तय कीमत पर चांदी खरीदने या बेचने का सौदा किया जाता है।
चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली तेजी कायम रह पाएगी या नहीं? मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग), अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक औद्योगिक मांग को लेकर अनिश्चितता जैसे कई कारण है जो मौजूदा समय में चांदी की गिरावट को सपोर्ट कर रही है ।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए
बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद जताते हुए, बोनान्ज़ा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव ने कहा, "निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कीमतों में आई भारी गिरावट का मतलब यह नहीं है कि कीमतें अपने निचले स्तर (बॉटम) पर आ गई हैं। निवेशकों को बहुत आक्रामक होकर खरीदारी करने से बचना चाहिए और निवेश बढ़ाने से पहले कीमतों के स्थिर होने के संकेतों का इंतजार करना चाहिए। मध्यम अवधि में, चांदी की चाल अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर की दिशा, वैश्विक विनिर्माण गतिविधियों और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी। बॉन्ड यील्ड में गिरावट और निवेश की मांग में फिर से तेजी आने से कीमतों में सुधार (रिकवरी) आ सकती है, हालांकि कमजोर आर्थिक गतिविधियां इस तेजी को सीमित कर सकती हैं।"
कीमतों पर स्ट्रक्चरल डिमांड का रहेगा असर
निवेशकों को इस कीमती सफेद धातु की 'स्ट्रक्चरल डिमांड' (संरचनात्मक मांग) पर नजर रखने की सलाह देते हुए, बोनान्ज़ा के विशेषज्ञ ने कहा कि लंबी अवधि में, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिफिकेशन और औद्योगिक उपयोग से जुड़ी स्ट्रक्चरल डिमांड से चांदी को फायदा मिल सकता है। हालांकि, तकनीकी बदलाव, विकल्पों का आना और धीमी आर्थिक वृद्धि इसके लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।
बोनान्ज़ा के निरपेंद्र यादव ने कहा, "निवेशकों के लिए, कीमतों में आया मौजूदा सुधार धीरे-धीरे खरीदारी करने का एक अच्छा मौका हो सकता है, बजाय इसके कि वे यह अनुमान लगाने की कोशिश करें कि कीमतें कब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचेंगी। जो लोग पहले से ही चांदी में निवेशित हैं, उन्हें अपने निवेश की समीक्षा करनी चाहिए और किसी एक जगह बहुत ज्यादा पैसा लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि सोने की तुलना में चांदी में उतार-चढ़ाव काफी अधिक होता है। निवेश की मांग में लगातार सुधार और औद्योगिक फंडामेंटल्स में बेहतरी आने से ही कीमतों में एक मजबूत और टिकाऊ रिकवरी की पुष्टि हो सकेगी।"
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।