दिवाली के करीब आते ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ने लगी है। धनतेरस के दिन सोने-चांदी की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। वहीं सोने और चांदी के दामों में आई गिरावट और कीमतों में स्थिरता के चलते लोग खरीदारी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कीमतें कम होने से दिवाली के दौरान ग्राहक खरीदारी के लिए ज्वेलरी स्टोर पहुंचने लगे हैं। ऐसे में आने वाले शादी और त्योहारों के सीजन में चांदी की मांग बढ़ सकती है। वहीं एक्सपर्ट के मुताबिक चांदी की कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में डिटेल में
CNBC से बात करते हुए अनमोल सिल्वर के सीईओ किशोर रूनवाल का कहा कि, चांदी की कीमतों में आने वाले दिनों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इस साल अपने सबसे ऊंचे स्तर से चांदी के दाम करीब 25 फीसदी नीचे आ चुके हैं। चांदी की कीमतों में गिरावट अभी जारी रह सकती है। इसकी वजह अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और दुनिया में बढ़ता तनाव है, जिसका असर निवेशकों पर पड़ रहा है। वहीं चांदी सस्ती होने से खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले कम कीमतों के कारण बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
और गिर सकता है चांदी के दाम
रूनवाल के मुताबिक, 'चांदी की कीमतें अभी अपने सबसे निचले स्तर पर नहीं पहुंची हैं। अगर आने वाले समय में दाम कम बने रहते हैं, तो चांदी खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे बाजार में चांदी की मांग बढ़ सकती है।' उन्होंने आगे कहा कि, 'चांदी की कीमतों में जिस तरह से गिरावट आ रही है, वह चिंता बढ़ाने वाली है। उनके मुताबिक, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चांदी के दाम सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अगर कीमतों में गिरावट का मौजूदा सिलसिला जारी रहता है, तो घरेलू बाजार में चांदी का भाव 1.80 लाख से 1.85 लाख रुपये तक आ सकता है। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसकी कीमत गिरकर 1.75 लाख से 1.80 लाख रुपये तक पहुंचने की आशंका है।'
बढ़ सकती है खरीदारी की संख्या
चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद दिवाली के दौरान ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। किशोर रूनवाल के मुताबिक, 'दाम कम होने से लोग फिर से ज्वेलरी की दुकानों पर खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि, कम कीमतों के कारण दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। अगर चांदी के भाव एक हफ्ते तक नीचे बने रहते हैं, तो बाजार में खरीदारी करने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। इससे चांदी की मांग को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।'
रूनवाल के अनुसार, US फेडरल रिजर्व की बढ़ती इंटरेस्ट रेट, कच्चे तेल की ज्यादा कीमतें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने मिलकर कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि, MCX पर चांदी को 1.92 लाख रुपये के आसपास कुछ सहारा मिला है, लेकिन हाल में कीमतों में आई तेजी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। कारोबार के दौरान चांदी ने अपनी बढ़त खो दी। इससे पता चलता है कि बाजार में अभी चांदी की कीमतों में मजबूती नहीं आई है।
शादी का सीजन में बढ़ेगी मांग
किशोर रूनवाल को उम्मीद कि, चांदी की कीमतें कम रहने पर सबसे पहले बुलियन और सिक्कों में निवेश बढ़ेगा। इसके बाद, जैसे-जैसे शादी का सीजन जोर पकड़ेगा, चांदी की ज्वेलरी, बर्तन और सजावटी सामान की मांग भी बढ़ सकती है। यानी कम कीमतों से निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों को भी फायदा मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा, चांदी के आयात में कमी का कीमतों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इस साल चांदी का आयात घटा है, लेकिन सरकार ने हाल ही में आयात से जुड़े लाइसेंस के नियमों को आसान बनाने के लिए कदम उठाए हैं। इससे बाजार में चांदी की सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है। ऐसे में आयात में कमी के बावजूद आने वाले समय में चांदी की उपलब्धता में सुधार हो सकता है।
किशोर ने कहा कि, चांदी के आयात में कमी से कीमतों में तेजी आने की संभावना कम है। उनके मुताबिक, घरेलू बाजार में चांदी की कीमत पर मिलने वाला अतिरिक्त प्रीमियम अभी सामान्य स्तर पर है। निवेश की मांग को लेकर उन्होंने उम्मीद जताई कि त्योहारों के सीजन में चांदी खरीदकर निवेश करने का चलन दूसरे निवेश विकल्पों के मुकाबले बेहतर बना रह सकता है।