SIP में सिर्फ 5 साल की देरी, रिटायरमेंट फंड में 2.42 करोड़ रुपये का नुकसान! समझिए पूरा कैलकुलेशन
SIP Calculator: क्या सिर्फ 5 साल निवेश टालने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है? 25 और 30 साल की उम्र में SIP शुरू करने के एक साधारण उदाहरण से समझिए कैसे कंपाउंडिंग का असर रिटायरमेंट फंड में 2.42 करोड़ रुपये का अंतर पैदा कर देता है।
25 साल की उम्र में लगाया गया पहला 10,000 रुपये का निवेश 35 साल तक बढ़ने का मौका पाता है।
SIP Calculator: नौकरी मिलने के बाद ज्यादातर युवा निवेश को टाल देते हैं। उन्हें लगता है कि अभी तो पूरी जिंदगी पड़ी है। पहले थोड़ा घूमना-फिरना, नई बाइक, नया फोन और अपनी पसंद की चीजों पर खर्च कर लिया जाए। निवेश तो बाद में भी शुरू किया जा सकता है, जब सैलरी बढ़ जाएगी।
यही सोच कई लोगों को करोड़ों रुपये का नुकसान करा देती है। निवेश की दुनिया में सिर्फ रकम ही मायने नहीं रखती, समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। कई बार सिर्फ 5 साल की देरी रिटायरमेंट तक करोड़ों रुपये का अंतर पैदा कर देती है।
25 उम्र में निवेश क्यों नहीं शुरू करते?
मान लीजिए किसी 25 साल के युवक को पहली नौकरी मिली है। उसकी सैलरी 40,000 रुपये महीने है। न कोई होम लोन है, न परिवार की बड़ी जिम्मेदारी। वह आराम से हर महीने 10 हजार रुपये निवेश कर सकता है।
लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। उस समय प्राथमिकताएं अलग होती हैं। नया मोबाइल, वीकेंड ट्रिप, दोस्तों के साथ घूमना या बाइक अपग्रेड करना ज्यादा जरूरी लगता है। मन में यह भी रहता है कि आगे सैलरी बढ़ेगी तो ज्यादा निवेश कर लेंगे। आखिर इतनी जल्दी किस बात की है? यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है।
30 साल की उम्र में बदल जाती है सोच
जब वही व्यक्ति 30 साल का होता है तो तस्वीर बदल चुकी होती है। सैलरी बढ़कर करीब 1 लाख रुपये महीने हो सकती है, लेकिन जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।
शादी, घर खरीदने की योजना, बच्चों का भविष्य और दूसरे खर्च सामने दिखाई देने लगते हैं। तब एहसास होता है कि सिर्फ अच्छी सैलरी काफी नहीं है, निवेश भी जरूरी है। इसके बाद वह हर महीने 10,000 रुपये की SIP शुरू कर देता है। फैसला सही होता है, लेकिन एक समस्या है। वह 5 साल देर कर चुका होता है।
5 साल की देरी से कितना फर्क पड़ता है?
मान लीजिए दोनों निवेशक हर महीने 10,000 रुपये की SIP करते हैं और उन्हें औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है। रिटायरमेंट की उम्र 60 साल मानते हैं।
25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाला व्यक्ति 35 साल तक निवेश करेगा। इस दौरान उसका कुल निवेश 42 लाख रुपये होगा और रिटायरमेंट तक उसका फंड करीब 5.5 करोड़ रुपये बन सकता है।
वहीं 30 साल की उम्र में शुरुआत करने वाला व्यक्ति 30 साल तक निवेश करेगा। उसका कुल निवेश 36 लाख रुपये होगा और रिटायरमेंट तक उसका फंड करीब 3.08 करोड़ रुपये पहुंच सकता है।
सिर्फ 6 लाख से पैदा हो जाता है बड़ा अंतर
इन दोनों निवेशकों के बीच कुल निवेश का अंतर सिर्फ 6 लाख रुपये है। लेकिन रिटायरमेंट के समय फंड में करीब 2.42 करोड़ रुपये का अंतर दिखाई देता है। यानी 5 साल इंतजार करने की असली कीमत 6 लाख रुपये नहीं, बल्कि 2.42 करोड़ रुपये है।
आखिर ऐसा होता क्यों है?
इसका जवाब कंपाउंडिंग में छिपा है। कंपाउंडिंग का मतलब है कि आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है। समय के साथ यही प्रक्रिया तेजी से संपत्ति बनाती है।
25 साल की उम्र में लगाया गया पहला 10,000 रुपये का निवेश 35 साल तक बढ़ने का मौका पाता है। वहीं 30 साल की उम्र में लगाया गया वही 10,000 रुपये केवल 30 साल तक ही बढ़ सकता है। यही अतिरिक्त 5 साल लंबे समय में बहुत बड़ा अंतर पैदा कर देते हैं।
शुरुआती साल ही असली ताकत
कई लोग सोचते हैं कि शुरुआती कुछ साल छूट भी गए तो क्या फर्क पड़ता है। लेकिन निवेश में सबसे ज्यादा ताकत शुरुआती वर्षों की ही होती है।
हर साल की देरी कंपाउंडिंग के सबसे शक्तिशाली हिस्से को कमजोर कर देती है। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हमेशा कहते हैं कि छोटी रकम से शुरुआत करिए, लेकिन शुरुआत जल्दी करिए।
SIP बढ़ी, तो अंतर और बढ़ जाएगा
असल जिंदगी में ज्यादातर लोगों की आय समय के साथ बढ़ती है। ऐसे में वे अपनी SIP भी बढ़ाते हैं। इसे स्टेप-अप SIP कहा जाता है।
अगर 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाला व्यक्ति हर साल अपनी SIP बढ़ाता है, तो उसके और 30 साल में शुरुआत करने वाले निवेशक के बीच का अंतर 2.42 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है। यानी यहां दिखाया गया अंतर वास्तव में एक सतर्क अनुमान है।
युवा निवेशकों के लिए सबक
निवेश शुरू करने के लिए बड़ी सैलरी, बड़ा बोनस या किसी खास मौके का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती। जरूरत सिर्फ शुरुआत करने की होती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि पहले जिंदगी सेट हो जाए, फिर निवेश करेंगे। लेकिन सच इसके उलट है। निवेश की शुरुआत तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है, जब जिम्मेदारियां कम हों और समय सबसे ज्यादा हो।
एक 10,000 रुपये की SIP, जो 25 साल की उम्र में शुरू की गई हो, कई बार 35 साल की उम्र में शुरू की गई 20,000 रुपये की SIP से भी ज्यादा असरदार साबित हो सकती है। निवेश में रकम से ज्यादा ताकत समय की होती है।
यही वजह है कि 25 से 30 साल के बीच के सिर्फ 5 साल कई लोगों के लिए रिटायरमेंट पर 3 करोड़ और 5.5 करोड़ रुपये के फंड के बीच का अंतर बन जाते हैं।
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