Taxation on Jewellery Sale: शादी-ब्याह के मौके पर माता-पिता या रिश्तेदारों से मिले सोने-चांदी के गहने न सिर्फ इमोशनल महत्व रखते हैं, बल्कि मुश्किल समय में एक बड़े वित्तीय सहारे का काम भी करते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि शादी में मिला तोहफा टैक्स-फ्री होता है, इसलिए इसे बेचने पर मिलने वाला पूरा पैसा भी टैक्स से पूरी तरह मुक्त होगा।
अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अलर्ट हो जाइए। वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह बात पूरी तरह सही नहीं है। शादी में गहने मिलना तो टैक्स-फ्री है, लेकिन उन्हें बेचने से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेंस टैक्स देना पड़ता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि टैक्स कानून क्या कहता है और गहने बेचने पर टैक्स का गणित कैसे तय होता है।
शादी में गहना मिलना टैक्स-फ्री, लेकिन बेचना नहीं!
मौजूदा इनकम टैक्स कानूनों के मुताबिक, शादी के अवसर पर मिलने वाले किसी भी गिफ्ट चाहे वह गहने हों, कैश हो या कोई अन्य संपत्ति पर पाने वाले व्यक्ति को कोई टैक्स नहीं देना होता। यह छूट पूरी तरह असीमित है। यानी गिफ्ट की वैल्यू चाहे कितनी भी हो और वह किसी से भी मिला हो, उस पर एक रुपया भी टैक्स नहीं लगता।
वैसे तो शादी के दिन तक तो वह गहना पूरी तरह टैक्स-फ्री है, लेकिन जिस दिन आप उसे बाजार में बेचकर पैसा हासिल करते हैं, तो उस बिक्री से होने वाले मुनाफे पर इनकम टैक्स की देनदारी बनती है। इसलिए, बिक्री से मिला पूरा पैसा न तो पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है और न ही पूरे पैसे पर टैक्स लगता है। टैक्स सिर्फ आपके मुनाफे पर लगता है।
शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म टैक्स? ऐसे तय होती है समयावधि
बिक्री पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह गहना आपके और आपके माता-पिता (गिफ्ट देने वाले) के पास कुल मिलाकर कितने समय तक रहा।
शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG): अगर पिता द्वारा खरीदे जाने की तारीख से लेकर आपके द्वारा बेचे जाने तक की कुल अवधि 24 महीने या उससे कम है, तो होने वाले मुनाफे को आपकी नियमित आय में जोड़ा जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG): अगर संयुक्त अवधि 24 महीने से अधिक है, तो इसे लॉन्ग-टर्म माना जाएगा और होने वाले मुनाफे पर 12.50% की फ्लैट दर से टैक्स लगेगा।
टैक्स का हिसाब लगाने के लिए सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि गहने की खरीद कीमत क्या मानी जाएगी, क्योंकि आपको तो वह गिफ्ट में मिला था? टैक्स नियमों के तहत, उस गहने को खरीदने के लिए आपके पिता (या पुराने मालिक) ने जो कीमत चुकाई थी, वही आपकी खरीद लागत मानी जाएगी।
1 अप्रैल 2001 से पुराने गहनों का नियम: अगर वह गहना 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदा गया था, तो आपके पास 1 अप्रैल 2001 की फेयर मार्केट वैल्यू को अपनी खरीद लागत मानने का विकल्प होता है।
वैल्यूएशन सर्टिफिकेट जरूरी: 1 अप्रैल 2001 की मार्केट वैल्यू साबित करने के लिए आपको किसी रजिस्टर्ड वैल्यूअर से आधिकारिक वैल्यूएशन सर्टिफिकेट बनवाना होगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।