FD कराने के बाद ब्याज बढ़ने पर नहीं होगा नुकसान, ये 2 बैंक दे रहे हैं एफडी पर खास सर्विस

FD Rate: महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बीते हफ्ते 0.35 फीसदी तक रेपो रेट बढ़ाई है। इस साल आरबीआई पांच बार रेपो रेट बढ़ा चुका है। वह रेपो रेट को 4% से बढ़ाकर 6.25% कर चुका है। हर बार RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद ज्यादातर सभी बैंकों ने लोन की दरों और FD पर ब्याज दरों को बढ़ाया है

अपडेटेड Dec 12, 2022 पर 1:19 PM
हर बार आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद बैंकों ने एफडी पर ब्याज बढ़ाया है।

FD Rate: महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बीते हफ्ते 0.35 फीसदी तक रेपो रेट बढ़ाई है। इस साल आरबीआई पांच बार रेपो रेट बढ़ा चुका है। वह रेपो रेट को 4% से बढ़ाकर 6.25% कर चुका है। हर बार RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद ज्यादातर सभी बैंकों ने लोन की दरों और FD पर ब्याज दरों को बढ़ाया है। बैंकों के MCLR बढ़ाने के बाद होम, कार और पर्सनल लोन महंगे हो गए हैं। बैंकों ने FD पर ब्याज दरों को बढ़ाया है। हर बार आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद बैंकों ने एफडी पर ब्याज बढ़ाया है। ऐसे में कई ग्राहकों के मन में सवाल है कि वह कैसे हर बार ब्याज दर बढ़ने का फायदा एफडी पर उठा सकते हैं। आप भी फ्लोटिंग FD का फायदा उठा सकते हैं। इसमें FD पर ब्याज बढ़ने का फायदा आपको भी मिलता है। कौनसे बैंक ये ऑफर ग्राहकों को दे रहे हैं।

फ्लोटिंग FD रेट

अभी IDBI बैंक और Yes Bank फ्लोटिंग FD का ऑप्शन दे रहे हैं। आईडीबीआई बैंक 364 दिन के ट्रेजरी बिल पर ये विकल्प था लेकिन ये 1 नवंबर 2018 को बंद कर दिया था। इस एफडी पर पुराने जमाकर्ता को 7.75% के करीब ब्याज मिल रहा है। बैंक अब 91 दिन का ट्रेजरी बिल ऑफर कर रहा है इसका 0.50 फीसदी एक्सटेंड होता है। आपको अब 6.63% का अधिकतम रिटर्न मिलता है। यस बैंक 18 महीने और उससे ज्यादा लंबे समये की एफडी पर 1.6% तक ब्याज एक्सटेंड करता है। अभी हाल में रेपो रेट बढ़ने के बाद 18 महीने या उससे अधिक की एफडी पर 7.85% का ब्याज दे रहा है। अभी बैंक अधिकतम 8.05 फीसदी का ब्याज दे रहा है।


क्या होता है फ्लोटिंग रेट एफडी

आप जो एफडी कराते हैं उसमें ब्याज पहले से तय होता है और वही मैच्योरिटी पर मिलता है। उसमें ब्याज में कोई भी बदलाव बीच में नहीं होता है। वहीं, फ्लोटिंग में ब्याज दर बढ़ने पर एफडी पर मिलने वाला ब्याज भी बढ़ जाता है। इसमें ब्याज दर मैच्योरिटी तक बदलती रहती है। वहीं, ब्याज कम होने पर ब्याज कम भी हो जाता है। जिस तरीके से आरबीआई बार-बार ब्याज बढ़ा रहा है, तो ग्राहक इस ऑप्शन को चुन सकते हैं।

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