Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हर एकादशी व्रत का अलग नाम और महत्व होता है। इस दिन बहुत से भक्त फलाहार उपवास करते हैं, तो कुछ निर्जला व्रत भी करते हैं। एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक माने जाते हैं। हर माह की तरह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट झेल रहे थे, तब महर्षि गौतम के बताए अनुसार उन्होंने अजा एकादशी का निष्काम भाव से व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए, उनका मृत पुत्र जीवित हो गया और उन्हें पुनः अपना खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ।
अजा एकादशी व्रत 2026 की तारीख
अजा एकादशी व्रत तारीख : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ : 6 सितंबर 2026, शाम 07:29/07:30 बजे से
व्रत पारण समय : 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 से 08:33 बजे तक
अजा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक
प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक
अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक
गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक
अमृत काल: 03:59 PM से 05:29 PM तक
सायाह्न सन्ध्या: 06:48 PM से 07:58 PM तक
अजा एकादशी व्रत के मुख्य नियम
एकादशी के दिन चावल (अक्षत), तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है।
फलाहार में दूध, फल, मखाने या सेंधा नमक से बनी चीजें ली जा सकती हैं।
इस दिन किसी की निंदा न करें और घर में शांति बनाए रखें।