Ashadha Amavasya 2026 Date: आषाढ़ का महीना हिंदू धर्म में बहुत अहम माना जाता है। हिंदू कैंलेंडर का यह चौथा महीना होता है और इसमें सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसके अलावा इस माह में देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है, जिसके बाद भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। आषाढ़ माह की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, पूजा, व्रत और दान-पुण्य के साथ ही पितृ दोष से राहत पाने के लिए उपाय भी किए जाते हैं।
आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि को हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार आषाढ़ अमावस्या पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह अमावस्या तिथि मंगलवार को पड़ रही है, जिससे भौमवती अमावस्या का शुभ अवसर प्राप्त होगा। इस महत्वपूर्ण तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
आषाढ़ अमावस्या 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि की मान्यता के कारण आषाढ़ अमावस्या का पर्व 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।
अमावस्या तिथि प्रारंभ : 13 जुलाई 2026 को शाम 06:49 बजे से
इसे 'हलहारिणी अमावस्या' क्यों कहते हैं?
आषाढ़ अमावस्या का किसानों और कृषि संस्कृति से बहुत गहरा नाता है, जिसके कारण इसे हलहारिणी अमावस्या कहा जाता है। इस महीने में पूरी वर्षा की सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसलिए यह नई फसल की बुआई के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। यह किसानों के लिए नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर किसान अपने खेतों में बैलों को आराम देते हैं और अपने मुख्य कृषि उपकरण 'हल' के साथ-साथ खेती में काम आने वाले अन्य औजारों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता अन्नपूर्णा और धरती माता की आराधना की जाती है ताकि प्रकृति की कृपा से फसलें हरी-भरी, रोगमुक्त और समृद्ध रहें। इसी कृषि परंपरा और हल पूजन के कारण इसे 'हलहारिणी' नाम मिला है।
स्नान, दान और पितृ तर्पण का समय
अमावस्या तिथि पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इस साल 14 जुलाई 2026 को सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर 03:12 बजे तक स्नान, तर्पण और दान का शुभ समय रहेगा। इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद अपने दिवंगत पितरों के निमित्त तर्पण या श्राद्ध कर्म करें। स्नान के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, काले तिल या छाता दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन नए पौधे (जैसे पीपल, बरगद या नीम) लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है।