Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर बन रहा ये दुर्लभ संयोग, हनुमान जी की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए है शुभ

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ के महीने में आने वाले अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस साल आषाढ़ अमावस्या पर दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे यह हनुमान जी की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है। आइए जानें क्या है ये दुर्लभ संयोग

अपडेटेड Jul 07, 2026 पर 7:19 PM
इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया है।

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ माह हिंदी कैलेंडर का चौथा महीना है। हर माह की तरह इस माह के कृष्ण पक्ष का समापन अमावस्या तिथि से होता है। इसे ही आषाढ़ अमावस्या के रूप में जाना जाता है। इस साल आषाढ़ अमावस्या पर एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन संकटमोचन हनुमान की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। यह अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया है।

हर हिंदू माह में अमावस्या तिथि आती है, जो पितृ तर्पण और स्नान-दान के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके पितरों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी कृपा से जीवन सुखमय होता है। यह दिन जीवन से नकारात्मकता को दूर करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

आषाढ़ अमावस्या 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार, 14 जुलाई, 2026 को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026 को शाम 06:50 बजे से होगी और इसका समापन 14 जुलाई 2026 को दोपहर 03:14 बजे होगा। उदयातिथि के नियमों के कारण स्नान-दान और व्रत की अमावस्या 14 जुलाई को ही रहेगी। इस दिन मंगलवार होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग भी मिल रहा है।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।


भौमवती अमावस्या का विशेष संयोग

इस साल आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है। हिंदू धर्म में 'भौम' शब्द मंगल ग्रह के लिए प्रयोग किया जाता है, इसलिए मंगलवार और अमावस्या के इस विशेष संयोग का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। मंगवार के दिन अमावस्या पड़ने से मंगल जनित दोषों और कर्ज से मुक्ति के लिए इस दिन की गई पूजा विशेष फल देती है। साथ ही, यह दिन हनुमान जी की कृपा पाने और शनि दोष निवारण के लिए बहुत शुभ है।

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि

इस दिन पितरों की प्रसन्नता और भगवान विष्णु व शिव जी की कृपा पाने के लिए नीचे दी गई सरल विधि से पूजा करें :

  • अमावस्या के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर किसी पवित्र नदी, जलाशय या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करें और जल में काले तिल और कुशा मिलाकर अपने पितरों के निमित्त तर्पण करें। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • घर के मंदिर में दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा करें। चूंकि इस दिन भौमवती अमावस्या है, इसलिए हनुमान जी की पूजा करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी बेहद शुभ रहेगा।
  • पूजा और तर्पण के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, तिल, वस्त्र, छाता या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान अवश्य करें।
  • शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें, इससे भी पितर और देव प्रसन्न होते हैं।

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