Bhadli Navami 2026: हिंदू धर्म में साल की कुछ ऐसी खास तिथियां होती हैं, जब कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है और पूरा दिश शुभ समय माना जाता है। ऐसी ही एक तिथि है भड़ली नवमी की। यह आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आती है और इसे भड़रिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। दरअसल, इस तिथि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का नवमी पूजन किया जाता है। साथ ही, यह दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु के योग निद्रा में जाने से ठीक पहले आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुभ एकादशी तिथि को हरिशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस दिन से भगवान विष्णु की चार माह की योग निद्रा अवस्था प्रारंभ होती है। इसके बाद से विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यों पर चार महीनों के लिए रोक लग जाती है। भड़ली नवमी चतुर्मास शुरू होने से ठीक पहले मिलने वाले अंतिम शुभ और उत्तम मुहूर्त माना जाता है। हालांकि इस साल देवगुरु बृहस्पति के अस्त अवस्था में होने की वजह से भड़ली नवमी पर मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। मगर, लोग अपनी महत्वपूर्ण खरीदारी इस दिन जरूर कर सकते हैं।
नवमी तिथि प्रारम्भ : 22 जुलाई 2026 को सुबह 05:16 बजे से।
नवमी तिथि समाप्त : 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:56 से 03:48 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:17 से 07:39 तक।
लाभ: सुबह 06:12 से 07:50 तक।
अमृत: सुबह 07:50 से 09:28 तक।
शुभ: सुबह 11:07 से दोपहर 12:45 तक।
लाभ: शाम 05:40 से 07:18 तक।
शुभ: रात्रि 08:40 से 10:02 तक।
अमृत: रात्रि 10:02 से 11:23 तक।
2026 में भड़ली नवमी पर क्यों नहीं होंगे शुभ कार्य?
इस बार 22 जुलाई 2026 को भड़ली नवमी के दिन देवगुरु बृहस्पति ग्रह अस्त अवस्था में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि जब देवगुरु बृहस्पति ग्रह अस्त होते हैं तो किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसी वजह से साल 2026 में भड़ली नवमी के दिन मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
इस दिन अस्त हुए थे देवगुरु बृहस्पति
द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, 15 जुलाई 2026 की शाम 7 बजकर 59 मिनट पर देवगुरु बृहस्पति ग्रह अस्त हुए थे। अब 12 अगस्त 2026 की सुबह करीब 5 बजकर 3 मिनट तक देवगुरु बृहस्पति ग्रह यानी गुरु ग्रह इसी अवस्था में रहेंगे।