Janmashtami 2026 Vrat Niyam: हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। इसी के प्रतीक स्वरूप हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। आज, 4 सितंबर, 2026 को पूरी दुनिया में कृष्ण भक्त अपने नटखट नंद किशोर का 5253वां जन्मोत्सव मना रहे हैं। आज के दिन मंदिर ही नहीं लोग अपने घरों में कृष्ण लीला की विशेष सजावट करते हैं और उपवास करते हैं। आज के दिन उपवास करते समय कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। आइए जानें इसके बारे में
जन्माष्टमी 2026 व्रत नियम
अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का तरीका चुनें। भक्त निर्जला व्रत रख सकते हैं, जो बिना कुछ खाए-पिए किया जाता है। या वे सात्विक फलाहार कर सकते हैं।
जन्माष्टमी व्रत के दौरान, चावल, गेहूं, आटा और दाल आदि आमतौर पर नहीं खाए जाते हैं। तामसिक और शराब आदि से दूर रहते हैं।
व्रती फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा आटा, मूंगफली और सूखे मेवे खा सकते हैं। इसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
फल – व्रत में केला, सेब, पपीता, अनार और मौसमी फल खाए जा सकते हैं।
साबूदाना – साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा या साबूदाना खीर व्रत की पॉपुलर डिश हैं।
मखाना – भुना हुआ मखाना या मखाना खीर व्रत का पेट भरने वाला ऑप्शन हो सकता है।
सिंघाड़ा आटा – सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल पूरी, रोटी या चीला बनाने के लिए किया जा सकता है। कुट्टू का
आटा – कुट्टू का आटा आमतौर पर व्रत में बनने वाली पूरी और पैनकेक बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
आलू – उबले हुए या हल्के पके हुए आलू सेंधा नमक और साधारण मसालों के साथ बनाए जा सकते हैं।
जन्माष्टमी व्रत के दौरान इन चीजों से बचें