Panchak 2026: जुलाई में ये 10 दिन होंगे भारी, दो बार लग रहे पंचक की जानें सही तारीख और नियम

Panchak 2026: हिंदू धर्म में कुछ दिनों को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इनमें से एक पंचक भी है। यह पांच दिनों की अवधि होती है, जिसमें कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। जुलाई में दो बार पंचक लग रहा है। आइए जानें इसकी सही तारीख और नियम

अपडेटेड Jul 04, 2026 पर 6:44 PM
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जुलाई 2026 के महीने में दो बार पंचक लग रहा है।

Panchak 2026: जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने में हिंदी माह आषाढ़ रहेगा और इसमें कई प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे। इसके अलावा इस माह में दो बार पंचक का संयोग भी बनेगा। हिंदू धमें में कुछ ऐसे दिन बताए गए हैं, जब कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इनमें से एक है पंचक, जो पांच दिनों तक रहता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है तो उसे पंचक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जुलाई 2026 के महीने में दो बार पंचक लग रहा है। जुलाई 2026 में पंचक की सही तारीखें, समय और इसके नियम नीचे दिए गए हैं :

जुलाई 2026 में पंचक की तिथियां

पहला पंचक (मृत्यु पंचक): 04 जुलाई 2026, शनिवार से प्रारंभ होकर 08 जुलाई 2026, बुधवार तक रहेगा। इस पंचक की शुरुआत शनिवार से होने के कारण इसे 'मृत्यु पंचक' कहा जाता है। ज्योतिष में इसे बेहद संवेदनशील और अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

दूसरा पंचक (चोर पंचक): 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रारंभ होकर अगले महीने यानि 04 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। यह पंचक शुक्रवार से शुरू होगा, इसलिए ये 'चोर पंचक' कहा जाता है। इस दौरान धन हानि या चोरी का खतरा रहता है।

पंचक में ये न करें

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान 5 कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव 5 गुना बढ़ जाता है:


  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
  • पंचक काल में मकान का लेंटर या छत डलवाने का काम पूरी तरह वर्जित होता है। ऐसा करने से धन हानि और घर में अशांति हो सकती है।
  • इन 5 दिनों में घर के निर्माण के लिए लकड़ी खरीदना, काटना या घास-फूस और ईंधन इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है। इससे आग का भय रहता है।
  • पंचक के दौरान नया पलंग, चारपाई बनाना या खरीदना शास्त्रों में मना है।
  • यदि पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव के अंतिम संस्कार के समय किसी योग्य पंडित की सलाह पर पांच कुश (घास) या आटे के पुतले बनाकर साथ में जलाने का विधान है, ताकि पंचक दोष शांत हो सके।

दिन के अनुसार तय होता है पंचक का नाम

पंचक कुल पांच प्रकार का होता है और इसका नाम दिन के अनुसार तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, रविवार के दिन शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसी तरह सोमवार से लग रहा पंचक राज पंचक, मंगलवार को शुरू होने वाला अग्नि पंचक, शुक्रवार से प्रारंभ होने वाला रोग पंचक और शनिवार को प्रारंभ होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है।

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