सावन के आखिरी शुक्रवार बदल सकता है किस्मत का रुख! वरलक्ष्मी व्रत पर बन रहे शुभ योग

वरलक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित एक खास व्रत है, जिसे सावन के अंतिम शुक्रवार को रखा जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस बार व्रत के दिन बनने वाले शुभ संयोग इसे और खास बना रहे हैं। पूजा से जुड़ी तारीख और शुभ समय भी इस दिन को विशेष बनाते हैं।

अपडेटेड Aug 10, 2026 पर 8:52 AM

सावन का आखिरी शुक्रवार इस बार बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि वरलक्ष्मी व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि, धन और वैभव बना रहता है। इस बार इस खास दिन पर कुछ शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे व्रत का महत्व और बढ़ गया है।

 

वरलक्ष्मी व्रत 2026 की तारीख


This may contain: an arrangement of flowers and candles on a table in front of a shrine with buddha statues

हिंदू पंचांग में सावन का आखिरी शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को है। इसी दिन वरलक्ष्मी व्रत रखा जाएगा और इसी दिन सावन महीने का समापन भी होगा। इस दिन मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है।

 

 

शुभ मुहूर्त

वरलक्ष्मी व्रत के दिन मां लक्ष्मी की पूजा स्थिर लग्न में करना शुभ माना जाता है। इस दिन पूजा के लिए चार शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी समय पूजा कर सकते हैं।

सिंह लग्न: सुबह 5:57 बजे से 7:29 बजे तक, वृश्चिक लग्न: दोपहर 12:05 बजे से 2:23 बजे तक, कुंभ लग्न: शाम 6:09 बजे से 7:37 बजे तक, वृषभ लग्न: रात 10:37 बजे से मध्यरात्रि 12:33 बजे तक

इसके अलावा, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:28 बजे से 5:12 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा।

 

 

3 खास संयोग

इस बार वरलक्ष्मी व्रत का दिन कई वजहों से खास माना जा रहा है। इसी दिन श्रावण पूर्णिमा भी है। इसके साथ ही रक्षाबंधन और साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी इसी दिन पड़ने वाला है।

श्रावण पूर्णिमा: वरलक्ष्मी व्रत वाले दिन श्रावण पूर्णिमा भी रहेगी। इस अवसर पर स्नान और दान करने की परंपरा है। इसी दिन श्रावणी उपाकर्म भी किया जाता है। इसमें नया जनेऊ धारण करने, वेदों के अध्ययन का संकल्प लेने और ऋषियों का तर्पण करने जैसी परंपराएं शामिल हैं।

रक्षाबंधन: इस दिन भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन भी मनाया जाएगा। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी और भाई उनकी रक्षा का वचन देंगे। इस तरह एक ही दिन धार्मिक पूजा के साथ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार भी रहेगा।

चंद्र ग्रहण: वरलक्ष्मी व्रत वाले दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका असर वरलक्ष्मी व्रत और इससे जुड़े त्योहारों पर नहीं माना जाएगा।

 

 

व्रत का महत्व

वरलक्ष्मी व्रत को मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर माता वरलक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव बना रहता है। मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां दूर होने की मान्यता भी है।

 

कई लोग इस व्रत को दीपावली की लक्ष्मी पूजा के समान महत्वपूर्ण मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत करने से सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी संतान की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिल सकता है। इसे अष्टलक्ष्मी की कृपा पाने वाला व्रत भी माना जाता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।