अब दिमाग से कंट्रोल कर सकेंगे iPhone, Apple ला रहा ये धांसू Technology

pple अपने यूजर्स के लिए एक नई तकनीक लेकर आ रहा है जहां इंसान अपने iPhone को दिमाग के जरिए चला सकेंगे। यानी बिना हाथ लगाए, केवल सोचकर ही मोबाइल चलाना संभव हो जाएगा। बता दें कि Apple की इस नई टेक्नोलॉजी का नाम है Brain-Computer Interface (BCI)। जो दिमाग और मशीन के बीच सीधा संपर्क साधेगा

अपडेटेड Jul 22, 2025 पर 1:20 PM
Apple की नई टेक्नोलॉजी, दिमाग से कंट्रोल होगा आईफोन

Apple iPhone: Apple अपने यूजर्स के लिए एक नई तकनीक लेकर आ रहा है जहां इंसान अपने iPhone को दिमाग के जरिए चला सकेंगे। यानी बिना हाथ लगाए, केवल सोचकर ही मोबाइल चलाना संभव हो जाएगा। बता दें कि Apple की इस नई टेक्नोलॉजी का नाम है Brain-Computer Interface (BCI), जो दिमाग और मशीन के बीच सीधा संपर्क साधेगा। अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह तकनीक एलन मस्क की Neuralink जैसी है जिसमें मस्तिष्क में इम्प्लांट लगाकर डिवाइस को नियंत्रित किया जाता है। Apple इस दिशा में न्यूयॉर्क की ब्रेन-इंटरफेस कंपनी Synchron के साथ मिलकर काम कर रहा है।

अच्छी बात यह है कि ये टेक्नोलॉजी उन लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकती है, जो रीढ़ की गंभीर चोटों, ALS बीमारी या स्ट्रोक से पीड़ित हैं और जिनकी शारीरिक गतिविधियां सीमित हो चुकी हैं।

कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी?


Synchron द्वारा बनाई गई यह Stentrode नाम की डिवाइस को इंसान के दिमाग के पास एक नस में लगाया जाता है। वहां से यह दिमाग के संकेतों को पकड़ती है और उन्हें डिजिटल कमांड में बदल देती है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई यूजर सोचता है कि उसे स्क्रीन पर कोई ऐप खोलनी है, तो यह डिवाइस उस सोच को पहचानकर iPhone या iPad में वह ऐप खोल देगी। इस प्रक्रिया में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों का इस्तेमाल होता है।

बता दें कि Synchron का Stentrode डिवाइस Apple के 'स्विच कंट्रोल' फीचर के साथ काम करती है। यह फीचर यूजर को अपने डिवाइस को अलग-अलग तरीकों से नियंत्रित करने की सुविधा देता है।

Synchron के CEO टॉम ऑक्सले के अनुसार, अभी तक कंपनियों को कंप्यूटर को यह 'धोखा' देना पड़ता था कि मस्तिष्क से आने वाले सिग्नल एक माउस के हैं। लेकिन Apple का नया स्टैंडर्ड, जो इसी साल लॉन्च हो सकता है, डिवाइस को सीधे ब्रेन-इम्प्लांट से जोड़ने की सुविधा देगा।

पहले यूजर की कहानी

ALS से पीड़ित मार्क जैक्सन नामक व्यक्ति Synchron का यह डिवाइस पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं। वह Vision Pro हेडसेट और iPhone को सीधे दिमाग से नियंत्रित करते हैं। चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद वह एपल डिवाइस का उपयोग कर पा रहे हैं।

बता दें कि Apple जल्द ही एक नया सॉफ्टवेयर टूल भी लॉन्च करने जा रहा है, जिससे ऐप बनाने वाले डेवलपर्स अपने ऐप्स को इस ब्रेन टेक्नोलॉजी से जोड़ सकेंगे।

Neuralink से मुकाबला

Elon Musk की कंपनी Neuralink इस टेक्नोलॉजी में पहले से आगे है। वह अपने ब्रेन-इम्प्लांट डिवाइस N1 को इंसानों में ट्रायल कर चुकी है। इसका सिस्टम Synchron से अधिक उन्नत है जहां Synchron में 16 इलेक्ट्रोड्स होते हैं, वहीं Neuralink के डिवाइस में 1,000 से ज्यादा हैं।

भविष्य की उम्मीद

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में करीब 1.5 लाख लोग जिनके ऊपरी अंग काम नहीं करते, इस तकनीक के शुरुआती यूजर बन सकते हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक यह तकनीक कॉमर्शियल रूप से उपलब्ध हो सकती है, लेकिन Synchron के CEO का मानना है कि यह इससे पहले भी संभव है। यह तकनीक न सिर्फ दुनिया में क्रांति ला सकती है बल्कि लाखों जिंदगियों को भी सकती है।

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