Spam Messages: दिन भर में आपको कई ऐसे मैसेज आते होंगे जिनका आपसे कोई वास्ता तक नहीं होता होगा। कई मैसेज ऐसे आते है जिनमें ऐसे लिंक भी होते है जिन पर क्लिक करते ही आपका फोन हैक भी हो सकता है। मोबाइल यूजर्स की इसी परेशानी को दूर करने के लिए अब एक नया सिस्टम लागू किया गया है जिससे स्पैम और जरूरी SMS की पहचान करना काफी आसान हो जाएगा।
सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने मंगलवार को ये जानकारी दी है कि टेलीकॉम ऑपरेटरों ने SMS हेडर में नए सफिक्स (अक्षर) जोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे मैसेज भेजने वाले की पहचान और उसके नेचर प्रकृति को समझने में आसानी होगी।
नए सफिक्स सिस्टम से बढ़ेगी ट्रांसपेरेंसी
COAI के महानिदेशक एस.पी. कोचर ने बताया कि सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर प्रमोशनल मैसेज के लिए शुरुआत में 'P', सर्विस-रिलेटेड मैसेज के लिए 'S', ट्रांजैक्शनल के लिए 'T' और गवर्नमेंट से जुड़े मैसेज के लिए 'G' सफिक्स लगाने का सिस्टम लागू किए है। यह कदम 12 फरवरी, 2025 से प्रभावी संशोधित टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन (TCCCPR) के तहत उठाया गया है।
कोचर ने बताया, 'इससे ट्रांसपेरेंसी और उपभोक्ता संरक्षण मजबूत हुआ है। ग्राहक अब तुरंत पहचान सकते हैं कि कौन सा मैसेज प्रमोशनल है, कौन सा सर्विस से संबंधित है, और कौन सा ट्रांजैक्शनल या सरकारी है। इससे स्पैम में काफी कमी आएगी और धोखाधड़ी को भी रोका जा सकेगा।'
वॉट्सऐप, टेलीग्राम जैसे ऐप्स से बढ़ते स्पैम को लेकर चिंता बरकरार
हालांकि, कोचर ने वॉट्सऐप, टेलीग्राम जैसे OTT (ओवर-द-टॉप) मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से बढ़ते स्पैम और धोखाधड़ी वाले मैसेज पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'कोई भी स्पैम कंट्रोल उपाय पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सकता जब तक कि पूरे कम्युनिकेशन इकोसिस्टम को रेगुलेट न किया जाए।' उनका मानना है कि इन अनियंत्रित OTT प्लेटफॉर्म्स का उपयोग स्पैमर्स द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
बता दें कि यह नया कदम मोबाइल यूजर्स को गैरजरूरी और धोखाधड़ी वाले मैसेज से बचाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हालांकि OTT प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।