गंगा एक्सप्रेसवे के टोल पर बना ‘फिशिंग स्पॉट’, पानी में जाल डालते ग्रामीणों का VIDEO देख रह जाएंगे दंग

उत्तर प्रदेश में बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे का सोनिक टोल गेट अचानक चर्चा में आ गया। यहां सड़क पर जमा पानी में ग्रामीण जाल लेकर मछली पकड़ते दिखे, जिसका वीडियो वायरल हो गया। तीन दिनों की लगातार बारिश से कई जिले जलमग्न हैं। अब इस दृश्य ने एक्सप्रेसवे की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है

अपडेटेड Sep 28, 2026 पर 9:49 AM
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गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाता है। करीब 36,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है

उत्तर प्रदेश में तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे के सोनिक टोल गेट के पास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में कुछ ग्रामीण टोल गेट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की ओर जाने वाली सर्विस रोड के आसपास जमा पानी में उतरकर जाल से मछली पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। आमतौर पर जहां वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां पानी में जाल लेकर खड़े ग्रामीणों का यह अनोखा दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

पानी में फंसी रफ्तार, ग्रामीणों ने तलाश लिया अपना मौका

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक रविवार दोपहर बारिश और जलभराव के कारण इंटरचेंज और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। आसपास काफी मात्रा में पानी जमा था और कुछ इलाकों में पानी घुटनों तक पहुंच गया। इसी पानी में ग्रामीण मछली पकड़ते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे की जलनिकासी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे।


मेरठ से प्रयागराज तक फैला है एक्सप्रेसवे

गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाता है। करीब 36,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट को यात्रा का समय घटाकर लगभग छह से सात घंटे करने वाले महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे के तौर पर पेश किया गया है। ऐसे में मानसून के दौरान इसके कुछ हिस्सों में जलभराव की तस्वीरें सामने आने से प्रोजेक्ट की बारिश से निपटने की क्षमता पर चर्चा शुरू हो गई है।

किसी ने ‘फिशिंग टोल’ बनाया, तो किसी ने बारिश को बताया वजह

वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। एक यूजर ने कथित तौर पर AI से तैयार ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें टोल बोर्ड पर 500 रुपये प्रति घंटे में मछली पकड़ने की छड़ी और जाल मिलने का मजाकिया संदेश दिखाया गया।

वहीं, @aapkamanoj नाम के यूजर ने इस दृश्य को मुश्किल हालात में स्थानीय लोगों द्वारा अवसर तलाशने से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, प्रोजेक्ट का बचाव करने वाले यूजर्स ने कहा कि कानपुर-लखनऊ क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण नदियां और तालाब उफान पर हैं, जिससे एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में पानी आना असामान्य नहीं है।

@ArsimRohan ने भी लगातार बारिश को जलभराव की वजह बताया, जबकि @Radio_India_ ने बाढ़ जैसे हालात को क्लाउडबर्स्ट और चक्रवाती हवाओं से जोड़ने का दावा किया। इन सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बारिश ने पूरे यूपी में छोड़ा भारी असर

सोनिक टोल का वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश के कई जिले लगातार बारिश और जलभराव से जूझ रहे हैं। यूपी राहत आयुक्त कार्यालय की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, 25 और 26 सितंबर को हुई लगातार बारिश में कम से कम 56 लोगों की मौत हुई और 46 लोग घायल हुए।

सीतापुर में सबसे ज्यादा सात मौतें दर्ज की गईं। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच, जबकि अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार मौतें हुईं। घायलों की संख्या के मामले में हरदोई सात मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि मैनपुरी और श्रावस्ती में पांच-पांच लोग घायल हुए।

1,000 से ज्यादा मकानों को नुकसान

रिपोर्ट में 107 पशुओं की मौत और 1,021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई। इनमें हरदोई के 272 और सीतापुर के 108 मकान शामिल हैं। प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का आकलन अभी जारी था और प्रभावित इलाकों में राहत, बचाव और नुकसान का जायजा लेने का काम चल रहा था।

48 घंटे में सामान्य से 775% ज्यादा बारिश

बारिश की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 48 घंटे में उत्तर प्रदेश में औसतन 66.5 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 7.6 मिमी है। रिपोर्ट के अनुसार यह सामान्य से 775 फीसदी अधिक थी। राज्य के 75 में से 56 जिलों में ‘लार्ज एक्सेस’ बारिश दर्ज की गई।

फर्रुखाबाद में बारिश सामान्य से 7,385 फीसदी अधिक रही। इसके बाद कन्नौज में 5,664 फीसदी और शाहजहांपुर में 4,408 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।

मछली पकड़ते ग्रामीणों के वीडियो से बड़ा सवाल

वायरल वीडियो देखने में भले ही हास्य पैदा करता हो, लेकिन इसके पीछे बारिश और जलनिकासी से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। गंगा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त होने और जलभराव को लेकर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है।

अब सोनिक टोल गेट का यह दृश्य उसी बहस को फिर सामने ले आया है क्या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ऐसी अत्यधिक बारिश के हालात के लिए पर्याप्त रूप से तैयार किया गया है? टोल गेट पर पानी आखिर किस वजह से जमा हुआ और इसे निकालने की व्यवस्था क्या है, इस पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक स्पष्टीकरण अहम होगा।

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