Gold Mining: 20 मीट्रिक टन सोना...भारत की किस्मत बदलने वाला है ये राज्य, जल्द शुरू होगी गोल्ड माइनिंग

Gold Mining: ओडिशा के कई जिलों जैसे देवगढ़ (अदासा-रामपल्ली), सुंदरगढ़, नबरंगपुर, क्योंझर, अंगुल और कोरापुट में सोने के भंडार मिलने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं मयूरभंज, मलकानगिरी, संबलपुर और बौध में अभी खोज का काम जारी है

अपडेटेड Aug 17, 2025 पर 4:44 PM
इस राज्य में मिला भारत का सबसे बड़ा सोने का भंडार

Gold Mining:  विदेशियों से लेकर भारतीयों तक, सोना किसको पसंद नहीं है। एकतरफ सोने को हमेशा से भरोसेमंद संपत्ति के रूप में देखा जाता है, तो दूसरी तरफ देश की तरक्की भी इस कीमती धातू पर भी करती है। हाल ही में भारत में सोने को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ओडिशा में सोने का भंडार मिला है। वैज्ञानिकों ने राज्य में सोने के बड़े भंडार का पता लगाया हैहाल ही में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने अपनी खोज में इन क्षेत्रों की पहचान की, जिससे अब खनन और नीलामी की योजनाओं को लेकर तेजी से रुचि बढ़ रही है।

ओडिशा के कई जिलों जैसे देवगढ़ (अदासा-रामपल्ली), सुंदरगढ़, नबरंगपुर, क्योंझर, अंगुल और कोरापुट में सोने के भंडार मिलने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं मयूरभंज, मलकानगिरी, संबलपुर और बौध में अभी खोज का काम जारी है। यह जानकारी मार्च 2025 में तब सामने आई जब राज्य के खान मंत्री विभूति भूषण जेना ने विधानसभा में इन निष्कर्षों की पुष्टि की। अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन भूवैज्ञानिक संकेतों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा में 10 से 20 मीट्रिक टन तक सोना हो सकता है। यह मात्रा काफी अहम मानी जा रही है, हालांकि भारत की कुल सोने की मांग के मुकाबले यह अब भी कम है।

ओडिशा सरकार, ओएमसी और GSI मिलकर इन सोने की खोजों को व्यावसायिक रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। देवगढ़ में पहले सोना खनन ब्लॉक की नीलामी की तैयारी की जा रही है, जो राज्य के खनन क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं GSI अब अदासा-रामपल्ली और गोपुर-गाजीपुर जैसे इलाकों में शुरुआती सर्वे (G3) से आगे बढ़कर गहराई से जांच (G2) कर रहा है, ताकि इन क्षेत्रों में सोने के भंडार की सही पुष्टि हो सके।

ओडिशा सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. वे देवगढ़ में अपने पहले सोने के खनन ब्लॉक की नीलामी करने की तैयारी कर रहे हैं. यह कदम राज्य के खनिज क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाएगा. सरकार की यह पहल निजी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करेगी.

भारत में सोने का प्रोडेक्शन और आयात


  • पिछले साल भारत ने लगभग 700 से 800 मीट्रिक टन सोना आयात किया था।
  • देश में सोने का घरेलू उत्पादन बहुत कम है। साल 2020 तक भारत में हर साल केवल 1.6 टन सोना ही निकाला जा रहा था।
  • हालाँकि ओडिशा में हाल ही में हुई सोने की खोज से भारत के कुल सोने के भंडार में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह घरेलू खनन को बढ़ावा दे सकती है और आर्थिक विविधता लाने की दिशा में एक नया कदम साबित हो सकती है।

भारत पर कितना पड़ेगा आर्थिक असर

  • अगर ओडिशा में मिले सोने की खान की पुष्टि हो जाती है और इन्हें खनन योग्य बनाया जाता है, तो यह क्षेत्रीय विकास को तेजी दे सकता है।
  • इससे बुनियादी ढांचे में निवेश, रोज़गार, खनन, परिवहन और स्थानीय सेवाओं के नए अवसर पैदा होंगे। सोने का घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता थोड़ी कम हो सकती है, हालांकि इसके पैमाने से बहुत बड़ा बदलाव संभव नहीं है।
  • साथ ही, यह खोज ओडिशा के खनिज निर्यात में विविधता लाएगी और भारत के खनन क्षेत्र में राज्य की स्थिति और मजबूत करेगी। पहले से ही ओडिशा के पास भारत के 96% क्रोमाइट, 52% बॉक्साइट और 33% लौह अयस्क के भंडार मौजूद हैं।

ओडिशा में मिले सोने के भंडार को लेकर अब कुछ जरूरी कदम उठाए जाएंगे:

  • सबसे पहले अयस्क की गुणवत्ता और सोना निकालने की क्षमता तय करने के लिए अन्वेषण और लैब टेस्ट पूरे किए जाएंगे।
  • इसके बाद तकनीकी समितियां बनाई जाएंगी, जो यह देखेंगी कि खनन आर्थिक रूप से कितना फायदेमंद हो सकता है।
  • फिर खनन ब्लॉक की नीलामी की जाएगी, जो संभवतः एमएमडीआर अधिनियम के नियमों के तहत होगी।
  • साथ ही, पर्यावरण और सामाजिक असर का आकलन भी किया जाएगा।
  • अंत में, खनन कार्य शुरू करने के लिए बुनियादी ढाँचे जैसे सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था की जाएगी।

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