हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में कैस्पियन कोबरा के काटने से हुई दो मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, 2020 और 2021 में इस सांप के डंक से दो लोगों की जान गई थी। शोधकर्ताओं ने इन घटनाओं को भारत में कैस्पियन कोबरा के काटने से हुई पहली दर्ज मानव मौतें बताया है। इनमें एक व्यक्ति की हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि करीब 30 मिनट में उसकी मौत हो गई, जबकि दूसरे ने 72 घंटे तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया। इस रिपोर्ट ने सांप के जहर और मौजूदा इलाज की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति को सांप ने काटा और उसकी हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि करीब 30 मिनट के अंदर उसकी मौत हो गई। दूसरे पीड़ित ने करीब 72 घंटे तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस सांप के जहर का असर दिल और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
चंबा में 2019 में दिखा था कैस्पियन कोबरा
कैस्पियन कोबरा मुख्य रूप से मध्य एशिया में पाया जाता है। पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ इलाकों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। चंबा जिले के तीसा इलाके में इसकी पहचान पहली बार 2019 में हुई थी। इसके बाद इस इलाके में इस सांप को लेकर वन विभाग और सांप बचाव दलों की नजर भी बनी हुई है। स्थानीय लोगों के लिए इसकी मौजूदगी इसलिए चिंता की बात है क्योंकि वे खेतों, बगीचों और जंगलों के आसपास अक्सर काम करते हैं।
इस मामले ने सांप के काटने के इलाज को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। भारत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला एंटी-स्नेक वेनम देश के चार प्रमुख जहरीले सांपों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इनमें स्पेक्टेकल्ड कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन क्रेट और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि कैस्पियन कोबरा के जहर के खिलाफ मौजूदा एंटी-स्नेक वेनम कितना असरदार है, इस पर और रिसर्च की जरूरत है।
अध्ययन में ऐसे दो लोगों का भी जिक्र है, जो कैस्पियन कोबरा के काटने के बाद बच गए। इनमें से एक मामले में 'मिर्चाड़ी' नाम के पौधे से तैयार पारंपरिक उपचार का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि,शोधकर्ताओं ने इसकी प्रभावशीलता को लेकर कोई पुख्ता निष्कर्ष नहीं दिया है। ऐसे घरेलू या पारंपरिक उपायों को वैज्ञानिक इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता।
सांप काटे तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
इस पूरी घटना से सबसे जरूरी बात यही सामने आती है कि सांप के काटने के बाद समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी स्थिति को गंभीर बना सकती है।