जिस गधे को पाकिस्तान के गांवों में आज भी मेहनतकश साथी के तौर पर देखा जाता है, वही अब एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार का हिस्सा बन गया है, जिसकी डोर चीन से जुड़ी है। बलूचिस्तान के ग्वादर में शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे इतना बड़ा रूप ले रहा है कि आने वाले समय में यहां रोजाना सैकड़ों गधों की प्रोसेसिंग की जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी का सबसे अहम किरदार गधे का मांस नहीं, बल्कि उसकी खाल है। चीन में इसकी मांग ने एक ऐसे बाजार को जन्म दिया है, जिसने पाकिस्तान के गधों की कीमत और भूमिका दोनों बदल दी है।
अब सवाल यह है कि आखिर चीन को गधे की खाल की इतनी जरूरत क्यों पड़ रही है? इसके पीछे कौन-सा उद्योग है और पाकिस्तान इस बढ़ती मांग को अपने लिए कमाई के मौके के तौर पर कैसे देख रहा है? इस पूरी कहानी में ग्वादर से लेकर चीन तक कई दिलचस्प कड़ियां जुड़ी हैं।
गधे की खाल से बनता है ‘एजियाओ’
गधे की खाल चीन के पारंपरिक औषधीय उद्योग में बेहद अहम मानी जाती है। इससे एजियाओ (Ejiao) नाम का जिलेटिन तैयार किया जाता है। गधे की खाल को उबालकर उसमें मौजूद कोलेजन निकाला जाता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी चिकित्सा के साथ-साथ कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट में भी होता है। चीन में एजियाओ की मांग बढ़ी तो वहां गधों की संख्या पर दबाव बढ़ने लगा। घरेलू आपूर्ति घटने के बाद चीनी खरीदारों ने दूसरे देशों में गधों और उनकी खाल के स्रोत तलाशने शुरू कर दिए।
अफ्रीका के बाद पाकिस्तान पर नजर
अफ्रीकी देश लंबे समय तक चीन के लिए गधे की खाल के महत्वपूर्ण स्रोत रहे। लेकिन गधों के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच 2024 में अफ्रीकी संघ ने पूरे महाद्वीप में गधों को मारने और उनकी खाल के व्यापार पर रोक का समर्थन किया। इसके बाद पाकिस्तान समेत ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश चीन की नजर में आए। पाकिस्तान में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 60 लाख से ज्यादा गधे हैं। सरकार चीन की मांग को विदेशी मुद्रा कमाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार पैदा करने के अवसर के तौर पर देख रही है।
ग्वादर बना नए कारोबार का केंद्र
ग्वादर के पास Hangeng GrouPakistan,p का प्रोसेसिंग प्लांट इस कारोबार का केंद्र है। कंपनी ने पाकिस्तान में करीब 5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है और लगभग 500 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है। उसके साथ नौ चीनी मैनेजर भी काम कर रहे हैं। सरकार ने इस व्यापार को घरेलू खाद्य बाजार से अलग रखने की व्यवस्था की है। शुरुआती सरकारी योजनाओं के अनुसार, प्रोसेसिंग यूनिट्स को ग्वादर फ्री जोन तक सीमित रखने और गधों की संख्या बनाए रखने के लिए प्रजनन फार्म विकसित करने की बात कही गई थी।
चीन पहुंच चुकी है पहली खेप
यह कारोबार अब केवल योजना नहीं रहा। पाकिस्तान से गधे के मांस की पहली खेप जुलाई में ग्वादर फ्री जोन से चीन के तियानजिन पोर्ट पहुंच चुकी है। इससे पहले जमे हुए मांस और खाल की खेपें भी चीन भेजी गई थीं, जिनकी कीमत करीब 1.95 लाख डॉलर बताई गई। कंपनी के सीईओ एंडी लियाओ के अनुसार, कारोबार छह महीने में करीब 50 लाख डॉलर प्रति माह की विदेशी मुद्रा आय हो सकती है। दो साल में यह आंकड़ा 70 लाख डॉलर प्रति माह तक पहुंचने की उम्मीद है।