Digital India के दौर में आधार की गलती बनी आफत, बेटी का PAN कार्ड बनवाने में पिता परेशान!

पुणे के फाउंडर ने बताया कि उनकी बेटी के आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत थी। इसे ठीक कराने के लिए उनसे नया फॉर्मेट वाला जन्म प्रमाण पत्र मांगा गया। लेकिन दफ्तर में आवेदन फॉर्म नहीं थे। उन्हें दीवार पर लगे फॉर्म की फोटो खींचकर, बाहर से उसका प्रिंट निकलवाने और भरकर लाने को कहा गया।

अपडेटेड Oct 29, 2026 पर 2:15 PM
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पुणे में बेटी का PAN कार्ड बनवाने के लिए जन्मतिथि ठीक कराना एक शख्स के लिए मुश्किल काम बन गया।

Pune: सरकारी काम ऑनलाइन होने के बावजूद कई बार छोटी-सी गलती ठीक कराने में भी काफी परेशानी होती है। पुणे के संदीप कुलकर्णी के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह अपनी 18 साल की बेटी का PAN कार्ड बनवाना चाहते थे, लेकिन आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत होने के कारण उनका काम रुक गया। उन्होंने LinkedIn पर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया, जिसके बाद इस मामले पर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई।

संदीप के मुताबिक, बेटी की जन्मतिथि ठीक कराने के लिए अधिकारियों ने 2019 के बाद वाले फॉर्मेट में बना जन्म प्रमाण पत्र मांगा। जब वे इसे बनवाने के लिए दफ्तर पहुंचे, तो वहां आवेदन फॉर्म नहीं मिले। दीवार पर फॉर्म की एक फोटो लगी थी। परिवार को उसकी फोटो खींचकर स्टेशनरी की दुकान से प्रिंट निकलवाने और फिर उसे भरकर लाने को कहा गया। संदीप ने बताया कि दुकान ढूंढने में ही उन्हें करीब 20 मिनट लग गए।

बर्थ सर्टिफिकेट की इस गड़बड़ी से आयी दिक्कत


कुलकर्णी ने बताया कि उनकी बेटी के पुराने जन्म प्रमाण पत्र पर लगा स्टाम्प रजिस्ट्रेशन नंबर के कुछ हिस्से को ढक रहा था। इस वजह से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। पहले अधिकारियों ने कुछ दिन बाद आने को कहा, लेकिन बाद में एक कर्मचारी ने नंबर ढूंढने में मदद की।

इसके बावजूद परिवार को नया जन्म प्रमाण पत्र तुरंत नहीं मिल सका। उन्हें बताया गया कि इसे मिलने में दो से तीन महीने लग सकते हैं, क्योंकि इसके लिए कई सरकारी विभागों से मंजूरी लेनी होगी।

डिजिटल सर्विस के बावजूद लगाने पड़े दफ्तरों के चक्कर

कुलकर्णी ने अपनी पोस्ट में सरकारी कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब देश में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब भी जन्मतिथि जैसी गलती ठीक कराने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बेटी का PAN कार्ड बनवाने के लिए जन्मतिथि ठीक कराना ही लंबी प्रक्रिया बन गया।

सोशल मीडिया पर परिवार और सरकारी व्यवस्था पर उठा सवाल:

• पहले गलती क्यों नहीं पकड़ी गई? कुछ यूजर्स ने सवाल किया कि बेटी के स्कूल और 10वीं के सर्टिफिकेट में जन्मतिथि क्या दर्ज थी।

• परिवार की भी जिम्मेदारी: कुछ लोगों का कहना था कि आधार कार्ड में गलती का पता चलते ही उसे ठीक करा लेना चाहिए था।

• आसान हो सुधार की प्रक्रिया: कुछ यूजर्स ने कहा कि जरूरी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए, लेकिन उनमें गलती सुधारने का तरीका भी आसान होना चाहिए।

इस मामले ने एक बार फिर सरकारी सेवाओं को आसान और तेज बनाने की जरूरत पर चर्चा छेड़ दी है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि लोग अपने जरूरी दस्तावेजों की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें, ताकि आगे चलकर ऐसी परेशानियों से बचा जा सके।

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