सद्गुरु कहते है कि हमारी खुशी का पूरा कंट्रोल बाहर की सिचुएशन के हाथ में है नहीं होता है, उनकी सीख इसी सोच को एक अलग नजरिए से देखने की बात करती है। उनके मुताबिक बाहर की दुनिया हमेशा हमारे हिसाब से नहीं चल सकती, लेकिन उसके बीच हमारा मन कैसा रहे, इसे समझना और संभालना हमारे हाथ में हो सकता है। यही सोच इंसान को मुश्किल हालातों में भी अपने भीतर शांति और बैलेंस बनाए रखने में मदद कर सकती है।
