सरकारी नौकरी को अक्सर सुरक्षित भविष्य, अच्छी सैलरी और स्थिर जिंदगी की गारंटी माना जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति एक सुरक्षित बैंकिंग करियर छोड़कर अपना काम शुरू करने का फैसला करे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश के मेरठ की स्निग्धा बोस ने कुछ ऐसा ही फैसला लिया। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना योग स्टूडियो शुरू किया।
आज स्निग्धा Tulaa Wellness Studio की संस्थापक हैं। हालांकि उनके लिए यह फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था, बल्कि लंबे समय से महसूस हो रहे तनाव और मानसिक थकान का नतीजा था।
अच्छी नौकरी थी, लेकिन मन परेशान था
SBI में स्निग्धा के पास स्थिर नौकरी, अच्छी सैलरी और सुरक्षित करियर था। बाहर से देखने पर उनकी जिंदगी बिल्कुल व्यवस्थित नजर आती थी। लेकिन अंदर ही अंदर काम का दबाव उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रहा था। वह बताती हैं कि लगातार काम के दबाव के बीच उन्हें अक्सर सिरदर्द रहता था। हालत यहां तक पहुंच गई कि वह लगभग रोज दर्द की दवाइयां लेने लगी थीं। स्निग्धा के लिए सबसे मुश्किल बात यह थी कि नौकरी सुरक्षित होने के बावजूद उन्हें उस जिंदगी में खुशी और संतुष्टि महसूस नहीं हो रही थी।
‘लोग कहेंगे नौकरी क्यों छोड़ी?’
असिस्टेंट मैनेजर जैसी पोस्ट छोड़ना उनके लिए आसान फैसला नहीं था। वह जानती थीं कि लोग उनकी पसंद पर सवाल करेंगे। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनके पास SBI की एक सुरक्षित नौकरी थी, अच्छी सैलरी थी और ऐसा करियर था जिसे आमतौर पर लोग छोड़ने की सलाह नहीं देते। लेकिन स्निग्धा ने महसूस किया कि सिर्फ नौकरी की सुरक्षा के लिए ऐसी जिंदगी जीना, जिसमें उनका स्वास्थ्य और मानसिक शांति लगातार प्रभावित हो रही हो, उनके लिए सही नहीं था।
रोज का तनाव बना बदलाव की वजह
स्निग्धा के मुताबिक, लंबे समय तक बैठकर काम करना, लगातार तनाव और मानसिक थकान धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का सामान्य हिस्सा बन गए थे। वह अपने शरीर और सेहत पर ध्यान देने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं निकाल पा रही थीं। आखिरकार उन्होंने खुद से एक बड़ा सवाल किया अगर जिंदगी में सुकून ही नहीं है तो सिर्फ नौकरी की सुरक्षा किस काम की? यही सोच उनके फैसले की वजह बनी। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और योग को अपने नए सफर का आधार बनाया।
अब दूसरों को भी दे रही हैं सेहत का संदेश
हालांकि स्निग्धा यह नहीं कहतीं कि हर किसी को नौकरी छोड़ देनी चाहिए। उनका कहना है कि व्यस्त और तनावपूर्ण नौकरी के बीच भी लोग अपने शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय निकाल सकते हैं। उनके मुताबिक, योग और एक्सरसाइज के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी में ताकत, लचीलापन और मानसिक शांति लाई जा सकती है, इसके लिए जरूरी नहीं कि कोई अपनी पूरी जिंदगी बदल दे।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘काश हम भी कर पाते’
स्निग्धा की कहानी सोशल मीडिया पर सामने आई तो कई लोगों ने उनके फैसले की सराहना की। किसी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दीं, तो किसी ने कहा कि वह भी कभी ऐसा कदम उठाना चाहते हैं। एक यूजर ने लिखा कि उन्हें भी ऐसा करने की इच्छा है, जबकि दूसरे ने कहा कि वह रोज SBI की नौकरी छोड़ने के बारे में सोचते हैं, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाते। कुछ लोगों ने अपने डर भी साझा किए नौकरी छोड़ने के बाद क्या होगा, भविष्य कैसे चलेगा और आर्थिक सुरक्षा का क्या होगा।
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)