‘AI इंसानों के कंट्रोल में रहे’... व्हाइट हाउस में ट्रंप के सामने शी जिनपिंग का बड़ा संदेश
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI के क्षेत्र में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि यह टेक्नोलॉजी इंसानों के कंट्रोल में रहे।
‘AI इंसानों के कंट्रोल में रहे’... व्हाइट हाउस में ट्रंप के सामने शी जिनपिंग का बड़ा संदेश
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI के क्षेत्र में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि यह टेक्नोलॉजी इंसानों के कंट्रोल में रहे और इसका इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए हो।
गुरुवार को व्हाइट हाउस में अपनी बात रखते हुए शी ने कहा, "चीन और अमेरिका, दोनों ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी देश हैं। हमारे पास AI को अच्छे कामों के लिए विकसित और मैनेज करने की क्षमता और जिम्मेदारी दोनों हैं। साथ ही, हमें यह भी पक्का करना होगा कि AI का विकास हमेशा इंसानों के कंट्रोल में रहे और इससे लोगों का भला हो।"
उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब हालिया US-चीन बातचीत में व्यापार, टेक्नोलॉजी, ताइवान और सुरक्षा से जुड़ी व्यापक चिंताओं के साथ-साथ AI भी एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। हालांकि, दोनों नेताओं में से किसी ने भी अपनी सार्वजनिक बातचीत के दौरान AI से जुड़ा कोई नया समझौता या इस टेक्नोलॉजी को रेगुलेट करने के लिए कोई खास फ्रेमवर्क घोषित नहीं किया।
मीटिंग से पहले ट्रंप का जो रुख था, उससे शी की बातें अलग थीं। ट्रंप ने कहा था कि "सुपर इंटेलिजेंस" चर्चा का एक अहम विषय होगा, लेकिन वह "इसे वैसा ही रहने देना" चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा: "चीन का भी यही रुख है। हमारा गार्डरेल DOJ (अमेरिकी न्याय विभाग) है!"
यह मुद्दा इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि अमेरिकी और चीनी कंपनियां ज्यादा काबिल AI सिस्टम बनाने की होड़ में लगी हैं। समिट से कुछ दिन पहले ही, अमेरिका के टेक्नोलॉजी लीडर्स ने AI सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की मांग की थी, जबकि वॉशिंगटन और बीजिंग ने AI से जुड़ी संभावित गंभीर घटनाओं के बारे में बातचीत करने के तरीकों पर चर्चा शुरू कर दी थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि वॉशिंगटन ने दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी AI घटनाओं के लिए एक नोटिफिकेशन सिस्टम का प्रस्ताव दिया था।
बातचीत में AI, व्यापार और वैश्विक तनाव जैसे मुद्दे शामिल रहे
AI पर हुई यह चर्चा, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच लगातार जटिल होते रिश्तों को संभालने की ट्रंप और शी की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा थी।
शी ने राजनीतिक और आर्थिक प्रणालियों में अंतर के बावजूद बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया।
शी ने कहा, "चीन और अमेरिका के हालात अलग-अलग हैं, लेकिन खुलकर, गहराई से और लगातार बातचीत के जरिए हमारे दोनों देश एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, मतभेदों को दरकिनार कर आपसी सहमति के बिंदु तलाश सकते हैं और आपसी भरोसा कायम कर सकते हैं।"
उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक निर्भरता पर भी जोर देते हुए कहा, "चीन और अमेरिका के हित आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "चीन-अमेरिका सहयोग से शायद दुनिया की हर समस्या का समाधान न हो, लेकिन हमारे सहयोग के बिना दुनिया की कई समस्याओं को हल करना मुश्किल होगा।"
इस बीच, ट्रंप ने अपनी राजकीय यात्रा के दौरान शी जिनपिंग के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों पर बार-बार जोर दिया। व्हाइट हाउस में ट्रंप ने दोनों नेताओं के रिश्ते को “सच्ची और मजबूत दोस्ती” बताया, जो “आपसी सम्मान और दोनों देशों के लोगों के महत्वपूर्ण हितों” पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों ने व्यापार और बाजार तक पहुंच के मामले में प्रगति की है।
बता दें कि यह शिखर सम्मेलन एक दशक से भी ज्यादा समय में वाशिंगटन की शी की पहली राजकीय यात्रा है और इस साल दोनों नेताओं के बीच दूसरी मुलाकात है। यह यात्रा टैरिफ, जरूरी खनिजों, टेक्नोलॉजी पर पाबंदियों और ताइवान को लेकर महीनों तक चले तनाव के बाद हो रही है, जबकि वाशिंगटन और बीजिंग ने व्यापारिक युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है।
AI की दुनिया के बड़े नाम हुए शामिल
गुरुवार रात व्हाइट हाउस में हुए स्टेट डिनर में भी कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला जारी रहा। मेहमानों की लिस्ट में अमेरिका के कई ताकतवर टेक्नोलॉजी और बिजनेस लीडर्स शामिल थे, जिनमें OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग, Google के सुंदर पिचाई, Amazon के जेफ बेजोस, एलन मस्क, माइकल डेल और Apple के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन टिम कुक शामिल थे।
यह डिनर ईस्ट रूम में आयोजित किया गया था, न कि ट्रंप के प्लान किए गए नए व्हाइट हाउस बॉलरूम में, जो अभी भी बन रहा है। खाने के मेन्यू में जान-बूझकर अमेरिकी चीजों के साथ चीनी स्वाद का मेल रखा गया था, जबकि शुरुआत में 'टोस्ट' के लिए Schramsberg “Blanc De Noir” का इस्तेमाल किया गया। यह वही अमेरिकी स्पार्कलिंग वाइन है जो 1972 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और चीन के प्रधानमंत्री झोउ एनलाई के बीच हुई ऐतिहासिक "टोस्ट टू पीस" (शांति के लिए टोस्ट) से जुड़ी थी।
डिनर के दौरान टोस्ट देते हुए ट्रंप ने सुलह और सहयोग वाला रुख अपनाया।
ट्रंप ने कहा, "हमारे दोनों देशों के नेताओं के तौर पर, राष्ट्रपति शी और मैं दोनों समझते हैं कि हम अलग-अलग सिस्टम का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन हमारे लोगों के बीच संबंध बने हुए हैं, और हमारे रिश्ते पहले से कहीं बेहतर हैं।" "हम मिलकर एक ऐसा रिश्ता बनाना जारी रख सकते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली और सुरक्षा को बढ़ावा दे।"
शी ने अपने संबोधन में कहा कि बातचीत से "कई मुद्दों पर आम सहमति" बनी है और इन चर्चाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को "नई मजबूती" और "नई रणनीतिक दिशा" दी है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को "अपने दोस्ताना रिश्तों में एक नया अध्याय" लिखना चाहिए।
एक शब्द में कहें तो, इस डिनर का मकसद साफ था; नेता सहयोग और आपसी तालमेल दिखा रहे थे, जबकि उनके बीच कई बड़े मतभेद अब भी बने हुए हैं। साथ ही, AI अब तेजी से सिर्फ एक टेक्नोलॉजी का मुद्दा न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़ा मामला बनता जा रहा है। ऐसे में, शी के संदेश ने US-चीन संबंधों के केंद्र में एक सवाल खड़ा कर दिया है: ये दोनों प्रतिद्वंद्वी AI के क्षेत्र में किस हद तक एक-दूसरे से मुकाबला कर सकते हैं, जबकि वे इस बात पर भी सहमत हैं कि कंट्रोल इंसानों के हाथ में ही रहना चाहिए?