अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ क्या किया? जानिए ऐसा वहां क्या हुआ कि बवाल इस हद तक पहुंच गया

Albania Protest: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बदहाल शिक्षा से सुलग रहे अल्बानिया में गुस्सा इस कदर फूटा कि प्रदर्शनकारियों ने सीधे सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों को ही आग के हवाले कर दिया। प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों छात्रों और नागरिकों के इस 'फ्लेमिंगो' आंदोलन ने देश को रणक्षेत्र बना दिया है। आखिर क्यों भड़का है यूरोप के इस कोने में ऐसा खौफनाक बवाल? जानिए

अपडेटेड Oct 20, 2026 पर 10:48 AM
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प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों छात्रों और नागरिकों के इस 'फ्लेमिंगो' आंदोलन ने देश को युद्ध का मैदान बना दिया है(image- X)

Albania Supreme Court Fire: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से सुलग रहे अल्बानिया में अब गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए है। राजधानी तिराना में पिछले कई दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि गुस्साई भीड़ ने सीधे देश के सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों को ही आग के हवाले कर दिया। आखिर क्यों भड़का है यूरोप के इस छोटे से देश में ऐसा जनसैलाब कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जंग छिड़ गई है? आइए आपको बताते हैं इसकी असली वजह।

क्यों भड़का इतना बड़ा बवाल?

अल्बानिया में यह प्रदर्शन 'फ्लेमिंगो' नामक नागरिक और छात्र आंदोलन के बैनर तले हो रहा है। हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सोशलिस्ट प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर हैं।


यह पूरा विवाद तब और भड़क उठा जब सरकार ने एक ऐसे क्षेत्र में बड़े लक्जरी पर्यटन विकास की अनुमति दे दी, जो फ्लेमिंगो का प्राकृतिक आवास माना जाता है। इस प्रोजेक्ट के तार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर से जुड़े होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया।

भ्रष्टाचार, शिक्षा और महंगाई की मार

अल्बानिया के युवा देश में बढ़ती बेरोजगारी, चरम पर पहुंच चुके भ्रष्टाचार, और जर्जर होती सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से निराश हैं। जनता का आरोप है कि सरकार आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।

वैसे प्रधानमंत्री एडी रामा ने इन हिंसक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को बाहरी तत्वों और वामपंथी उग्रवादी समूहों (एंटीफा) द्वारा वैचारिक रूप से कट्टर बनाया गया है।

लगातार छठे दिन भी जारी इस हिंसक संघर्ष ने अल्बानिया की सरकार के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है, और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस जन-आक्रोश को संभालना बड़ी चुनौती बन गया है।

फ्रांस, इटली और स्पेन में भी भारी हिंसा और आगजनी

वैसे सिर्फ अल्बानिया ही नहीं है जो विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल की सड़कों पर भी जनसैलाब उमड़ पड़ा है, जिसने कई प्रमुख यूरोपीय शहरों को रणक्षेत्र में बदल दिया है।

फ्रांस में पिछले तीन हफ्तों से हाई स्कूल के छात्र शिक्षा संसाधनों की कमी के खिलाफ नाकाबंदी कर रहे थे, जो अब व्यापक महंगाई विरोधी आंदोलन बन चुका है। पेरिस, मार्सेली, ल्यों और लिमोगेस में भारी लूटपाट और हिंसा हुई। लिमोगेस में 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लगा दी गई।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 'जिन्होंने लूटपाट की है और गणतंत्र को गिराने की कोशिश की है, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।' अब तक 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा, 'माइग्रेंट्स ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया है, उन्हें तुरंत सीमाएं बंद करनी चाहिए!' वैसे फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस हिंसा में प्रवासियों की भूमिका से इनकार किया है।

स्पेन की राजधानी मैड्रिड के 'पुएर्ता डेल सोल' स्क्वायर पर हफ्तों से सैकड़ों तंबू गड़े हुए हैं, जो घरों के आसमान छूते किरायों और बेदखली के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। यह विरोध 87 वर्षीय मैरीकार्मेन की बेदखली के बाद अस्पताल में हुई मौत के बाद शुरू हुआ।

स्पेन में न्यूनतम वेतन 1,221 यूरो (~$1,370) है, जबकि 80 वर्ग मीटर के अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो (~$1,270) है। यानी युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा केवल रहने पर खर्च कर रहे हैं। जनता के दबाव के कारण संसद में हाउसिंग बिल पास न होने पर प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने नवंबर में मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की है।

इटली में महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई है। मिलान, ट्यूरिन और बोलोग्ना में हिंसक झड़पें हुईं। मिलान में पुलिस गाड़ियों पर वॉटर कैनन चलाए गए और 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें अधिकांश नाबालिग है। अब '17 अक्टूबर आंदोलन' ने हर शनिवार स्थायी प्रदर्शन का आह्वान किया है।

वहीं बाल्कन देश सर्बिया में पिछले दो सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे छात्र आगामी चुनावों में पूर्व सत्तावादी नेता अलेक्जेंडर वुसिक की वापसी को चुनौती दे रहे हैं।

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