SpaceX News: स्टॉक मार्केट में धांसू लिस्टिंग के बाद स्पेसएक्स के भारी-भरकम स्टारशिप (Starship) ने अपना पहला बड़ा टेस्ट फ्लाइट लॉन्च किया। इसे कंपनी के सीईओ एलॉन मस्क (Elon Musk) की स्पेस से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है। सुपर हैवी बूस्टर के ऊपर लगाकर स्टारशिप ने शुक्रवार शाम स्थानीय समय के हिसाब से शाम 05:51 बजे टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में स्थित कंपनी की स्टारबेस लॉन्च फैसिलिटी से उड़ान भरी थी। इस टेस्ट मिशन में रॉकेट स्टारलिंक सैटेलाइट को लेकर गया है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक घंटे तक चलने वाले इस मिशन के आखिरी में इन सैटेलाइट्स को पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाना है।
Elon Musk के SpaceX के लिए Starship कितना अहम
स्पेसएक्स के स्टारलिंक कम्युनिकेशन नेटवर्क को बढ़ाने, इंसानों को चांद और उससे आगे भेजने, और अंतरिक्ष यानी स्पेस में डेटा सेंटर बनाने के लक्ष्य के लिए स्टारशिप काफी अहम है। हालांकि इसके रास्ते में कुछ धमाके, खराबी और देरी जैसी दिक्कतें भी आईं। इसकी दिक्कतों को लेकर निवेशक कितने संवेदनशील हैं, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि मिशन में देरी के चलते शेयर धड़ाधड़ टूटने लगे थे। शुक्रवार को इसके शेयर 3% टूटकर $115 पर बंद हुए थे और एक महीने में करीब 25% फिसल चुका है और फिलहाल $135 के आईपीओ प्राइस से काफी नीचे है। लिस्टिंग के दिन 12 जून 2026 को यह $161 पर बंद हुआ था।
स्पेसएक्स पूरी तरह से स्टारशिप पर ध्यान दे रही है। ब्लूमबर्ग की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने कई वर्षों तक इंडस्ट्री की रीढ़ रही अपने फाल्कन रॉकेटों पर 2028 के बाद ऑर्बिट यानी कक्षा तक जाने वाली खास उड़ानों के लिए सैटेलाइट ऑपरेटर्स से बुकिंग लेना बंद कर दिया है।
स्टारशिप टेस्ट रॉकेट की 13वीं उड़ान
अपनी 13वीं उड़ान में स्टारशिप सुपर हैवी बूस्टर के 33 रैप्टर इंजन एक साथ प्रज्ज्वलित होने के बाद अंतरिक्ष की तरफ बढ़ा, जहां यह ऑर्बिटल स्पीड के करीब पहुंचेगा। वहीं स्टारशिप से अलग होने के बाद बूस्टर मेक्सिको की खाड़ी में उतरा। कंपनी ने रॉकेट को हवा में ही पकड़ने वाला तरीका इस बार नहीं आजमाया, जिसे उन्होंने 2024 के मिशन में इस्तेमाल किया था। स्पेस में स्टारशिप अपने एक इंजन को दोबारा चालू करने की कोशिश, 20 स्टारलिंक सैटेलाइट्स को तैनात करना, सैटेलाइट्स को सोलर पैनलों को खोलने और लेजर वाली कम्युनिकेशंस के जरिए स्टारलिंग नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश जैसे काम करेगा।
सैटेलाइट्स को कक्षा में रखने के करीब 20 मिनट बाद सैटेलाइट्स गिरकर धरती के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और जल जाएगा। उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद स्टारशिप को हिंद महासागर में नियंत्रित तरीके से आने की उम्मीद है। बता दें के स्पेसएक्स ने स्टारशिप को ऐसे रॉकेट के रूप में डिजाइन किया है कि सुपर हैवी बूस्टर और स्पेसएक्स हर मिशन के बाद सुरक्षित धरती पर उतरें और आगे के मिशन में भी काम कर सकें। ऐसा कारनामा करने वाली स्पेसएक्स दुनिया की इकलौती कंपनी है। कंपनी स्टारशिप बनाने पर $1500 करोड़ खर्च कर चुकी है।
NASA के साथ $400 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट
स्टारशिप के पास नासा के साथ करीब $400 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट हैं, जिनके तहत स्टारशिप के जरिए साल 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्पेसएक्स को अंतरिक्ष में स्टारशिप में ईंधन भरने की तकनीक विकसित करनी होगी, लगातार एक दर्जन या इससे अधिक सफल लॉन्च करने होंगे और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह इंसानों की यात्रा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।