Khaleda Zia Dies: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन, राजनीति के एक युग का अंत

Khaleda Zia Death: पिछले कुछ दिनों से खालिदा जिया की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। ढाका के एवरकेयर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, वे लिवर सिरोसिस, फेफड़ों में संक्रमण, गंभीर अर्थराइटिस, डायबिटीज और हृदय रोगों से जूझ रही थीं

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 8:50 AM
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डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था

Khaleda Zia: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख बेगम खालिदा जिया का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। रॉयटर्स और स्थानीय मीडिया 'द डेली स्टार' के अनुसार, वे लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनकी मृत्यु के साथ ही बांग्लादेश के एक राजनीतिक युग का अंत हो गया है।

पिछले कुछ दिनों से खालिदा जिया की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। ढाका के एवरकेयर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, वे लिवर सिरोसिस, फेफड़ों में संक्रमण, गंभीर अर्थराइटिस, डायबिटीज और दिल इ बीमारियों से जूझ रही थीं। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।


एक ऐतिहासिक राजनीतिक सफर

खालिदा जिया ने 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। वे कुल तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं। उनके और शेख हसीना के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को 'बैटल ऑफ बेगम्स' के नाम से जाना जाता था, जिसने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित किया। 1981 में अपने पति राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति की कमान संभाली और सैन्य शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन का चेहरा बनीं।

बांग्लादेश में शोक की लहर

उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही पूरे बांग्लादेश में शोक की लहर है। BNP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का ढाका की सड़कों और अस्पताल के बाहर जमावड़ा लग गया है। पार्टी ने इसे देश के लिए एक 'अपूरणीय क्षति' बताया है। 17 साल का निर्वासन खत्म कर हाल ही में बांग्लादेश लौटे उनके बेटे तारिक रहमान, अंतिम समय में अपनी मां के साथ मौजूद रहे।

बेगम खालिदा जिया का जीवन जीत, हार, जेल और बीमारी के बीच संघर्ष की एक लंबी दास्तां रहा है। उनके समर्थकों के लिए वे 'देशनेत्री' थीं। उनकी मृत्यु न केवल BNP के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की राजनीति के लिए एक बड़ी घटना है।

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