भारत और इजराइल ने UN में पाकिस्तान-बेलारूस के प्रस्ताव के खिलाफ किया वोट, आर्म्स कंट्रोल से जुड़ा ये क्या है मामला?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी अनमोल शेर बेदी ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है। अपने पुराने और सुसंगत रुख को दोहराते हुए भारत ने कहा कि सुरक्षा चिंताएं किसी एक सीमित क्षेत्र या सीमाओं तक सीमित नहीं रहती हैं

अपडेटेड Nov 03, 2026 पर 12:49 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
भारत ने कहा कि सुरक्षा चिंताएं किसी एक सीमित क्षेत्र या सीमाओं तक सीमित नहीं रहती हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में पाकिस्तान और बेलारूस की ओर से पेश किए रीजनल और सबरीजनल पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण से जुड़े एक मसौदा प्रस्ताव पर वोटिंग हुई ।193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र निकाय में भारत और इजराइल ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला है। सामान्य और पूर्ण निरस्त्रीकरण: क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तरों पर पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण (General and complete disarmament: Conventional arms control at the regional and subregional levels) टाइटस वाले इस प्रपोजल के पक्ष में 180 देशों ने वोट किया।भारत और इजराइल इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले एकमात्र दो देश रहे।

भारत ने वोट के खिलाफ क्यों दिया तर्क?

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी अनमोल शेर बेदी ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है। अपने पुराने और सुसंगत रुख को दोहराते हुए भारत ने कहा कि सुरक्षा चिंताएं किसी एक सीमित क्षेत्र या सीमाओं तक सीमित नहीं रहती हैं। अनमोल शेर बेदी ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण को प्राथमिक रूप से सिर्फ क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संदर्भों में ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। रक्षा क्षमताओं में संतुलन बनाए रखने के दृष्टिकोण पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि किसी देश की सुरक्षा चिंताएं उसकी क्षेत्रीय सीमाओं पर आकर रुक जाती हैं।


संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग की प्रक्रिया पर सवाल

भारत ने इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग (UN Disarmament Commission) से क्षेत्रीय समझौतों के लिए सिद्धांत तैयार करने के अनुरोध पर भी सवाल उठाया। भारतीय प्रतिनिधि बेदी ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि आयोग पहले ही इस विषय पर आम सहमति से तीन महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और सिफारिशें अपना चुका है। पहली 1993 में क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण पर दिशा-निर्देश और सिफारिशें, दूसरी 1999 में पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर दिशा-निर्देश और तीसरी 2017 में पारंपरिक हथियारों के क्षेत्र में व्यावहारिक विश्वास निर्माण उपायों पर सिफारिशें। बेदी ने कहा कि जब इसी विषय पर पहले से ही तीन बार आम सहमति बन चुकी है, तो फिर से जीरो से शुरुआत करने का औचित्य समझ से परे है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे इसका एकमात्र उद्देश्य यूएन निरस्त्रीकरण तंत्र को उलझाए रखना है।

दक्षिण एशिया से जुड़े पैराग्राफ का भारत ने किया अलग से विरोध

प्रस्ताव में एक विशेष पैराग्राफ शामिल था, जिसमें लैटिन अमेरिकी देशों के बीच परामर्श और दक्षिण एशिया के संदर्भ में दिए गए पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण के प्रस्तावों का जिक्र किया गया था। भारत ने दक्षिण एशिया के संदर्भ वाले इस विशिष्ट पैराग्राफ के खिलाफ अलग से मतदान किया।

क्या कहता है पाकिस्तान-बेलारूस का यह प्रस्ताव?

पाकिस्तान और बेलारूस द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि शीत युद्ध के बाद के दौर में शांति और सुरक्षा के लिए अधिकांश खतरे एक ही क्षेत्र में स्थित देशों के बीच उत्पन्न होते हैं, इसलिए पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए। प्रस्ताव में न्यूनतम संभव हथियारों और सैन्य बलों के स्तर पर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले समझौतों की वकालत की गई है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि सैन्य रूप से महत्वपूर्ण देशों और बड़ी सैन्य क्षमताओं वाले देशों की क्षेत्रीय सुरक्षा समझौतों को बढ़ावा देने में विशेष जिम्मेदारी होती है।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।